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भगवान अपने भक्त को अकेला नहीं छोड़ते : आचार्य
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिलावन (ललितपुर)। कथा व्यास आचार्य रमाकांत द्विवेदी ने कहा कि जो जीव भगवान पर विश्वास करता है, ईश्वर उसे कभी अकेला नहीं छोड़ते। जिस दिन आप ठाकुर जी के हो जाएंगे, उस दिन पूरा संसार आपका हो जाएगा। वह सोमवार को ग्राम किसरदा स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन कर रहे थे।
कथा व्यास ने श्री कृष्ण की बाल लीला का वर्णन करते हुए कहा कि बाल्य काल से ही भगवान ने राक्षसों का अंत करना आरंभ कर दिया था। पूतना, अघासुर, वर्णावर्त, धेनुकासुर, बाणासुर, केशी आदि राक्षसों का अंत किया। कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन करने की तैयारी करते हैं। भगवान कृष्ण ने उन्हें इंद्र की पूजा करने से मना करते हुए गोवर्धन महाराज का पूजन करने की बात कही तो इंद्र भगवान उन बातों को सुनकर क्रोधित हो जाते हैं। वह अपने क्रोध से भारी वर्षा करते हैं, जिससे ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। भारी वर्षा को देख भगवान कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर पूरे नगर वासियों को बुला लेते हैं। हार कर इंद्र एक सप्ताह के बाद वर्षा बंद कर कर देते हैं। ब्रज में भगवान श्री कृष्ण और गोवर्धन महाराज के जयकारे लगने लगते हैं। इस मौके पर भगवान को छप्पन भोग लगाया गया। मुख्य यजमान देवी सिंह ने सपत्नीक पूजन अर्चन किया।
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सिलावन (ललितपुर)। कथा व्यास आचार्य रमाकांत द्विवेदी ने कहा कि जो जीव भगवान पर विश्वास करता है, ईश्वर उसे कभी अकेला नहीं छोड़ते। जिस दिन आप ठाकुर जी के हो जाएंगे, उस दिन पूरा संसार आपका हो जाएगा। वह सोमवार को ग्राम किसरदा स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन कर रहे थे।
कथा व्यास ने श्री कृष्ण की बाल लीला का वर्णन करते हुए कहा कि बाल्य काल से ही भगवान ने राक्षसों का अंत करना आरंभ कर दिया था। पूतना, अघासुर, वर्णावर्त, धेनुकासुर, बाणासुर, केशी आदि राक्षसों का अंत किया। कार्तिक माह में ब्रजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन करने की तैयारी करते हैं। भगवान कृष्ण ने उन्हें इंद्र की पूजा करने से मना करते हुए गोवर्धन महाराज का पूजन करने की बात कही तो इंद्र भगवान उन बातों को सुनकर क्रोधित हो जाते हैं। वह अपने क्रोध से भारी वर्षा करते हैं, जिससे ब्रजवासी परेशान हो जाते हैं। भारी वर्षा को देख भगवान कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर पूरे नगर वासियों को बुला लेते हैं। हार कर इंद्र एक सप्ताह के बाद वर्षा बंद कर कर देते हैं। ब्रज में भगवान श्री कृष्ण और गोवर्धन महाराज के जयकारे लगने लगते हैं। इस मौके पर भगवान को छप्पन भोग लगाया गया। मुख्य यजमान देवी सिंह ने सपत्नीक पूजन अर्चन किया।
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