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Lalitpur News: समस्याओं से जूझ रहे पड़वा गांव की सहरिया बस्ती
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ललितपुर-सिलावन। विकासखंड महरौनी अंतर्गत पड़वा गांव की सहरिया बस्ती में कई परिवार आज भी सुविधाओं और रोजगार के अभाव में आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। किसी परिवार को आवास की छत पूरी होने का इंतजार है, तो किसी के सामने रोजगार का संकट है। कुछ परिवार बीमारी और इलाज के बढ़ते खर्च के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। शुक्रवार को पड़वा गांव में ‘अमर उजाला’ की टीम ऐसे ही परिवारों से रूबरू हुई। पेश है आंखों देखा हाल....।
इलाज के लिए गिरवी रखी जमीन
खुमान पुत्र गिडोला का परिवार आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। पत्नी तुलसी बताती हैं कि लकवाग्रस्त पति का इलाज कराने के लिए करीब चार एकड़ जमीन गिरवी रखनी पड़ी। इलाज में खर्च होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती गई। दूसरी ओर, लंबे समय से अधूरे पड़े सरकारी आवास के कारण परिवार को बारिश और मौसम की मार भी झेलनी पड़ रही है। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि परिवार स्वयं आवास की छत का निर्माण करा सके। ऐसे में परिवार को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बेटे के पैर में फ्रैक्चर से बढ़ी परेशानी
60 वर्षीय गुड्डी सहरिया का परिवार इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहा है। उनके तीन बेटे हैं, जिनमें से एक अभी अविवाहित है। परिवार की आमदनी मुख्य रूप से मजदूरी पर निर्भर है। गुड्डी बताती हैं कि बेटे बबलू के पैर में फ्रैक्चर होने के कारण वह मजदूरी करने नहीं जा पा रहा है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो गई है।
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कभी मुखिया थीं, आज रोजगार न होने से लाचार
करीब 25 वर्ष पहले ग्राम प्रधान रहीं सेमराबाई का परिवार आज रोजगार के अभाव में परेशान है। उनके पुत्र दरू उर्फ दरयाव सहरिया लकवाग्रस्त हैं। पहले वह मजदूरी करते थे, पर अब असमर्थ हैं। उनकी पत्नी मंजू मजदूरी कर परिवार पाल रही हैं। पति की बीमारी और घर की जिम्मेदारी के कारण मंजू आर्थिक तंगी झेल रही हैं। दरू और मंजू के तीन नाबालिग बेटे हैं। परिवार बच्चों की पढ़ाई जारी रखने का प्रयास कर रहा है। एक बेटा अंशुल नवोदय विद्यालय में पढ़ता है। दूसरा बेटा महरौनी के विद्यालय में 10वीं कक्षा में है। परिवार ने प्रशासन से आर्थिक सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ मांगा है। इसका उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित होने से बचाना है।
कान की तकलीफ के कारण बेटे की पुलिस में जॉइनिंग रुकी
विधवा सोरईबाई का करीब 10-15 सदस्यों का परिवार आर्थिक तंगी और बीमारी से जूझ रहा है। उनके बड़े बेटे के पुत्र जनवेद का हाल ही में पुलिस सेवा में चयन हुआ था। परिवार को जनवेद की नौकरी से आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद थी। लेकिन जॉइनिंग से पहले ही जनवेद कान की तकलीफ से पीड़ित हो गया। उसका उपचार एम्स भोपाल में कराया गया और वह फिलहाल बिस्तर पर आराम कर रहा है। इससे नौकरी की जॉइनिंग को लेकर परिवार की चिंता बढ़ गई है। परिजनों ने प्रशासन से परिवार की स्थिति देखते हुए आवश्यक सरकारी सहायता मांगी है। परिवार को उम्मीद है कि जनवेद जल्द स्वस्थ होकर अपनी नौकरी जॉइन करेगा।
बारिश के मौसम में दिहाड़ी मजदूरों के लिए रोजी-रोटी का संकट
बारिश के मौसम में दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मजदूरी के अवसर लगभग समाप्त हो गए हैं। इससे रोज कमाकर खाने वाले परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो गया है। सहरिया बस्ती के अधिकांश परिवार मजदूरी पर ही निर्भर हैं। काम नहीं मिलने पर उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो जाती है। यदि परिवार का मुखिया बीमार पड़ जाए, तो कमाने वाला सदस्य भी मजदूरी नहीं कर पाता। ऐसे में इलाज का खर्च उठाना बड़ी चुनौती बन जाता है। घर का राशन जुटाना भी उनके लिए एक बड़ी समस्या है।
