ललितपुर। जय बुंदेलखंड कॉलेज ऑफ लॉ पनारी में चौरी-चौरा शताब्दी महोत्सव के उपलक्ष्य में अधिवक्ताओं का आजादी में योगदान पर परिचर्चा आयोजित की गई।
महेंद्र जैन मयूर ने कहा कि आजादी की लड़ाई में क्रांतिकारियों का भी अविस्मरणीय योगदान रहा है। 4 फरवरी 1921 को गोरखपुर के चौरी-चौरा में जब आजादी के खातिर क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन के नुमाइंदो से भरे पुलिस थाने को फूंक दिया थी। उसी समय देश में चल रहे असहयोग आंदोलन को गांधी जी ने वापस ले लिया था, जबकि उस समय असहयोग आंदोलन चरम पर था। यदि उस समय असहयोग आंदोलन वापस नहीं लिया गया होता तो शायद देश को स्वतंत्रता काफी पहले मिल गई होती। कॉलेज के निदेशक केदारनाथ तिवारी ने कहा कि आजादी के इतिहास में योगदान देने वाले अधिवक्ताओं, जिनमें बाबा साहब आंबेडकर, महात्मा गांधी, मदन मोहन मालवीय जैसे कई श्रेष्ठ विधि नेताओं के नाम शामिल है, जिन्होंने उस समय न केवल देश में बल्कि विदेश में जाकर भी अपनी विधि की विशेषज्ञता का परिचय दिया। इस मौके पर राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय विधि मंत्री राम सिंह राजपूत, व्यापार मंडल के पदाधिकारी अशोक जैन अनौरा, मण्डलीय पदाधिकारी एमपी तिवारी, दिनेश चंद्र, रामनारायण मिश्र, चंद्रशेखर सोनी, रूपेश साहू आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

जय बुंदेलखंड कालेज आफ ला पनारी में परिचर्चा को संबोधित करते अतिथि- फोटो : LALITPUR