{"_id":"62c9d5ed0e7c1d74621f26cb","slug":"google-map-lalitpur-news-jhs224498059","type":"story","status":"publish","title_hn":"जनपद के 1243 विलुप्त हो चुके जल स्रोत गूगल मैप ने खोजे, राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं मात्र 172 जल स्रोत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जनपद के 1243 विलुप्त हो चुके जल स्रोत गूगल मैप ने खोजे, राजस्व अभिलेखों में दर्ज हैं मात्र 172 जल स्रोत
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ललितपुर। गूगल मैप द्वारा जनपद के 1243 जल स्रोतों को खोजा गया है, जबकि राजस्व अभिलेखों में मात्र 172 जल स्रोत ही दर्ज हैं। इन जल स्रोतों का क्षेत्रफल आधा हेक्टेयर से अधिक है। अब शासन द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर ब्लॉक स्तर पर इन जल स्रोतों की खोजबीन शुरू हो गई है।
जनपद में राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी की शिकायत शासन में ऐसे ही गूंजती रहती हैं। हाल ही में गूगल ने विलुप्त हुए जल स्रोतों की खोज कर राजस्व विभाग को आइना दिखा दिया। शासन द्वारा प्रशासन को एक रिपोर्ट भेजी गई। जिसमें गूगल मैप ने जनपद के समस्त छह ब्लॉक क्षेत्रों में 1243 जल स्रोतों के नाम बताए हैं। इतना ही नहीं इस लिस्ट में अक्षांतर से लेकर देशांतर बताया गया है। यह सभी जल स्रोत आधा हेक्टेयर से लेकर एक हेक्टेयर तक के क्षेत्रफल में हैं। वहीं राजस्व अभिलेखों में जनपद के सभी ब्लॉक क्षेत्रों में मात्र 172 जल स्रोत ही दर्ज है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि जनपद के जल स्रोतों पर अभी भी अवैध कब्जा बदस्तूर जारी है।
जनपद में तालाबों के रूप में प्राचीन काल से जल स्रोत थे। इन जल स्रोतों का पानी कम होने पर इनमें खेती के लिए पट्टे आवंटित किए जाते थे। लेकिन लोगों ने जलस्रोतों के पट्टों को भूमिधरी में दर्ज कराकर अपना अधिपत्य कर लिया। यही कारण है कि राजस्व अभिलेखों में प्राचीन जलस्रोत दिखाई नहीं दे रहे हैं।
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वर्तमान समय में विश्व में जल संकट की संभावनाओं को लेकर विभिन्न वैज्ञानिक टीमें पुराने जलस्रोतों को विकसित करने के लिए खोजबीन कर रहे हैं। जनपद में भी कई भूगर्भ जल वैज्ञानिक अपना डेरा डाल चुके हैं और लगातार ऐसे जलस्रोतों की खोजबीन कर रहे हैं। गूगल रिपोर्ट के बाद अगर इन जलस्रोतों को फिर से विकसित कर लिया गया तो जनपद तालाबों की नगरी पहचाना जाएगा। सिंचाई व पीने के पानी की कभी भी किल्लत महसूस नहीं होगी।
शासन द्वारा भेजी गई गूगल मैप में ब्लॉकवार प्राचीन जलस्रोत की सूची
जखौरा - विरधा - महरौनी - मड़ावरा - तालबेहट - बार
467 - 80 - 130 - 52 - 180 - 334
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जलस्रोत के रूप में अमृत सरोवरों का हो रहा निर्माण
भूमिगत जलस्तर को सुधारने के लिए शासन के आदेश पर जनपद के सभी ब्लॉक क्षेत्रों में अमृत सरोवरों का निर्माण कराया जा रहा है। इन सरोवरों में साफ व स्वच्छ पानी भरा जाएगा। । इतना ही नहीं कुछ माह पूर्व बंगलुरू की एक वैज्ञानिक टीम द्वारा जनपद का दौरा कर गोविंद सागर बांध का जलस्तर गर्मियों के मौसम में बढ़ाने की संभावनाओं को तलाशा था। इसक साथ जनपद में स्थित प्राचीन बावड़ियों का जीर्णोद्घार मनरेगा विभाग के द्वारा कराया जा रहा है।
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जल शक्ति अभियान में खोजे जा रहे जलस्रोत
जल शक्ति अभियान के तहत जनपद में पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए शासन स्तर से नोडल आईएएस शांतनु के द्वारा लगातार जिला प्रशासन के अधिकारी संग बैठक की जा रही है। जलशक्ति अभियान के तहत जलस्रोतों को खोजा जा रहा है। इसको लेकर रविवार को जिला प्रशासनिक अफसरों के साथ नोड़ल शांतनु वीडियो कांफ्रेंसिंग करेंगे। जिसके लिए विभागों ने अपने अपनी डीपीआर तैयार कर लिए है।
