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अवैध खनन पर नहीं हो रही कार्रवाई
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तालबेहट। वन विभाग के अधिकारियों की ढील के कारण पूरे क्षेत्र में अवैध रूप से बालू खनन और पत्थर तोड़ने का काम जारी है। जानकारी के बाद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कोरोना संक्रमण में जहां कुछ प्रशासनिक अधिकारी दिन-रात मेहनत करके लोगों के जीवन को सुरक्षित रखने का काम कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग अपने आर्थिक लाभ को अधिक ध्यान दे रहे हैं। इसके चलते अवैध नशीले पदार्थों व खनन का कारोबार जारी है।
इस समय क्षेत्र के ग्राम वर्मा बिहार, सरखड़ी, कड़ेसराकलां, पवा, बिजरौठा, तरगुवा, सेरवासककलां, सुनौरी, गनेशपुरा, हर्षपुर, गुलेंदा, विजयपुरा, पूराकलां, पठारी, धमना, सारसेड़, भुचेरा, बलरगुवा, कंधारीखुर्द आदि गांवों में बड़े पैमाने पर पर अवैध खनन हो रहा है। सूरज ढलते ही यह कारोबार शुरू हो जाता है। दिन में वन भूमि व ग्राम सभा की भूमि से बालू तैयार करने के अलावा नदियों और नालों से उठाई बालू को एकत्रित किया जाता है। रात बालू का परिवहन का काम शुरू हो जाता है। इसके अलावा मजदूरों द्वारा दिन में वन विभाग की जमीन में पत्थर तोड़कर खंडे तैयार किए जाते हैं, उन्हें भी रात में ठिकाने लगाया जाता है। लेकिन, यह काम पुलिस को नजर नहीं आता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में वन विभाग के कर्मचारियों से शिकायत करने पर वह कार्रवाई पर ध्यान नहीं देते। इससे खनन कारोबारियों के हौसले बुदंल हैं। ग्रामीणों ने क्षेत्र में वन संप्रदा के खनन पर रोक लगाने की ओर अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया है।
जिस स्थान पर ग्राम हर्षपुर में खंड़े टूट रहे हैं, वह किसी की निजी भूमि है। फिर भी मैं उसको दिखवा लूूंगा। अवैध खनन किसी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा।
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- प्रेमशंकर तिवारी, रेंजर, वन विभाग, तालबेहट
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इस समय क्षेत्र के ग्राम वर्मा बिहार, सरखड़ी, कड़ेसराकलां, पवा, बिजरौठा, तरगुवा, सेरवासककलां, सुनौरी, गनेशपुरा, हर्षपुर, गुलेंदा, विजयपुरा, पूराकलां, पठारी, धमना, सारसेड़, भुचेरा, बलरगुवा, कंधारीखुर्द आदि गांवों में बड़े पैमाने पर पर अवैध खनन हो रहा है। सूरज ढलते ही यह कारोबार शुरू हो जाता है। दिन में वन भूमि व ग्राम सभा की भूमि से बालू तैयार करने के अलावा नदियों और नालों से उठाई बालू को एकत्रित किया जाता है। रात बालू का परिवहन का काम शुरू हो जाता है। इसके अलावा मजदूरों द्वारा दिन में वन विभाग की जमीन में पत्थर तोड़कर खंडे तैयार किए जाते हैं, उन्हें भी रात में ठिकाने लगाया जाता है। लेकिन, यह काम पुलिस को नजर नहीं आता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस संबंध में वन विभाग के कर्मचारियों से शिकायत करने पर वह कार्रवाई पर ध्यान नहीं देते। इससे खनन कारोबारियों के हौसले बुदंल हैं। ग्रामीणों ने क्षेत्र में वन संप्रदा के खनन पर रोक लगाने की ओर अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया है।
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जिस स्थान पर ग्राम हर्षपुर में खंड़े टूट रहे हैं, वह किसी की निजी भूमि है। फिर भी मैं उसको दिखवा लूूंगा। अवैध खनन किसी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा।
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- प्रेमशंकर तिवारी, रेंजर, वन विभाग, तालबेहट