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गेहूं और महुआ बीनने में विद्यालय भूले बच्चे
amarujala
Updated Sun, 15 Apr 2018 02:26 AM IST
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school, lalitpur news
- फोटो : demo
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खेतों में चल रही गेहूं की फसल की कटाई के कारण और महुआ बीनने के कारण ग्रामीण इलाकों के बच्चे विद्यालय नहीं पहुंच रहे हैं। अभी स्कूल चलो अभियान भी चल रहा है, लेकिन विद्यालयों में बच्चों की उपस्थित 30 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच पा रही है।
दो अप्रैल से नवीन शैक्षिक सत्र की शुरुआत हो गई है। ग्रामीण इलाकों के विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और 06 वर्ष से 14 वर्ष की आयु वाले बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिलाने के लिए स्कूल चलो अभियान चलाकर बेसिक शिक्षा विभाग घर-घर जागरूकता फैलाने का काम कर रहा है।
इसके बावजूद भी विद्यालयों में बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं। इन दिनों लगभग सभी परिषदीय विद्यालयों में 10 से 25 प्रतिशत ही बच्चे अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इसकी एक मुख्य यह भी है कि वर्तमान में गेहूं की फसल की कटाई का चल रहा है। गरीब परिवार के बच्चे इस समय खेतों में फसल की कटाई बे बाद खेतों में गेहूं की बाली बीनने का काम कर रहे हैं। गेहूं की बाली को बेचकर वह पैसे कमाते हैं। इसके साथ ही अभी बच्चे अभी महुआ बीनने का भी काम कर रहे हैं। बाजार में महुआ की कीमत 11 से 13 रुपए किलो तक है, पूरे दिन खेत खलियानों व जंगलों में महुआ बीनकर वह पैसे कमाने में लगे हुए हैं। इन कमाई के चलते बच्चे स्कूल भूल गए हैं और उनके अभिभावकों को भी बच्चों को स्कूल भेजने की चिंता नहीं सता रही है। शिक्षा विभाग भी यह मानने को तैयार है कि वर्तमान में विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति चल रही है। खंड शिक्षा अधिकारियों का भी मानना है कि बच्चों की अनुपस्थिति के पीछे गेहूं की फसल की कटाई बताई जा रही है।
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अभी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है और सत्र के पहले महीने में बच्चों की उपस्थिति कम रहती ही है। शिक्षक घर-घर जाकर लोगों को जागरुक कर रहे हैं। यह बता भी है कि वर्तमान में गेहूं की कटाई का काम चल रहा है और ग्रामीण अभिभावक खेतों पर कटाई करने चले जाते हैं। इससे विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति कम चल रही है।
- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।
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दो अप्रैल से नवीन शैक्षिक सत्र की शुरुआत हो गई है। ग्रामीण इलाकों के विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और 06 वर्ष से 14 वर्ष की आयु वाले बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिलाने के लिए स्कूल चलो अभियान चलाकर बेसिक शिक्षा विभाग घर-घर जागरूकता फैलाने का काम कर रहा है।
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इसके बावजूद भी विद्यालयों में बच्चे नहीं पहुंच रहे हैं। इन दिनों लगभग सभी परिषदीय विद्यालयों में 10 से 25 प्रतिशत ही बच्चे अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। इसकी एक मुख्य यह भी है कि वर्तमान में गेहूं की फसल की कटाई का चल रहा है। गरीब परिवार के बच्चे इस समय खेतों में फसल की कटाई बे बाद खेतों में गेहूं की बाली बीनने का काम कर रहे हैं। गेहूं की बाली को बेचकर वह पैसे कमाते हैं। इसके साथ ही अभी बच्चे अभी महुआ बीनने का भी काम कर रहे हैं। बाजार में महुआ की कीमत 11 से 13 रुपए किलो तक है, पूरे दिन खेत खलियानों व जंगलों में महुआ बीनकर वह पैसे कमाने में लगे हुए हैं। इन कमाई के चलते बच्चे स्कूल भूल गए हैं और उनके अभिभावकों को भी बच्चों को स्कूल भेजने की चिंता नहीं सता रही है। शिक्षा विभाग भी यह मानने को तैयार है कि वर्तमान में विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति चल रही है। खंड शिक्षा अधिकारियों का भी मानना है कि बच्चों की अनुपस्थिति के पीछे गेहूं की फसल की कटाई बताई जा रही है।
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अभी विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया चल रही है और सत्र के पहले महीने में बच्चों की उपस्थिति कम रहती ही है। शिक्षक घर-घर जाकर लोगों को जागरुक कर रहे हैं। यह बता भी है कि वर्तमान में गेहूं की कटाई का काम चल रहा है और ग्रामीण अभिभावक खेतों पर कटाई करने चले जाते हैं। इससे विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति कम चल रही है।
- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।