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शासन द्वारा गूगल मैप में दर्शाए गए जलस्रोतों की खोज मुख्य विकास अधिकारी के आदेश पर खंड विकास अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
रवींद्रवीर यादव, डीसी मनरेगा।
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जनपद में राजस्व अभिलेखों में गड़बड़ी की शिकायत शासन में ऐसे ही गूंजती रहती हैं। हाल ही में गूगल ने विलुप्त हुए जल स्रोतों की खोज कर राजस्व विभाग को आइना दिखा दिया। शासन द्वारा प्रशासन को एक रिपोर्ट भेजी गई। जिसमें गूगल मैप ने जनपद के समस्त छह ब्लॉक क्षेत्रों में 1243 जल स्रोतों के नाम बताए हैं। इतना ही नहीं इस लिस्ट में अक्षांतर से लेकर देशांतर बताया गया है। यह सभी जल स्रोत आधा हेक्टेयर से लेकर एक हेक्टेयर तक के क्षेत्रफल में हैं। वहीं राजस्व अभिलेखों में जनपद के सभी ब्लॉक क्षेत्रों में मात्र 172 जल स्रोत ही दर्ज है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि जनपद के जल स्रोतों पर अभी भी अवैध कब्जा बदस्तूर जारी है।
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जनपद में तालाबों के रूप में प्राचीन काल से जल स्रोत थे। इन जल स्रोतों का पानी कम होने पर इनमें खेती के लिए पट्टे आवंटित किए जाते थे। लेकिन लोगों ने जलस्रोतों के पट्टों को भूमिधरी में दर्ज कराकर अपना अधिपत्य कर लिया। यही कारण है कि राजस्व अभिलेखों में प्राचीन जलस्रोत दिखाई नहीं दे रहे हैं।
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वर्तमान समय में विश्व में जल संकट की संभावनाओं को लेकर विभिन्न वैज्ञानिक टीमें पुराने जलस्रोतों को विकसित करने के लिए खोजबीन कर रहे हैं। जनपद में भी कई भूगर्भ जल वैज्ञानिक अपना डेरा डाल चुके हैं और लगातार ऐसे जलस्रोतों की खोजबीन कर रहे हैं। गूगल रिपोर्ट के बाद अगर इन जलस्रोतों को फिर से विकसित कर लिया गया तो जनपद तालाबों की नगरी पहचाना जाएगा। सिंचाई व पीने के पानी की कभी भी किल्लत महसूस नहीं होगी।
शासन द्वारा भेजी गई गूगल मैप में ब्लॉकवार प्राचीन जलस्रोत की सूची
जखौरा - विरधा - महरौनी - मड़ावरा - तालबेहट - बार
467 - 80 - 130 - 52 - 180 - 334
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जलस्रोत के रूप में अमृत सरोवरों का हो रहा निर्माण
भूमिगत जलस्तर को सुधारने के लिए शासन के आदेश पर जनपद के सभी ब्लॉक क्षेत्रों में अमृत सरोवरों का निर्माण कराया जा रहा है। इन सरोवरों में साफ व स्वच्छ पानी भरा जाएगा। । इतना ही नहीं कुछ माह पूर्व बंगलुरू की एक वैज्ञानिक टीम द्वारा जनपद का दौरा कर गोविंद सागर बांध का जलस्तर गर्मियों के मौसम में बढ़ाने की संभावनाओं को तलाशा था। इसक साथ जनपद में स्थित प्राचीन बावड़ियों का जीर्णोद्घार मनरेगा विभाग के द्वारा कराया जा रहा है।
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जल शक्ति अभियान में खोजे जा रहे जलस्रोत
जल शक्ति अभियान के तहत जनपद में पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए शासन स्तर से नोडल आईएएस शांतनु के द्वारा लगातार जिला प्रशासन के अधिकारी संग बैठक की जा रही है। जलशक्ति अभियान के तहत जलस्रोतों को खोजा जा रहा है। इसको लेकर रविवार को जिला प्रशासनिक अफसरों के साथ नोड़ल शांतनु वीडियो कांफ्रेंसिंग करेंगे। जिसके लिए विभागों ने अपने अपनी डीपीआर तैयार कर लिए है।
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शासन द्वारा गूगल मैप में दर्शाए गए जलस्रोतों की खोज मुख्य विकास अधिकारी के आदेश पर खंड विकास अधिकारियों द्वारा की जा रही है।
रवींद्रवीर यादव, डीसी मनरेगा।