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अछूतोद्धारक थे महर्षि दयानंद सरस्वती
ब्यूरो
Updated Mon, 16 Nov 2015 01:08 AM IST
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ललितपुर/महरौनी। महर्षि दयानंद सरस्वती योग संस्थान महरौनी के तत्वावधान में समाज सुधारक, वेदोद्धारक, नारी और अछूतोद्धारक महर्षि दयानंद सरस्वती का 132वां बलिदान दिवस मनाया गया। इस अवसर वक्ताओं ने उनके जीवन पर प्रकाश डाला।
बलिदान दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बाबूलाल द्विवेदी ने कहा कि महर्षि दयानंद में सभी सदगुणों का संगम था। उन्होंने समाज सुधार के साथ वेदोद्धारक एवं अछूतोद्धारक की भूमिका निभाई। आर्य समाज के प्रधान पुरुषोत्तम नारायण दुबे ने महर्षि दयानंद के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने मरती हुई आर्य जाति में आत्म सम्मान व आत्म गौरव का मंत्र फूंका। उन्होंने संस्कृति तथा सभ्यता पर गर्व करना सिखाया। शिक्षक हृदेश गोस्वामी ने कहा कि महर्षि दयानंद सत्यवादिता और निर्भीकता के परिचायक थे।
शिक्षक लखन लाल आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद स्वराज्य के प्रथम मंत्र दाता थे। व्यास मुकेश नायक, आचार्य बलवंत सिंह एवं पतंजली योग पीठ के तहसील प्रभारी भागीरथ प्रजापति ने संयुक्त रूप से भजनों के माध्यम से मानव जीवन का मूल्य एवं ईश्वर की स्तुति का महत्व बताया। गुरुकुल कुरुक्षेत्र के ब्रह्मचारी काव्य आर्य ने धन्य है तुझको ये ऋषि तूने हमें जगा दिया, सो-सो के लुट रहे थे हम तूने हमें बचा लिया... भजन की प्रस्तुति से सबको मुग्ध कर दिया।
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मुख्य यजमान ठाकुर अवधेश प्रताप सिंह ने सपत्नीक यज्ञ में आहुतियां दी। इसमें अन्य लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर ठाकुर भगवत सिंह, भानुप्रताप सिंह, हरप्रसाद प्रजापति, रविंद्र सिंह, छोटू सेंगर, मान सिंह, सोनू पाठक, रमेश सेन, भल्लू प्रजापति, राजेंद्र नांगल, रामेश्वर रजक, नीरज गुप्ता, ऋषिराज सिंह, देवेंद्र सेन, प्रदीप सेन, प्यारेलाल सेन, रामप्रताप सिंह, उदयभान सिंह, जयदेवी शुक्ला, श्रीदेवी नायक आदि उपस्थित रहे।
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बलिदान दिवस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बाबूलाल द्विवेदी ने कहा कि महर्षि दयानंद में सभी सदगुणों का संगम था। उन्होंने समाज सुधार के साथ वेदोद्धारक एवं अछूतोद्धारक की भूमिका निभाई। आर्य समाज के प्रधान पुरुषोत्तम नारायण दुबे ने महर्षि दयानंद के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने मरती हुई आर्य जाति में आत्म सम्मान व आत्म गौरव का मंत्र फूंका। उन्होंने संस्कृति तथा सभ्यता पर गर्व करना सिखाया। शिक्षक हृदेश गोस्वामी ने कहा कि महर्षि दयानंद सत्यवादिता और निर्भीकता के परिचायक थे।
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शिक्षक लखन लाल आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद स्वराज्य के प्रथम मंत्र दाता थे। व्यास मुकेश नायक, आचार्य बलवंत सिंह एवं पतंजली योग पीठ के तहसील प्रभारी भागीरथ प्रजापति ने संयुक्त रूप से भजनों के माध्यम से मानव जीवन का मूल्य एवं ईश्वर की स्तुति का महत्व बताया। गुरुकुल कुरुक्षेत्र के ब्रह्मचारी काव्य आर्य ने धन्य है तुझको ये ऋषि तूने हमें जगा दिया, सो-सो के लुट रहे थे हम तूने हमें बचा लिया... भजन की प्रस्तुति से सबको मुग्ध कर दिया।
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मुख्य यजमान ठाकुर अवधेश प्रताप सिंह ने सपत्नीक यज्ञ में आहुतियां दी। इसमें अन्य लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर ठाकुर भगवत सिंह, भानुप्रताप सिंह, हरप्रसाद प्रजापति, रविंद्र सिंह, छोटू सेंगर, मान सिंह, सोनू पाठक, रमेश सेन, भल्लू प्रजापति, राजेंद्र नांगल, रामेश्वर रजक, नीरज गुप्ता, ऋषिराज सिंह, देवेंद्र सेन, प्रदीप सेन, प्यारेलाल सेन, रामप्रताप सिंह, उदयभान सिंह, जयदेवी शुक्ला, श्रीदेवी नायक आदि उपस्थित रहे।