फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   Justice that does not let injustice happen in life: Muni Sudhasagar

जीवन में जो अन्याय न होने दे वही न्याय-मुनि सुधासागर

Fri, 07 Oct 2022 10:06 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 07 Oct 2022 10:06 PM IST
विज्ञापन
Justice that does not let injustice happen in life: Muni Sudhasagar
ललितपुर। श्री अभिनंदनोदय तीर्थ क्षेत्र में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि पुंगव सुधा सागर महाराज ने कहा कि किसी के जीवन में जो अन्याय न होने दें वही न्याय है। आज किसी भी प्रकार से व्यक्ति लोकप्रिय बनना चाहता है, पर लोकप्रिय नहीं न्याय प्रिय बनो। उन्होंने कहा कि पापी नहीं पाप पर प्रहार करो। विचारक नहीं विचारों का खंडन करो। इस अवसर पर तीन दिवसीय प्रमेय, रत्नमाला, अनुशीलन युवा विद्वत संगोष्ठी एवं श्रमण संस्कृति स्नातक परिषद का अधिवेशन प्रारंभ हुआ।
विज्ञापन

मुनिश्री ने कहा कि हमें जिसके सिद्धांत पसंद नहीं हैं, हम आज उसको ही रास्ते से हटा देते हैं। डॉक्टर रोगी की दवा करता है या रोग की, लगता तो यह है कि रोगी का इलाज हो रहा है पर असल में रोग का ही इलाज किया जाता है। अगर तुम्हें किसी की बात पसंद नहीं तो बड़ी ही शालीनता से तर्कों के द्वारा बुद्धि से अपना पक्ष रखो पर तुम्हें विचारक के चरित्र का हनन करने का अधिकार नहीं है। अधिवेशन में प्रमेय, रत्नमाला, न्याय ग्रंथों में ब्रहम अ़द्वेैतवाद की समीक्षा एवं आनंद शास्त्री बनारस ने जैन एवं बौद्ध धर्म में प्रत्यक्ष प्रमाण का स्वरूप आलेख प्रस्तुत किया।
विज्ञापन

देश भर से जुटे करीब पांच सौ विद्वानों को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने कहा कि विद्वान सारे भूमंडल का गौरव हैं विद्वान के पांडित्य की सर्व प्रशंसा होती है लेकिन ज्ञानी का सबसे बड़ा उद्देश्य व्यक्तित्व का विकास कर आत्मनिर्भर बनना है। उन्होंने कहा कि कोयल का सौंदर्य उसके स्वर में है स्त्री का सौंदर्य उसके पतिव्रत धर्म में है, पर ज्ञानी का सौंदर्य अपने विकारी परिणामों को समाप्त करने में है। विद्वान को चारों अनुयोगों प्रथानुयोग, करणानुयोग, चरणानुयोग एवं द्रव्यानुयोग में पारंगत होना आवश्यक है। मुनि श्री ने कहा कि दव्यानुयोग के तीनों भेद कर्म सिद्धांत आध्यात्म एवं न्याय इसमें भी महारथ होनी चाहिए तब कहीं तुम विद्वानों की कोटि में होगे। पं. नवीन शास्त्री ने न्याय का प्रमुख ग्रंथ प्रमेय रत्नमाला पर अपना आलेख प्रस्तुत किया जिसमें अद्वैतवाद एवं द्वैतवाद को बिंदु करते हुए परिभाषित किया। संगोष्ठी के कुलाधिपति डॉ. जयकुमार शास्त्री, उपकुलपति प्राचार्य डॉ. अरुण सांगानेर एवं अध्यक्षता आलोक शास्त्री व संचालन पं. अनंत बल्ले सोलापुर महाराष्ट्र ने किया। इस मौके पर दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल अंचल, ब्रह्मचारी मनोज, शीलचंद, अखिलेश, धार्मिक आयोजन समिति संयोजक मनोज, नवीन कुमार, डॉ. अक्षय टडैया आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे। शिविर की व्यवस्था में स्थानीय संयोजक संजीव जैन, सत्येंद्र, जितेंद्र जैन, जिनेंद्र जैन, मंदिर प्रबंधक राजेंद्र एवं पंकज जैन सहित स्वयं सेवी संस्थाओं का योगदान रहा। मुनि पुंगव के मुखारविंद से अभिनंदन नाथ भगवान की शांतिधारा का सौभाग्य तरुण काला, रजनी काला व्यावर हाल मुंबई, चंदाबाई संदीप रजनी,निर्मल कुमार परिवार को प्राप्त हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन

आहारदान का मिला सौभाग्य
शुक्रवार को निर्यापक मुनि सुधासागर महाराज को आहारदान का सौभाग्य अनीता, सौरभ परिवार एवं मुनि पूज्य सागर महाराज को आहारदान चंद्र कुमार परिवार, एलक धैर्यसागर महाराज को आहारदान मुकेश जैन परिवार एवं क्षुल्लक गंभीर सागर महाराज को आहारदान मनोज जैन काका परिवार को मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed