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मायावती सरकार के दिन फिरते ही बदल गए हालात
Thu, 14 Mar 2019 12:45 AM IST
Pragyan dubey
lalitpur
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Published by: Pragyan dubey
Updated Thu, 14 Mar 2019 12:45 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। वार्ड नंबर दो स्थित मान्यवर कांशीराम आवासीय कॉलोनी सुरईघाट जिम्मेदारों की उपेक्षा की भेंट चढ़ गई है। यहां के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिए जाने से जहां सेप्टिक टैंक चोक हैं, तो वहीं पाइप भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इससे उठने वाली दुर्गंध से स्थानीय लोगों को घर में दो पल सुकुन से गुजारना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा पेयजल की भी समस्या बनी हुई है।
तत्कालीन मायावती सरकार ने निर्धन परिवारों को छत मुहैया कराने के मकसद से कांशीराम आवासीय कॉलोनी का निर्माण कराया था। उस दौरान कॉलोनीवासियों को ज्यादा समस्याएं नहीं हुई। जैसे ही सरकार बदली कॉलोनियों में समस्याओं का अंबार लगना आरंभ हो गया। स्थानीय लोग मौजूदा सरकार के कामकाज से भी खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि उनकी समस्याएं सुनने के लिए कोई नहीं आता है। आखिर वह किन्हें अपनी समस्याएं सुनाएं? जिस वजह से समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। वर्तमान में कालोनी के अंदर समस्याएं अनगिनत हैं।
यहां के सेप्टिक टैंक या तो चोक हैं या फिर उनके ऊपर रखे पटिया क्षतिग्रस्त हो गए हैं। यही नहीं, ऊपरी मंजिल के शौचालयों के पाइप क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिनसे गंदगी कालोनी में फैल रही है। इससे उठने वाली दुर्गंध ने जीना मुहाल कर दिया है। लाखों रुपये की लागत से बनाई गई पानी की टंकी अभी तक चालू नहीं हो पाई है। पृथक से बोरिंग के माध्यम से पानी की आपूर्ति होती है, वह भी आए दिन बाधित रहती है। कालोनी में तीन हैंडपंप लगे हुए हैं, इनमें दो हैंडपंप खराब हैं। तीसरे हैंडपंप का ऊपरी ढांचा निकलने लगा है। ऐसे में वह भी खराब होने की स्थिति में है। कॉलोनी के स्कूल के अंदर कोई हैंडपंप नहीं लगाया गया है। बच्चे बाहर लगे हैंडपंप पर निर्भर हैं। यदि इकलौता हैंडपंप खराब हुआ तो स्कूली बच्चों के लिए पेयजल की समस्या से जूझना पड़ सकता है।
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कॉलोनी में पेयजल की समस्या पहले से है। किसी तरह लोग हैंडपंप से पीने का पानी एवं अन्य कपड़ों की सफाई के लिए पानी जुटाते हैं। बीते कई दिनों से दो हैंडपंप खराब हो चुके हैं। एक अन्य हैंडपंप भी खराब होने की स्थिति में है। यदि पानी की टंकी से जलापूर्ति प्रारंभ कर दी जाए तो यहां की पेयजल की समस्या का निदान हो सकता है।
- गनेश प्रसाद अहिरवार
.....
कॉलोनी में कई सेप्टिक टैंक के ढक्कन या तो गायब हैं या फिर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऊपरी मंजिल के शौचालयों के पाइप भी क्षतिग्रस्त हैं। जिस वजह से गंदगी यहां-वहां फैल रही है। इससे उठने वाली दुर्गंध से घर में बैठना मुश्किल हो रहा है। ऐसा नहीं है कि यह स्थिति आज की है। महीनों से यह हाल बना हुआ है, जिनकी कोई सुध नहीं ले रहा है।
- राजेश
.....
कॉलोनी में पेयजल की आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए लाखों रुपये की लागत से टंकी का निर्माण कराया गया। शुरुआती एक दो महीनों तक इससे जलापूर्ति हुई। इसके बाद टंकी को बंद कर दिया गया। कालोनीवासी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि जब टंकी से जलापूर्ति नहीं करनी थी तो इसे बनाने में आखिर लाखों रुपये क्यों बर्बाद किए गए?