बारिश रुकने पर पड़वा गांव में चौपाल लगाकर सहरिया परिवार के लोगों को सरकार की योजनाओं से लाभान्वित कराया जाएगा।-सत्य प्रकाश ,जिलाधिकारी
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इलाज के लिए गिरवी रखी जमीन
खुमान पुत्र गिडोला का परिवार आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है। पत्नी तुलसी बताती हैं कि लकवाग्रस्त पति का इलाज कराने के लिए करीब चार एकड़ जमीन गिरवी रखनी पड़ी। इलाज में खर्च होने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती गई। दूसरी ओर, लंबे समय से अधूरे पड़े सरकारी आवास के कारण परिवार को बारिश और मौसम की मार भी झेलनी पड़ रही है। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि परिवार स्वयं आवास की छत का निर्माण करा सके। ऐसे में परिवार को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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बेटे के पैर में फ्रैक्चर से बढ़ी परेशानी
60 वर्षीय गुड्डी सहरिया का परिवार इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहा है। उनके तीन बेटे हैं, जिनमें से एक अभी अविवाहित है। परिवार की आमदनी मुख्य रूप से मजदूरी पर निर्भर है। गुड्डी बताती हैं कि बेटे बबलू के पैर में फ्रैक्चर होने के कारण वह मजदूरी करने नहीं जा पा रहा है। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति और अधिक कमजोर हो गई है।
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कभी मुखिया थीं, आज रोजगार न होने से लाचार
करीब 25 वर्ष पहले ग्राम प्रधान रहीं सेमराबाई का परिवार आज रोजगार के अभाव में परेशान है। उनके पुत्र दरू उर्फ दरयाव सहरिया लकवाग्रस्त हैं। पहले वह मजदूरी करते थे, पर अब असमर्थ हैं। उनकी पत्नी मंजू मजदूरी कर परिवार पाल रही हैं। पति की बीमारी और घर की जिम्मेदारी के कारण मंजू आर्थिक तंगी झेल रही हैं। दरू और मंजू के तीन नाबालिग बेटे हैं। परिवार बच्चों की पढ़ाई जारी रखने का प्रयास कर रहा है। एक बेटा अंशुल नवोदय विद्यालय में पढ़ता है। दूसरा बेटा महरौनी के विद्यालय में 10वीं कक्षा में है। परिवार ने प्रशासन से आर्थिक सहायता और सरकारी योजनाओं का लाभ मांगा है। इसका उद्देश्य बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित होने से बचाना है।
कान की तकलीफ के कारण बेटे की पुलिस में जॉइनिंग रुकी
विधवा सोरईबाई का करीब 10-15 सदस्यों का परिवार आर्थिक तंगी और बीमारी से जूझ रहा है। उनके बड़े बेटे के पुत्र जनवेद का हाल ही में पुलिस सेवा में चयन हुआ था। परिवार को जनवेद की नौकरी से आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद थी। लेकिन जॉइनिंग से पहले ही जनवेद कान की तकलीफ से पीड़ित हो गया। उसका उपचार एम्स भोपाल में कराया गया और वह फिलहाल बिस्तर पर आराम कर रहा है। इससे नौकरी की जॉइनिंग को लेकर परिवार की चिंता बढ़ गई है। परिजनों ने प्रशासन से परिवार की स्थिति देखते हुए आवश्यक सरकारी सहायता मांगी है। परिवार को उम्मीद है कि जनवेद जल्द स्वस्थ होकर अपनी नौकरी जॉइन करेगा।
बारिश के मौसम में दिहाड़ी मजदूरों के लिए रोजी-रोटी का संकट
बारिश के मौसम में दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मजदूरी के अवसर लगभग समाप्त हो गए हैं। इससे रोज कमाकर खाने वाले परिवारों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो गया है। सहरिया बस्ती के अधिकांश परिवार मजदूरी पर ही निर्भर हैं। काम नहीं मिलने पर उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो जाती है। यदि परिवार का मुखिया बीमार पड़ जाए, तो कमाने वाला सदस्य भी मजदूरी नहीं कर पाता। ऐसे में इलाज का खर्च उठाना बड़ी चुनौती बन जाता है। घर का राशन जुटाना भी उनके लिए एक बड़ी समस्या है।
बारिश रुकने पर पड़वा गांव में चौपाल लगाकर सहरिया परिवार के लोगों को सरकार की योजनाओं से लाभान्वित कराया जाएगा।-सत्य प्रकाश ,जिलाधिकारी