सीट बेल्ट नियमों के पालन पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?: इस मामले में किसने दायर की जनहित याचिका?
सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य सीट बेल्ट के उपयोग, चाइल्ड रिस्ट्रेंट सिस्टम और वाहनों में फर्स्ट-एड किट की अनिवार्यता सहित सड़क सुरक्षा नियमों के प्रभावी प्रवर्तन की मांग वाली जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है। जानें सर्वोच्च न्यायालय ने क्या कहा?
विस्तार
सड़क सुरक्षा नियमों के प्रभावी पालन की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) (पीआईएल) पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुए मामला निपटा दिया। याचिका में अनिवार्य सीट बेल्ट, बच्चों के लिए चाइल्ड रेस्ट्रेंट सिस्टम और वाहनों में फर्स्ट-एड किट जैसी सुरक्षा व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई थी।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने कहा कि मौजूदा कानूनों में पहले से ही वाहन सुरक्षा से जुड़े कई उपायों का अनिवार्य अनुपालन निर्धारित है। ऐसे में मुख्य चिंता कानूनों की कमी नहीं, बल्कि उनके प्रभावी प्रवर्तन की है।
सुप्रीम कोर्ट ने सीट बेल्ट नियमों के पालन को लेकर क्या कहा?
- 9 सितंबर को दिए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वाहन चलने के दौरान सीट बेल्ट समेत कई सुरक्षा उपायों के अनिवार्य अनुपालन के लिए पर्याप्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
- पीठ के अनुसार, यात्रियों द्वारा इन नियमों का पालन नहीं करना या कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं करना मूल रूप से कानून-व्यवस्था और यातायात अनुशासन से जुड़ा विषय है।
- कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल अनिवार्य कानूनी प्रावधानों को दोहराते हुए न्यायिक आदेश जारी करने से उनके वास्तविक प्रवर्तन में मदद नहीं मिलेगी।
PIL में किन सड़क सुरक्षा उपायों की मांग की गई थी?
- जनहित याचिका में सीट बेल्ट के अनिवार्य इस्तेमाल, बच्चों के लिए चाइल्ड रेस्ट्रेंट सिस्टम और वाहनों में फर्स्ट-एड किट जैसी सुरक्षा व्यवस्थाओं के प्रभावी अनुपालन पर जोर दिया गया था।
- याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि कुछ वाहनों में सीट कवर लगाने, सीट बेल्ट रिसेप्टेकल हटाने और अन्य बदलावों के कारण सीट बेल्ट सॉकेट काम नहीं कर पाते हैं। याचिका में यात्रियों द्वारा सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करने और संबंधित अधिकारियों की ओर से पर्याप्त कार्रवाई नहीं होने से जुड़े जोखिमों को भी उठाया गया था।
मोटर वाहन अधिनियम में सीट बेल्ट को लेकर क्या प्रावधान है?
- याचिकाकर्ता डॉ. ज्योथिदेव केसवदेव ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 194B का हवाला दिया। इस प्रावधान में सीट बेल्ट नियमों के उल्लंघन से संबंधित दंड का उल्लेख है और निर्धारित आयु से कम बच्चों को सीट बेल्ट या चाइल्ड रेस्ट्रेंट सिस्टम के जरिए सुरक्षित रखने की आवश्यकता बताई गई है।
- उन्होंने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 138(3) का भी उल्लेख किया, जिसके तहत वाहन चलने के दौरान निर्धारित यात्रियों के लिए सीट बेल्ट पहनना आवश्यक है।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों किया?
- याचिकाकर्ता ने फरवरी में केंद्र सरकार को एक अभ्यावेदन देकर सड़क सुरक्षा से जुड़े इन मुद्दों को उठाया था। उनका कहना था कि अभ्यावेदन पर कोई जवाब नहीं मिलने के बाद उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
- पीठ ने PIL को निपटाते हुए याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी कि वह अपनी याचिका की एक प्रति सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को भेज सकते हैं। ताकि मंत्रालय सड़क सुरक्षा से संबंधित उनके सुझावों और सिफारिशों पर विचार कर सके।
- पीठ ने याचिकाकर्ता डॉ. ज्योथिदेव केसवदेव को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित मधुमेह विशेषज्ञ और शोधकर्ता बताया, जिनके नाम पर 300 से अधिक शोध प्रकाशन हैं।