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फेसबुक, इंस्टाग्राम पर नजर आएंगे ललितपुर के पर्यटन क्षेत्र
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ललितपुर। जिले के पर्यटन क्षेत्रों की खूबसूरती और इतिहास अब फेसबुक और इंस्टाग्राम पर नजर आएगा। वन विभाग ने इसे लेकर तैयारी शुरू कर दी है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ललितपुर के पर्यटन क्षेत्रों के पेज बनाकर जानकारी अपलोड की जा रही है। वहीं पर्यटक स्थलों पर पहुंचने वाले मार्ग सुगम होंगे।
हाल ही में चित्रकूट में बुंदेलखंड के पर्यटन विकास को लेकर शासन स्तर के अधिकारियों की वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बुंदेलखंड के पर्यटन क्षेत्रों का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए थे। जिले में पर्यटन की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। यहां का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम से लेकर स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध रहा है। देवगढ़ का दशावतार मंदिर, तालबेहट का मर्दन सिंह किला, बानपुर का किला, कस्बा पाली स्थित नीलकंठ, चांदपुर-जहाजपुर में स्थापत्य कला का बेजोड़ उदाहरण मिलता है।
वहीं प्राकृतिक पर्यटन क्षेत्र में दूधई, पांड़वन, करकरावल का झरना, राजघाट बांध, बंदरगुढा, रणछोरधाम, कनकद्दर जलप्रपात सहित यूपी-एमपी सीमा पर बह रही बेतवा नदी के किनारों पर काफी पर्यटन स्थल हैं। इन पर्यटन क्षेत्रों में अधिकांश ऐसे हैं, जो घने जंगलों के बीच है। यहां जाने के लिए दुर्गम रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। इन पर्यटन क्षेत्रों का प्रचार-प्रसार ठीक तरह से न होने के चलते इनकी जानकारी सीमित क्षेत्र तक है। अब इन पर्यटक स्थलों को सोशल मीडिया प्लेटफार्म दिया जाएगा। जिससे कि लोग इनके बारे में जान सकें।
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शासन स्तर के अधिकारियों के निर्देश पर वन विभाग ट्विटर, इंस्ट्राग्राम, फेसबुक पर जनपद का एक पेज तैयार करवा रहा है। जिसमें समस्त पर्यटन क्षेत्रों की विस्तृत जानकारी होगी। वहीं जनपद का अधिकांश पर्यटन वन भूमि में है। जहां पर पहुंच मार्ग न होने के कारण आमनागरिकों व पर्यटकों को जाने के लिए परेशानी होती है। वन विभाग कच्चे मौरंग से मार्ग तैयार करेगा। जिससे वन क्षेत्र भी प्रभावित न हो और पर्यटक आसानी से पहुंच सकें।
बेतवा किनारे पर्यटक स्थल बनाने की तैयारी
वर्तमान में बंदरगुढा बेतवा और विध्यांचल पर्वत नदी के रास्ते के किनारे पर्यटक स्थल बनाने की तैयारी है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश की सीमा पर बेतवा नदी के ऐसे किनारों को सुंदर बनाने की योजना बनाई जा रही है।
सोशल मीडिया पर पर्यटन को लेकर एक पेज तैयार किया जा रहा है। वहीं पर्यटक स्थलों तक पहुंचने के लिए कच्चे मार्ग बनाए जाएंगे। जिससे कि वन क्षेत्र का भूगोल न बिगड़े और इन रास्तों के जरिए पर्यटक स्थान पर आसानी से पहुंच पाएंगे।
डीएन सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी
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हाल ही में चित्रकूट में बुंदेलखंड के पर्यटन विकास को लेकर शासन स्तर के अधिकारियों की वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बुंदेलखंड के पर्यटन क्षेत्रों का प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए थे। जिले में पर्यटन की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। यहां का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम से लेकर स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध रहा है। देवगढ़ का दशावतार मंदिर, तालबेहट का मर्दन सिंह किला, बानपुर का किला, कस्बा पाली स्थित नीलकंठ, चांदपुर-जहाजपुर में स्थापत्य कला का बेजोड़ उदाहरण मिलता है।
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वहीं प्राकृतिक पर्यटन क्षेत्र में दूधई, पांड़वन, करकरावल का झरना, राजघाट बांध, बंदरगुढा, रणछोरधाम, कनकद्दर जलप्रपात सहित यूपी-एमपी सीमा पर बह रही बेतवा नदी के किनारों पर काफी पर्यटन स्थल हैं। इन पर्यटन क्षेत्रों में अधिकांश ऐसे हैं, जो घने जंगलों के बीच है। यहां जाने के लिए दुर्गम रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। इन पर्यटन क्षेत्रों का प्रचार-प्रसार ठीक तरह से न होने के चलते इनकी जानकारी सीमित क्षेत्र तक है। अब इन पर्यटक स्थलों को सोशल मीडिया प्लेटफार्म दिया जाएगा। जिससे कि लोग इनके बारे में जान सकें।
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शासन स्तर के अधिकारियों के निर्देश पर वन विभाग ट्विटर, इंस्ट्राग्राम, फेसबुक पर जनपद का एक पेज तैयार करवा रहा है। जिसमें समस्त पर्यटन क्षेत्रों की विस्तृत जानकारी होगी। वहीं जनपद का अधिकांश पर्यटन वन भूमि में है। जहां पर पहुंच मार्ग न होने के कारण आमनागरिकों व पर्यटकों को जाने के लिए परेशानी होती है। वन विभाग कच्चे मौरंग से मार्ग तैयार करेगा। जिससे वन क्षेत्र भी प्रभावित न हो और पर्यटक आसानी से पहुंच सकें।
बेतवा किनारे पर्यटक स्थल बनाने की तैयारी
वर्तमान में बंदरगुढा बेतवा और विध्यांचल पर्वत नदी के रास्ते के किनारे पर्यटक स्थल बनाने की तैयारी है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश की सीमा पर बेतवा नदी के ऐसे किनारों को सुंदर बनाने की योजना बनाई जा रही है।
सोशल मीडिया पर पर्यटन को लेकर एक पेज तैयार किया जा रहा है। वहीं पर्यटक स्थलों तक पहुंचने के लिए कच्चे मार्ग बनाए जाएंगे। जिससे कि वन क्षेत्र का भूगोल न बिगड़े और इन रास्तों के जरिए पर्यटक स्थान पर आसानी से पहुंच पाएंगे।
डीएन सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी