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खेती से जुड़ी चीजों से जीएसटी हटे, फसलों की सही कीमत मिले

Tue, 28 Jan 2020 01:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jan 2020 01:27 AM IST
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GST removed due to agriculture related issues, price of crops should be correct
ललितपुर। एक फरवरी को पेश होने जा रहे देश के आम बजट से किसानों को बहुत उम्मीदें हैं। किसान चाहते हैं कि खेती से जुड़ी हुईं चीजों से जीएसटी हटाई जाए और उनकी फसलों की सही कीमत मिले।
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बजट 2020-21 कुछ ही दिनों बाद पेश होगा। हर साल की तरह इस साल भी मौसम की मार और फसलों की कीमतों से परेशान किसान इस बजट से काफी आस लगाए हैं। किसानों को उम्मीद है कि वित्तमंत्री किसानों की आय बढ़ाने की योजना पेश करेंगी। खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और वनोपज को बढ़ाने के लिए बेहतर व्यवस्था खड़ी करनी होगी। देश की आयात-निर्यात नीति बदलनी होगी, ताकि व्यापारियों के हित की बजाय किसान को फायदा हो सके। सरकार ने पिछले बजट में चुनाव से पहले आनन-फानन में किसानों को 6,000 रुपये प्रति वर्ष देने की प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना घोषित की थी। उसके बाद से बहुत कम किसान परिवारों को 2,000 रुपये की एक या दो किस्त मिलीं। कई किसानों के अकाउंट में पैसा आया और वापस चला गया। पीएम किसान योजना का लाभ अभी भी सभी किसानों को नहीं मिल पाया है। किसान उम्मीद कर रहे हैं कि अबकी बार इस योजना के दायरे में देश के सबसे छोटे और कमजोर किसान को लाया जाएगा। अगर वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण किसानों के कल्याण के बारे में चिंतित हैं, तो उन्हें सबसे पहले किसानों की फसल खरीदने के लिए सरकार के बजट में बढ़ावा करना चाहिए। बजट से किसान उम्मीद कर रहे हैं कि वह प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा करेंगी और किसान विरोधी प्रावधानों को बदलेंगी। किसानों को इस योजना में क्लेम मिलने की व्यवस्था करनी होगी। फसल बीमा के अलावा सूखे की स्थिति से निपटने के लिए सरकार के पास राष्ट्रीय आपदा कोष से राहत देने का प्रावधान भी है। वित्त मंत्री से उम्मीद है कि वे इस कोष को बढ़ाएंगी।
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हर दस एकड़ पर एक ट्यूबवेल होना चाहिए, ताकि सभी किसानों को पानी मिलता रहे और समय से बीज उपलब्ध कराया जाए। किसानों को सस्ता बीज मिले, किसानों को समय से मुआवजे दिए जाएं और मुआवजे की राशि में भी बढ़ोत्तरी की जाए।
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- लक्ष्मी झां
हमें जो मुआवजा मिलता है वह दोगुना किया जाए और सिंचाई के समय पर्याप्त बिजली मिले। किसानों को जल्दी मुआवजा दिया जाए। इस बजट को किसानों के हित देखकर ही पेश किया जाए।
- हरीराम अहिरवार
नेशनल बैंकों से मिलने वाले ऋण की ब्याज दरें घटाई जाएं, क्योंकि नुकसान सह रहे किसान अब ऋण लेकर ही अपना खर्च चला रहे हैं। उर्वरकों पर लगने वाले जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) को कम किया जाए।
- रामस्वरूप
खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और वनोपज को बढ़ाने के लिए बेहतर व्यवस्था खड़ी करनी होगी। देश की आयात-निर्यात नीति बदलनी होगी, ताकि व्यापारियों के हित की बजाय किसान को फायदा हो सके।
- सूरजभान
किसानों की फसलों को सही दाम मिलने चाहिए एवं संसाधनों पर कीमत कम की जानी चाहिए। जिस हिसाब से लागत बढ़ रही है, उस हिसाब से फसलों की कीमत नहीं मिल रही है। देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार तभी मिलेगी जब खेती से जुड़े सेक्टर विकास करेंगे। किसानों की आय बढ़ेगी तभी अर्थव्यवस्था में सुधार संभव है।

- रामदयाल
पूर्व में पेश हुए बजट में किसानों के लिए की गई घोषणाओं को पूर्ण रूप से लागू किया जाए। किसानी संबंधित सामान पर टैक्स हटाना चाहिए, ताकि किसान आसानी से कम दामों में खरीद सकें।
- बद्रीप्रसाद
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