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Lalitpur News: हाईवे पर वाहनों के खड़े रहने से परेशानी
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मसौरा बैरियर के पास हाईवे-44 पर एक लेन पर खड़े ट्रक।
ललितपुर। जिले से गुजरने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के किनारे बेतरतीब ढंग से खड़े ट्रक सड़क हादसों को दावत दे रहे हैं। इन वाहनों के खड़े रहने से दूसरे वाहन चालकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। रात के समय सड़क किनारे खड़े ट्रक अधिक खतरा पैदा करते हैं। हालांकि कागजों में पुलिस और परिवहन विभाग की टीमों की गाड़ियां निगरानी के लिए दिन-रात हाईवे पर चक्कर काटती रहतीं हैं लेकिन स्थिति में कोई बदलाव आता दिख नहीं रहा है।
जनपद की सीमा से देश का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग-44 गुजरता है। जिले में इसकी सीमा करीब सौ किलोमीटर है। झांसी जनपद के झररघाट से लेकर मध्य प्रदेश की सीमा अमझराघाटी तक जिले की सीमा में हाईवे किनारे सैकड़ों की संख्या में होटल, ढाबे और दुकानें संचालित होती हैं। इनके आसपास सड़क किनारे दिन-रात ट्रक, पिकअप वाहन और ट्रैक्टरों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। यातायात नियमों के अनुसार हाईवे पर पार्किंग प्रतिबंधित है। लेकिन जिले की सीमा से गुजरे हाईवे की स्थिति पूरी तरह से उलट है। तालबेहट, तेरई फाटक, नदनवारा, अमरपुर, मसौरा बैरियर, बंगरिया, उमरिया, गौना, बिरधा, रोंडा सहित अन्य क्षेत्रों में ढाबों, होटल और दुकानों के सामने ट्रक आड़े-तिरछे और हाईवे की एक लेन पर खड़े रहते हैं। इससे वाहनों के आने-जाने के लिए सड़क का आधा हिस्सा ही बचता है। सबसे ज्यादा खराब हालत तो मसौरा बैरियर की है। यहां पर झांसी से सागर की ओर जाने वाले और सागर से झांसी की ओर आने वाले ट्रक यहां पर हाईवे की एक लेन पर खड़े हो जाते हैं। इस कारण से यहां से गुजरने वाले अन्य वाहनों को परेशानी होती है। हाईवे की एक लेन पर ट्रक खड़े होने से कभी-कभी तो यहां पर जाम की स्थिति बन जाती है। रात के समय तो स्थिति और भयावह हो जाती है। कम रोशनी और तेज रफ्तार के चलते कई बार पीछे से आने वाले वाहन चालकों को खड़े ट्रक का अंदाजा देर से लग पाता है, जिससे दुर्घटना होने की स्थिति बन जाती है।
जेडएफडी योजना में गठित सीसीटी टीम दौड़ रही कागजों में
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) योजना के तहत जिले के तीन कोतवाली क्षेत्र शामिल किए गए हैं। इनमें ललितपुर शहर, महरौनी और तालबेहट शामिल हैं। यहां पर पुलिस व आम लोग मिलकर सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाओं के वाले स्थलों को चिह्नित करके सड़क दुर्घटनाओं को रोकने, दुर्घटना होने पर पीड़ित को तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना शामिल है। इस योजना के तहत इन तीनों ही कोतवाली क्षेत्र में क्रिटिकल कॉरीडोर टीम (सीसीटी) बनाई गई थी। इसमें एक उपनिरीक्षक और सिपाही तैनात किए गए। वर्तमान में जिले में चार सीसीटी टीम संचालित हैं। इनमें दो सीसीटी टीम कोतवाली सदर क्षेत्र में ही संचालित हो रही हैं। लेकिन सदर क्षेत्र से गुजरे हाईवे-44 पर यह टीम सक्रिय दिखाई नहीं देती। यही कारण है कि इस क्षेत्र में हाईवे-44 किनारे और हाईवे की लेन पर ट्रक खड़े दिखाई देते हैं।
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हादसों के मुख्य कारण