- शंकर सिंह
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कॉलोनी में कई समस्याएं बनी हुई हैं लेकिन इनकी सुनवाई के लिए कोई नहीं आता है। कॉलोनीवासियों को पीने के पानी से लेकर कपड़े की धुलाई के लिए हैंडपंप से पानी जुटाना पड़ता है। न तो खराब हैंडपंप सुधारे जा रहे हैं और न ही अन्य कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जा रही है।
- रामवती
समूचे वार्ड की पेयजल समस्या के निदान के लिए ज्ञापन डीएम को दिया है। कॉलोनी में सेप्टिक टैंकों से उठ रही दुर्गंध गंभीर रूप ले रही है। इस संबंध में भी प्रशासनिक अफसरों को अवगत कराएंगे।
- मुकेश रजक, सभासद, वार्ड नंबर दो
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तत्कालीन मायावती सरकार ने निर्धन परिवारों को छत मुहैया कराने के मकसद से कांशीराम आवासीय कॉलोनी का निर्माण कराया था। उस दौरान कॉलोनीवासियों को ज्यादा समस्याएं नहीं हुई। जैसे ही सरकार बदली कॉलोनियों में समस्याओं का अंबार लगना आरंभ हो गया। स्थानीय लोग मौजूदा सरकार के कामकाज से भी खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि उनकी समस्याएं सुनने के लिए कोई नहीं आता है। आखिर वह किन्हें अपनी समस्याएं सुनाएं? जिस वजह से समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। वर्तमान में कालोनी के अंदर समस्याएं अनगिनत हैं।
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यहां के सेप्टिक टैंक या तो चोक हैं या फिर उनके ऊपर रखे पटिया क्षतिग्रस्त हो गए हैं। यही नहीं, ऊपरी मंजिल के शौचालयों के पाइप क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिनसे गंदगी कालोनी में फैल रही है। इससे उठने वाली दुर्गंध ने जीना मुहाल कर दिया है। लाखों रुपये की लागत से बनाई गई पानी की टंकी अभी तक चालू नहीं हो पाई है। पृथक से बोरिंग के माध्यम से पानी की आपूर्ति होती है, वह भी आए दिन बाधित रहती है। कालोनी में तीन हैंडपंप लगे हुए हैं, इनमें दो हैंडपंप खराब हैं। तीसरे हैंडपंप का ऊपरी ढांचा निकलने लगा है। ऐसे में वह भी खराब होने की स्थिति में है। कॉलोनी के स्कूल के अंदर कोई हैंडपंप नहीं लगाया गया है। बच्चे बाहर लगे हैंडपंप पर निर्भर हैं। यदि इकलौता हैंडपंप खराब हुआ तो स्कूली बच्चों के लिए पेयजल की समस्या से जूझना पड़ सकता है।
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कॉलोनी में पेयजल की समस्या पहले से है। किसी तरह लोग हैंडपंप से पीने का पानी एवं अन्य कपड़ों की सफाई के लिए पानी जुटाते हैं। बीते कई दिनों से दो हैंडपंप खराब हो चुके हैं। एक अन्य हैंडपंप भी खराब होने की स्थिति में है। यदि पानी की टंकी से जलापूर्ति प्रारंभ कर दी जाए तो यहां की पेयजल की समस्या का निदान हो सकता है।
- गनेश प्रसाद अहिरवार
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कॉलोनी में कई सेप्टिक टैंक के ढक्कन या तो गायब हैं या फिर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऊपरी मंजिल के शौचालयों के पाइप भी क्षतिग्रस्त हैं। जिस वजह से गंदगी यहां-वहां फैल रही है। इससे उठने वाली दुर्गंध से घर में बैठना मुश्किल हो रहा है। ऐसा नहीं है कि यह स्थिति आज की है। महीनों से यह हाल बना हुआ है, जिनकी कोई सुध नहीं ले रहा है।
- राजेश
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कॉलोनी में पेयजल की आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए लाखों रुपये की लागत से टंकी का निर्माण कराया गया। शुरुआती एक दो महीनों तक इससे जलापूर्ति हुई। इसके बाद टंकी को बंद कर दिया गया। कालोनीवासी यह समझ नहीं पा रहे हैं कि जब टंकी से जलापूर्ति नहीं करनी थी तो इसे बनाने में आखिर लाखों रुपये क्यों बर्बाद किए गए?
- शंकर सिंह
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कॉलोनी में कई समस्याएं बनी हुई हैं लेकिन इनकी सुनवाई के लिए कोई नहीं आता है। कॉलोनीवासियों को पीने के पानी से लेकर कपड़े की धुलाई के लिए हैंडपंप से पानी जुटाना पड़ता है। न तो खराब हैंडपंप सुधारे जा रहे हैं और न ही अन्य कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जा रही है।
- रामवती
समूचे वार्ड की पेयजल समस्या के निदान के लिए ज्ञापन डीएम को दिया है। कॉलोनी में सेप्टिक टैंकों से उठ रही दुर्गंध गंभीर रूप ले रही है। इस संबंध में भी प्रशासनिक अफसरों को अवगत कराएंगे।
- मुकेश रजक, सभासद, वार्ड नंबर दो