आगरा की जेल से विष्णु के रिहा होने की सूचना आई, परिजनों ने अमझरा मंदिर में कराई कथा

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Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 24 Feb 2021 01:26 AM IST
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महरौनी/ ललितपुर। दुष्कर्म और अनुसूूचित जाति / जनजाति अधिनियम में स्थानीय न्यायालय से सजा पाने के बाद ललितपुर, आगरा व नैनी की जेलों में बंद रहने वाले महरौनी क्षेत्र के ग्राम सिलावन निवासी विष्णु तिवारी (36) पुत्र स्व. रामेश्वर तिवारी को हाइकोर्ट से बीस साल बाद न्याय मिल सका है। लेकिन, इस दौरान उसकी जिंदगी के बीस साल यूं ही चले गए। पैरवी में आठ एकड़ जमीन बिक गई और माता, पिता व दो भाइयों की मौत हो गई। बीस साल बाद विष्णु के आगरा जेल से रिहा होने की सूचना मिलने पर परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सबसे पहले परिजनों ने अमझरा घाटी के हनुमानजी मंदिर पहुंचकर श्री सत्यनारायण भगवान की कथा कराई और प्रसाद चढ़ाया।
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महरौनी के ग्राम सिलावन निवासी विष्णु तिवारी पर बीस वर्ष पहले 16 सितंबर 2000 को अनुसूचित जाति की एक महिला से दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दुष्कर्म और एससी/ एसटी के मामले में विष्णु को स्थानीय सत्र न्यायालय से आजीवन कारावास सुनाया गया। विष्णु के परिजनों ने निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की, लेकिन अपील और तारीखों में उसके परिवार की अब तक आठ एकड़ जमीन बिक गई। छह साल पहले उसके दो भाई दिनेश और रामकिशोर की मौत हो गई, जबकि तीन वर्ष पहले उसके माता- पिता भी बेटे की रिहाई की उम्मीद में परलोक सिधार गए। माता- पिता के अंतिम संस्कार के लिए उसे पैरोल तक नहीं मिला। इस कारण वह माता- पिता के अंतिम दर्शन भी नहीं कर सका।

पांच भाई व एक बहन में अब विष्णु के दो भाई हैं। इनमें से एक फलों का ठेला लगाकर जीवन- यापन कर रहा है, जबकि दूसरा भाई मजदूरी कर रहा है। उसके भाई महादेव ने दो साल पहले फिर से अपील करते हुए पैरवी शुरू की, जिसका नतीजा यह रहा है कि बीते रोज सोमवार को हाईकोर्ट ने विष्णु को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया। मंगलवार की सुबह विष्णु को रिहा किया गया और परिजनों को सूचना दी गई तो परिजनों ने सबसे पहले अमझरा घाटी जाकर श्री सत्यनारायण भगवान की कथा कराई और अब परिजन विष्णु का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
विष्णु के भाई सत्यनारायण और महादेव ने बताया कि उन्हें जमीन बिकने का कोई अफसोस नहीं है, लेकिन विष्णु के निर्दोष होने के बाद उसे जेल से रिहाई मिल गई। इसमें उसके जीवन के बीस साल बर्बाद हो गए। उसकी शादी तक नहीं हो सकी, अब कौन उससे शादी करेगा। उसका पूरा परिवार बिखर गया था, लेकिन अब विष्णु को इंसाफ मिल गया। इससे परिजन काफी खुश हैं और विष्णु के आने का इंतजार रहे हैं।

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