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बेटे की फर्म से खरीदा फर्नीचर, फंसे एसीएमओ
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हेडिंग: बेटे की फर्म से खरीदा फर्नीचर, फंसे एसीएमओ
सब हेड:- डीएम की जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद अब स्वास्थ्य निदेशक ने मांगा जवाब
- कार्यवाहक सीएमओ रहते हुए मनमाने तरीके से खरीदीं ग्लूकोस्ट्रिप
- 30.32 लाख रुपये की धनराशि का दुरुपयोग करने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बेटे की फर्म से स्टील फर्नीचर और मेडिकल सामग्री खरीद के मामले की जांच में एसीएमओ की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उन पर पद का दुरूपयोग करने के आरोप लगे हैं। साथ ही जांच अधिकारियों को सहयोग न करने पर प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर निदेशक (नियोजन एवं बजट) ने 15 दिन में लिखित स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों से लेकर लिपिक वर्ग के कर्मचारियों के एक के बाद एक लगातार कारनामे सामने आ रहे हैं। तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग में खरीदे गए सामान और मेडिकल सामग्री की जांच की गई थी। जिसमें दो लिपिक निलंबित हो चुके हैं। अब अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश चंद्र दुबे भी जांच के घेरे में आ गए हैं। जांच के दौरान इनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रहीं हैं। एसीएमओ डॉ. मुकेश चंद्र दुबे ने कार्यवाहक सीएमओ का भी जिम्मा संभाला है। इन पर एसीएमओ (भंडार) रहते हुए अपने पुत्र की फर्म से सामग्री का क्रय करने, कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा अधिकारी रहते हुए गाइडलाइन के विपरीत कार्य करने का आरोप है। अब इनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब निदेशक (नियोजन एवं बजट) ने पत्र जारी कर लगाए गए आरोपों के संबंध में दो सप्ताह में स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में लिखा है कि स्पष्टीकरण न देने पर समझा जाएगा कि आपको अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है। जिस पर प्रकरण में गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
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एसीएमओ पर यह लगे आरोप
आरोप- एक
- एसीएमओ भंडार के पद पर रहते हुए मनमानी अपनाते हुए अपने पुत्र व स्वयं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से 2,62,000 रुपये की सामग्री क्रय की गई है। जिसमें 20 अलमारी, तीन रिवाल्विंग चेयर, दो स्टील टेबल जैम पोर्टल से खरीदी हैं। जिसमें पद के दायित्वों का ठीक से निर्वहन न कर अनियमतता करने व कर्मचारी आचरण का उल्लंघन करने के प्रथमदृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। इन आरोपों की पुष्टि डीएम की जांच में हुई है।
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आरोप - दो
- एनएचएम गाइडलाइन में सीएचसी के लिए 12 लाख रुपये व पीएचसी के लिए 7.25 लाख रुपये ग्लूकोस्ट्रिप क्रय किए जाने के लिए बजट आवंटित किया गया था, लेकिन एसीएमओ डॉ. मुकेशचंद्र दुबे के कार्यवाहक मुख्य चिकित्साधिकारी रहते हुए आवंटित बजट सीएचसी/पीएचसी के लिए ग्लूकोस्ट्रिप क्रय न करके सब सेंटरों की ग्लूकोस्ट्रिप उपलब्ध करा दी गई है। इससे स्पष्ट है कि गाइडलाइन में जारी मद के अनुसार सब सेन्टर के लिए वितरित की जाने वाली ग्लूकोस्ट्रिप को निर्धारित 198 सबसेंटर में वितरित कर मनमाने ढंग से अन्य गैर अनुमन्य पीएचसी/ सीएचसी / हास्पिटलों को 3,50,000 ग्लूकोस्ट्रिप अनाधिकृत रूप से क्रय कर वितरित की गई और 27,65,000 रुपये की राशि का दुरुपयोग किया गया। यही नहीं गाइड लाइन के अनुसार प्रत्येक सब सेंटर पर 2500 ग्लूकोस्ट्रिप उपलब्ध कराई जानी थी, जिसमें एसीमएओ द्वारा सेंटरों पर 1500 ग्लूकोस्ट्रिप ही उपलब्ध कराई गई। साथ ही जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रारंभिक जांच कर रहे जांच अधिकारी /जिला विकास अधिकारी के अनेक बार अनुरोध किया गया। इसके बाद भी एसीएमओ ने पीएचसी/सीएचसी के लिए आवंटित बजट के अनुसार ग्लूकोस्ट्रिप क्रय संबंधी पत्रावली और जिला स्वास्थ्य समिति के अनुमोदन प्राप्त किए जाने संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं किए गए। इससे स्पष्ट है कि पद के दायित्वों का ठीक से निर्वहन न करने, अनियमितता करने व कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन करने पर प्रथमदृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।
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ग्लूकोस्ट्रिप की खरीदारी नियमानुसार है। जैम पोर्टल के बिड के अनुसार है। यह बिड तत्कालीन सीएमओ डॉ. प्रताप सिंह के समय की गई थी। पूरी सामग्री आई है। नियमानुुसार वितरण किया गया है।
