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स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के लिए खुलेगा ललित बाजार
Sun, 24 Feb 2019 01:47 AM IST
देवेंद्र कुमार
lalitpur
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Sun, 24 Feb 2019 01:47 AM IST
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lalit bazar
- फोटो : amarujala
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जिले में स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की बिक्री के लिए जल्द ही शोरूम उपलब्ध हो सकेगा। इस बाजार को उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्थापित किया जा रहा है। इसका नाम ललित बाजार होगा। इसमें आचार से लेकर दलिया, मिक्स आटा, शहद, पापड़ सहित बांस से बने उत्पाद बिक्री के लिए रखे जाएंगे।
ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को स्वरोजगार के प्रति आकर्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन चलाई जा रही है। योजनांतर्गत स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में अब तक 887 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है। इसमें से करीब 15 समूह ऐसे हैं जिन्होंने उत्पादन आरंभ कर दिया है। कुछ समूह अचार बड़ी पापड़, दोना पत्तल, मिक्स आटा, दलिया बना रहे हैं तो कई समूह अगरबत्ती, बांस से निर्मित उत्पाद, बालिकाओं के लिए कपड़े, आर्टीफिशियल सामग्री तैयार कर उनके बाजार तलाश रहे हैं। जिसे ध्यान में रखकर विभागीय अफसरों ने समूहों के निर्मित उत्पादों को बाजार मुहैया कराने का निर्णय लिया है। जिसे मूर्त रूप देने के लिए विभागीय कर्मी जुटे हैं। जिला कारागार के सामने खाली भवन में बाजार की शक्ल दी जा रही है। इसकी ऊपरी मंजिल पर ललित बाजार, उसके ठीक सरस शोरूम लिखा गया है। मुख्य गेट के दोनों ओर आजीविका से संबंधित लोगो व चित्र बनाए गए हैं। शुरुआत में इस बाजार को सप्ताह में एक दिन खोला जाएगा। उत्पादों की मांग बढ़ने पर इसके दिनों में बढ़ोत्तरी की जाएगी। इस बाजार की स्थापना के लिए पहले भी कोशिश की जा चुकी है। वर्ष 2015 में तत्कालीन डीएम जुहेर बिन सगीर ने आकांक्षा समिति की अभिप्रेरणा से सरस शोरूम चालू किया गया था। उद्घाटन के दिन विभिन्न स्वयं सहायता समूहों ने अपने कई उत्पादों को सजाया था लेकिन कुछ ही दिनों में स्वयं सहायता समूह अपने उत्पाद लेकर यहां-वहां हो गए थे। आखिरकार सरस शोरूम पर ताला लटक गया था। अब नए सिरे से बाजार खोला जा रहा है।
ललित बाजार परिसर में बांधी जाती भैंसें
जिस खाली भवन को ललित बाजार का नाम देने की तैयारी है, उस कैंपस में कुछ लोग भैंसों को बांध रहे हैं, जिससे वहां सफाई की समस्या बनी हुई है। यदि यही हाल बना रहा तो इसका कसाई मंडी से गेट खोलना मुश्किल हो जाएगा।
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स्टॉल लगाए जाएंगे समूह
कई स्वयं सहायता समूह अपने उत्पाद बना रहे हैं, ऐसे समूहों को विक्रय केंद्र मुहैया कराया जा रहा है। इस तरह समूहों को प्रोत्साहन मिल सकेगा, साथ ही गुणवत्तायुक्त सामग्री लोगों को आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
रवि दुबे
जिला मिशन प्रबंधक
एनआरएलएम
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ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों को स्वरोजगार के प्रति आकर्षित करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन चलाई जा रही है। योजनांतर्गत स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में अब तक 887 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है। इसमें से करीब 15 समूह ऐसे हैं जिन्होंने उत्पादन आरंभ कर दिया है। कुछ समूह अचार बड़ी पापड़, दोना पत्तल, मिक्स आटा, दलिया बना रहे हैं तो कई समूह अगरबत्ती, बांस से निर्मित उत्पाद, बालिकाओं के लिए कपड़े, आर्टीफिशियल सामग्री तैयार कर उनके बाजार तलाश रहे हैं। जिसे ध्यान में रखकर विभागीय अफसरों ने समूहों के निर्मित उत्पादों को बाजार मुहैया कराने का निर्णय लिया है। जिसे मूर्त रूप देने के लिए विभागीय कर्मी जुटे हैं। जिला कारागार के सामने खाली भवन में बाजार की शक्ल दी जा रही है। इसकी ऊपरी मंजिल पर ललित बाजार, उसके ठीक सरस शोरूम लिखा गया है। मुख्य गेट के दोनों ओर आजीविका से संबंधित लोगो व चित्र बनाए गए हैं। शुरुआत में इस बाजार को सप्ताह में एक दिन खोला जाएगा। उत्पादों की मांग बढ़ने पर इसके दिनों में बढ़ोत्तरी की जाएगी। इस बाजार की स्थापना के लिए पहले भी कोशिश की जा चुकी है। वर्ष 2015 में तत्कालीन डीएम जुहेर बिन सगीर ने आकांक्षा समिति की अभिप्रेरणा से सरस शोरूम चालू किया गया था। उद्घाटन के दिन विभिन्न स्वयं सहायता समूहों ने अपने कई उत्पादों को सजाया था लेकिन कुछ ही दिनों में स्वयं सहायता समूह अपने उत्पाद लेकर यहां-वहां हो गए थे। आखिरकार सरस शोरूम पर ताला लटक गया था। अब नए सिरे से बाजार खोला जा रहा है।
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ललित बाजार परिसर में बांधी जाती भैंसें
जिस खाली भवन को ललित बाजार का नाम देने की तैयारी है, उस कैंपस में कुछ लोग भैंसों को बांध रहे हैं, जिससे वहां सफाई की समस्या बनी हुई है। यदि यही हाल बना रहा तो इसका कसाई मंडी से गेट खोलना मुश्किल हो जाएगा।
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स्टॉल लगाए जाएंगे समूह
कई स्वयं सहायता समूह अपने उत्पाद बना रहे हैं, ऐसे समूहों को विक्रय केंद्र मुहैया कराया जा रहा है। इस तरह समूहों को प्रोत्साहन मिल सकेगा, साथ ही गुणवत्तायुक्त सामग्री लोगों को आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।
रवि दुबे
जिला मिशन प्रबंधक
एनआरएलएम