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Lalitpur: बेटी ने निभाया बेटे का फर्ज...पिता की देह को दी मुखाग्नि, लोगों की आंखे हुई नम
Tue, 26 Aug 2025 12:48 PM IST
दीपक महाजन
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Published by: दीपक महाजन
Updated Tue, 26 Aug 2025 12:48 PM IST
सार
दो बेटियों के पिता गांधीनगर निवासी 50 वर्षीय संजय पाराशर की अंतिम इच्छा थी कि पुत्र न होने के कारण उसे लावारिस हाथों की बजाए बेटी के हाथ से मुखाग्नि दी जाए।
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बेटी नैनी पिता को मुखाग्नि देती हुई
- फोटो : संवाद
विस्तार
पुरुष प्रधान समाज में भावनात्मक संबंधों व पिता की अंतिम इच्छा को पूरी करने के लिए एक बेटी ने अपने पिता की अर्थी को कंधा व पार्थिव देह को मुखाग्नि देकर मिशाल पेश की है।दो बेटियों के पिता गांधीनगर निवासी 50 वर्षीय संजय पाराशर की अंतिम इच्छा थी कि पुत्र न होने के कारण उसे लावारिस हाथों की बजाए बेटी के हाथ से मुखाग्नि दी जाए। सोमवार को उसकी बड़ी बेटी ने सभी रुढि़वादी परम्पराओं को तोड़ कर पिता की देह को मुखाग्नि देकर अंतिम इच्छा को पूरी की।
कोतवाली सदर अंतर्गत शहर के मोहल्ला गांधीनगर नईबस्ती निवासी संजय पाराशर (50) कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उनका झांसी में इलाज चल रहा था। सोमवार की दोपहर उनका निधन हो गया। शव को घर लाया गया। देर शाम उनकी अंतिम यात्रा गांधीनगर स्थित मुक्तिधाम पहुंची। संजय पाराशर के कोई पुत्र नहीं होने के कारण उनकी बड़ी पुत्री नैनी अंतिम संस्कार करने के लिए मुक्तिधाम पहुंच गई। यहां नैनी ने अंतिम संस्कार से पूर्व की सभी क्रियाएं पूरी की और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पिता की देह को मुखाग्नि भी दी। इस दृश्य को देखकर मुक्तिधाम पर मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गई थी।
संजय पाराशर प्राइवेट काम करते थे और उनके दो पुत्रियां हैं। बड़ी पुत्री नैनी भोपाल में एक कंपनी में काम करती है। पिता के बीमार होने पर वह कुछ दिनों पहले घर आ गई थी। पिता का इलाज करवा रही थी। इस बीच सोमवार को संजय पाराशर का निधन हो गया।
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कोतवाली सदर अंतर्गत शहर के मोहल्ला गांधीनगर नईबस्ती निवासी संजय पाराशर (50) कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। उनका झांसी में इलाज चल रहा था। सोमवार की दोपहर उनका निधन हो गया। शव को घर लाया गया। देर शाम उनकी अंतिम यात्रा गांधीनगर स्थित मुक्तिधाम पहुंची। संजय पाराशर के कोई पुत्र नहीं होने के कारण उनकी बड़ी पुत्री नैनी अंतिम संस्कार करने के लिए मुक्तिधाम पहुंच गई। यहां नैनी ने अंतिम संस्कार से पूर्व की सभी क्रियाएं पूरी की और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार पिता की देह को मुखाग्नि भी दी। इस दृश्य को देखकर मुक्तिधाम पर मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गई थी।
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संजय पाराशर प्राइवेट काम करते थे और उनके दो पुत्रियां हैं। बड़ी पुत्री नैनी भोपाल में एक कंपनी में काम करती है। पिता के बीमार होने पर वह कुछ दिनों पहले घर आ गई थी। पिता का इलाज करवा रही थी। इस बीच सोमवार को संजय पाराशर का निधन हो गया।
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