- डॉ. मुकेश चंद्र दुबे, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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सब हेड:- डीएम की जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद अब स्वास्थ्य निदेशक ने मांगा जवाब
- कार्यवाहक सीएमओ रहते हुए मनमाने तरीके से खरीदीं ग्लूकोस्ट्रिप
- 30.32 लाख रुपये की धनराशि का दुरुपयोग करने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बेटे की फर्म से स्टील फर्नीचर और मेडिकल सामग्री खरीद के मामले की जांच में एसीएमओ की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उन पर पद का दुरूपयोग करने के आरोप लगे हैं। साथ ही जांच अधिकारियों को सहयोग न करने पर प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर निदेशक (नियोजन एवं बजट) ने 15 दिन में लिखित स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं।
स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों से लेकर लिपिक वर्ग के कर्मचारियों के एक के बाद एक लगातार कारनामे सामने आ रहे हैं। तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग में खरीदे गए सामान और मेडिकल सामग्री की जांच की गई थी। जिसमें दो लिपिक निलंबित हो चुके हैं। अब अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश चंद्र दुबे भी जांच के घेरे में आ गए हैं। जांच के दौरान इनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रहीं हैं। एसीएमओ डॉ. मुकेश चंद्र दुबे ने कार्यवाहक सीएमओ का भी जिम्मा संभाला है। इन पर एसीएमओ (भंडार) रहते हुए अपने पुत्र की फर्म से सामग्री का क्रय करने, कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा अधिकारी रहते हुए गाइडलाइन के विपरीत कार्य करने का आरोप है। अब इनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब निदेशक (नियोजन एवं बजट) ने पत्र जारी कर लगाए गए आरोपों के संबंध में दो सप्ताह में स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में लिखा है कि स्पष्टीकरण न देने पर समझा जाएगा कि आपको अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है। जिस पर प्रकरण में गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
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एसीएमओ पर यह लगे आरोप
आरोप- एक
- एसीएमओ भंडार के पद पर रहते हुए मनमानी अपनाते हुए अपने पुत्र व स्वयं को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से 2,62,000 रुपये की सामग्री क्रय की गई है। जिसमें 20 अलमारी, तीन रिवाल्विंग चेयर, दो स्टील टेबल जैम पोर्टल से खरीदी हैं। जिसमें पद के दायित्वों का ठीक से निर्वहन न कर अनियमतता करने व कर्मचारी आचरण का उल्लंघन करने के प्रथमदृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं। इन आरोपों की पुष्टि डीएम की जांच में हुई है।
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आरोप - दो
- एनएचएम गाइडलाइन में सीएचसी के लिए 12 लाख रुपये व पीएचसी के लिए 7.25 लाख रुपये ग्लूकोस्ट्रिप क्रय किए जाने के लिए बजट आवंटित किया गया था, लेकिन एसीएमओ डॉ. मुकेशचंद्र दुबे के कार्यवाहक मुख्य चिकित्साधिकारी रहते हुए आवंटित बजट सीएचसी/पीएचसी के लिए ग्लूकोस्ट्रिप क्रय न करके सब सेंटरों की ग्लूकोस्ट्रिप उपलब्ध करा दी गई है। इससे स्पष्ट है कि गाइडलाइन में जारी मद के अनुसार सब सेन्टर के लिए वितरित की जाने वाली ग्लूकोस्ट्रिप को निर्धारित 198 सबसेंटर में वितरित कर मनमाने ढंग से अन्य गैर अनुमन्य पीएचसी/ सीएचसी / हास्पिटलों को 3,50,000 ग्लूकोस्ट्रिप अनाधिकृत रूप से क्रय कर वितरित की गई और 27,65,000 रुपये की राशि का दुरुपयोग किया गया। यही नहीं गाइड लाइन के अनुसार प्रत्येक सब सेंटर पर 2500 ग्लूकोस्ट्रिप उपलब्ध कराई जानी थी, जिसमें एसीमएओ द्वारा सेंटरों पर 1500 ग्लूकोस्ट्रिप ही उपलब्ध कराई गई। साथ ही जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रारंभिक जांच कर रहे जांच अधिकारी /जिला विकास अधिकारी के अनेक बार अनुरोध किया गया। इसके बाद भी एसीएमओ ने पीएचसी/सीएचसी के लिए आवंटित बजट के अनुसार ग्लूकोस्ट्रिप क्रय संबंधी पत्रावली और जिला स्वास्थ्य समिति के अनुमोदन प्राप्त किए जाने संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं किए गए। इससे स्पष्ट है कि पद के दायित्वों का ठीक से निर्वहन न करने, अनियमितता करने व कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन करने पर प्रथमदृष्टया दोषी प्रतीत होते हैं।
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ग्लूकोस्ट्रिप की खरीदारी नियमानुसार है। जैम पोर्टल के बिड के अनुसार है। यह बिड तत्कालीन सीएमओ डॉ. प्रताप सिंह के समय की गई थी। पूरी सामग्री आई है। नियमानुुसार वितरण किया गया है।
- डॉ. मुकेश चंद्र दुबे, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी