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ललितपुर जिले में लॉकडाउन के साठ दिनों में 32 ने दी फांसी लगाकर जान

Sat, 23 May 2020 01:18 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 23 May 2020 01:18 AM IST
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lalitpur jile me lockdown ke 60 dino me 32 ne di fansi lagakr jan
लॉकडाउन के दौरान 32 लोगों ने आत्महत्या की। - फोटो : ???? ????
ललितपुर जिले में लॉकडाउन के साठ दिनों में 32 ने दी फांसी लगाकर जान
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ललितपुर। लॉकडाउन के साठ दिनों में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में छोटी छोटी बातों पर मानसिक अवसाद के कारण 32 लोगों ने फांसी के फंदे पर लटककर मौत को गले लगा लिया। कुछ मामलों में शराब के नशे में मामूली बातों को लेकर व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को ठेस मानते हुए मौत के फंदे पर झूल गए। मनोविश्लेषकों ने मानसिक रुप से परेशान चल रहे लोगों को ऐसे कदम से बचने के लिए कुछ दिन के लिए अवसाद देने वाले विषयों से दिमाग हटाकर अन्य कार्यों की ओर ध्यान देने की सलाह दी है।
जिले में लॉकडाउन में जहां कई लोग अपने जीवन के महत्वपूर्ण दिन खुशी- खुशी परिवार के साथ बिताने को अच्छा मान रहे हैं, वहीं कुछ लोगों के जीवन में यह दिन किसी आफत से कम नहीं रहे। घरेलू मामले या फिर बाहरी लोगों के तानों, मारपीट और कहासुनी को बहुत से लोग सहन नहीं कर सके और उन्होंने जिंदगी के सफर का आखिरी कदम तक उठाने का निर्णय ले लिया। जिले में 25 मार्च से अब तक यानि लॉकडाउन के साठ दिनों में शहर कोतवाली क्षेत्र, महरौनी, मड़ावरा, तालबेहट, पाली, नाराहट, जाखलौन आदि थाना क्षेत्रों के विभिन्न गांवों में 32 लोगों ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। इनमें कुछ मामले शराब के नशे में डांट फटकार के रहे, जिन्हें वह सहन नहीं कर सके और मौत को गले लगा लिया। कई मामलों में बाहरी लोगों की प्रताड़ना के कारण भी आत्महत्या जैसे कठोर कदम उठाए हैं। इनमें 20 से 30 साल की उम्र के 12 युवाओं ने फांसी लगाई, जबकि 30 से 40 साल की उम्र के चार लोगों ने आत्महत्या की। 40 से 50 साल की उम्र के 10 लोगों ने फांसी लगाकर आत्महत्या की। 50 से 60 साल के दो लोगों ने भी ऐसा ही कदम उठाया। 20 साल से कम उम्र के चार लोग भी आत्महत्या करने में शामिल रहे।
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आत्महत्या अपराध है। ऐसा कदम जीवन में निराशा के चलते ही उठाया जाता है। आत्महत्या के प्रमुख कारकों में बेरोजगारी, वित्तीस संकट, सामाजिक अलगाव, गंभीर मानसिक या शारीरिक बीमारी, दिव्यांगता, जीवन में तनावपूर्ण घटनाओं का सामना करना, पारिवारिक क्लेश, वैवाहिक कुसमायोजन, शराब की लत, मादक द्रव्यों का सेवन, पहले किया गया आत्महत्या का प्रयास आदि की अहम भूमिका होती है। आत्महत्या को रोकने के उपायों में जीवन के प्रति आशा का भाव विकसित करना चाहिए। नशीली दवाओं का उपयोग रोकना, आग्नेय अस्त्रों तक पहुंच को सीमित करना, व्यक्ति की समस्या समाधान में मदद करना, तनाव उत्पन्न करने वाले कारकों को हटाना, जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना, आर्थिक, मनोवैैैज्ञानिक एवं सामाजिक सपोर्ट करना शामिल है।
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- डा.संजीव कुमार शर्मा, मनोविश्लेषक
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