बिना पार्किंग के ट्रकों का खड़े होना।
रेडियम स्टिकर और चेतावनी संकेतों का अभाव।
ढाबों पर अत्यधिक भीड़ और बेतरतीब पार्किंग।
टू-लेन मार्गों पर ट्रक का आधी सड़क घेरकर खड़ा होना।
रात के समय हाईवे पर खड़े वाहनों का बैकलाइट या पार्किंगलाइट को नहीं जलाना।
नोट- वर्जन बाद में दिया जाएगा।
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जनपद की सीमा से देश का सबसे लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग-44 गुजरता है। जिले में इसकी सीमा करीब सौ किलोमीटर है। झांसी जनपद के झररघाट से लेकर मध्य प्रदेश की सीमा अमझराघाटी तक जिले की सीमा में हाईवे किनारे सैकड़ों की संख्या में होटल, ढाबे और दुकानें संचालित होती हैं। इनके आसपास सड़क किनारे दिन-रात ट्रक, पिकअप वाहन और ट्रैक्टरों की लंबी कतारें लगी रहती हैं। यातायात नियमों के अनुसार हाईवे पर पार्किंग प्रतिबंधित है। लेकिन जिले की सीमा से गुजरे हाईवे की स्थिति पूरी तरह से उलट है। तालबेहट, तेरई फाटक, नदनवारा, अमरपुर, मसौरा बैरियर, बंगरिया, उमरिया, गौना, बिरधा, रोंडा सहित अन्य क्षेत्रों में ढाबों, होटल और दुकानों के सामने ट्रक आड़े-तिरछे और हाईवे की एक लेन पर खड़े रहते हैं। इससे वाहनों के आने-जाने के लिए सड़क का आधा हिस्सा ही बचता है। सबसे ज्यादा खराब हालत तो मसौरा बैरियर की है। यहां पर झांसी से सागर की ओर जाने वाले और सागर से झांसी की ओर आने वाले ट्रक यहां पर हाईवे की एक लेन पर खड़े हो जाते हैं। इस कारण से यहां से गुजरने वाले अन्य वाहनों को परेशानी होती है। हाईवे की एक लेन पर ट्रक खड़े होने से कभी-कभी तो यहां पर जाम की स्थिति बन जाती है। रात के समय तो स्थिति और भयावह हो जाती है। कम रोशनी और तेज रफ्तार के चलते कई बार पीछे से आने वाले वाहन चालकों को खड़े ट्रक का अंदाजा देर से लग पाता है, जिससे दुर्घटना होने की स्थिति बन जाती है।
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जेडएफडी योजना में गठित सीसीटी टीम दौड़ रही कागजों में
सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट (जेडएफडी) योजना के तहत जिले के तीन कोतवाली क्षेत्र शामिल किए गए हैं। इनमें ललितपुर शहर, महरौनी और तालबेहट शामिल हैं। यहां पर पुलिस व आम लोग मिलकर सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाओं के वाले स्थलों को चिह्नित करके सड़क दुर्घटनाओं को रोकने, दुर्घटना होने पर पीड़ित को तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना शामिल है। इस योजना के तहत इन तीनों ही कोतवाली क्षेत्र में क्रिटिकल कॉरीडोर टीम (सीसीटी) बनाई गई थी। इसमें एक उपनिरीक्षक और सिपाही तैनात किए गए। वर्तमान में जिले में चार सीसीटी टीम संचालित हैं। इनमें दो सीसीटी टीम कोतवाली सदर क्षेत्र में ही संचालित हो रही हैं। लेकिन सदर क्षेत्र से गुजरे हाईवे-44 पर यह टीम सक्रिय दिखाई नहीं देती। यही कारण है कि इस क्षेत्र में हाईवे-44 किनारे और हाईवे की लेन पर ट्रक खड़े दिखाई देते हैं।
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हादसों के मुख्य कारण
बिना पार्किंग के ट्रकों का खड़े होना।
रेडियम स्टिकर और चेतावनी संकेतों का अभाव।
ढाबों पर अत्यधिक भीड़ और बेतरतीब पार्किंग।
टू-लेन मार्गों पर ट्रक का आधी सड़क घेरकर खड़ा होना।
रात के समय हाईवे पर खड़े वाहनों का बैकलाइट या पार्किंगलाइट को नहीं जलाना।
नोट- वर्जन बाद में दिया जाएगा।