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खसरा व रुबेला के टीकाकरण की जानकारी दी

Sat, 27 Oct 2018 02:13 AM IST
lalitpur
lalitpur Updated Sat, 27 Oct 2018 02:13 AM IST
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give information of khasra and rubela
khasra and rubela - फोटो : demo
खसरा एवं रूबेला टीकाकरण अभियान के अंतर्गत एक कार्यशाला का आयोजन शुक्रवार को राजकीय इंटर कॉलेज के सभागार में  किया गया। इसमें नगर क्षेत्र के समस्त शासकीय, स्ववित्त पोषित प्राथमिक विद्यालय व उच्चतर प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों व नोडल अध्यापकों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
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कार्यक्रम में जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. हुसैन खान द्वारा एमआर टीकाकरण के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी। उन्होंने बताया कि मिजिल्स को हिंदी में खसरा बीमारी के नाम से जाना जाता है। यह एक जानलेवा बीमारी होती है और बच्चों में अपंगता और मृत्यु के बड़े कारणों में से एक है। यह एक बहुत संक्रामक रोग है और यह एक प्रभावित व्यक्ति द्वारा खांसने और छींकने से फैलता है। खसरा से बच्चे को निमोनिया, दस्त और दिमागी संक्रमण जैसी जीवन के लिए घातक जटिलताओं के प्रति संवेदनशील बना सकता है। खसरा के आम लक्षण  तेज बुखार के साथ त्वचा पर लाल दाने व चकत्ते, खांसी, बहती नाक और लाल आंखें होना है।  
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रूबेला के बारे में जानकारी दी उन्होंने बताया कि रुबेला बीमारी या वायरस को छोटा खसरा और जर्मन खसरे के नाम से भी जाना जाता है। रुबेला वायरस के कारण हमारे बच्चे कई तरह की शारीरिक विसंगतियों का शिकार हो जाते है। जैसे -अंधापन (ग्लूकोमा, मोतियाबिंद) ,बहरापन, कमजोर दिमाग (माइक्रोसिफेली, मानसिक मंदता) जन्मजात दिल की बीमारियां। रुबेला से गर्भवती स्त्री में गर्भपात, अकाल प्रसव, मृत प्रसव और विकृत (शारीरिक, मानसिक) बच्चों के जन्म की समस्याएं हो जाती है। डब्ल्यू.एच.ओ. की एसएनओ डा. भाग्यश्री ने बताया कि इन दोनों खसरा-रूबेला बीमारियों से बचाव और इनके वायरस को खत्म करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा खसरा-रूबेला टीकाकरण अभियान 26 नवंबर से शुरू होगा, जिसमें 9 माह से 15 वर्ष तक के हर बच्चे को सभी तरह के स्कूलों, मदरसों आंगनबाड़ी केंद्रों पर सत्र लगाकर एमआर का एक टीका दिया जायेगा। ये टीका सभी बच्चों को दिया जाना जरुरी है, भले ही उन्हें पहले ये टीका दे दिया गया हो। एमआर का टीका पूरी तरह सुरक्षित है और अब तक भारत के 20 राज्यों के लगभग 9.50 करोड़ बच्चों को ये टीका सुरक्षित तरीके से दिया जा चुका है। ये टीका स्वास्थ्य विभाग की प्रशिक्षित टीमों द्वारा डॉक्टरों की देखरेख में दिया जायेगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर जिला अधिकारी सदर व प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी घनश्याम वर्मा ने कहा कि स्कूलों को अपनी सौ प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित करानी है, क्योंकि जब तक बच्चे स्वस्थ नहीं रहेंगे तब तक वह बेहतर ज्ञानार्जन नहीं कर सकेंगे, यह हमारा नैतिक दायित्व है कि हम बच्चों को ऐसा वातावरण दे जिससे बच्चे न केवल स्वस्थ रहे बल्कि स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरुक भी रहें।
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