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पोस्टमार्टम हाउस के सात फ्रीजर खराब, शवों की हो रही बेकदरी
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ललितपुर। जिले में बने पोस्टमार्टम हाउस में शवों को सुरक्षित रखने के लिए लगाए गए सात फ्रीजर आठ महीने से खराब पड़े हैं। इसके चलते पोस्टमार्टम के लिए आने वाले शव एक दिन से अधिक समय तक सुरक्षित नहीं रखे जा सकते हैं। इन शवों से बदबू तक आने लगती है। जिससे यहां काफी दूर तक ठहरना भी मुश्किल हो जाता है।
जिला मुख्यालय पर बने पोस्टमार्टम हाउस में जिले के सभी सोलह थानों में होने वाली घटना दुर्घटनाओं में लोगों की मौत होने पर शव आते हैं। बीते साल करीब 470शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। कई बार एक दिन में ही छह से आठ शवों के भी पोस्टमार्टम कराए जाते हैं। आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस में शवों के खराब होने से बचाने के लिए सात फ्रीजर रखे गए हैं। शुरुआत में तो फ्रीजर ठीक रहे, लेकिन इसके बाद एक-एक करके फ्रीजर खराब होने लगे। अब यहां रखे सभी सातों फ्रीजर खराब पड़े हुए हैं। जिसके चलते यहां एक दिन से अधिक समय तक शव रखने पर बदबू आने लगती है। कई बार मृतकों के परिजन और पोस्टमार्टम करने वाला स्टाफ एवं चिकित्सक भी बदबू से परेशान हो जाते हैं। वहीं लावारिस शवों के मामलों में उसकी शिनाख्त के लिए लगभग 72 घंटे तक शवों को सुरक्षित रखना होता है, लेकिन फ्रीजर खराब होने से कई बार शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो जाता है। हुलिया के आधार पर जब परिजन शिनाख्त के लिए पहुंचते हैं तो बदबू की वजह से शव को पहचानने में काफी दिक्कत होती है।
पेयजल का भी नहीं है इंतजाम
पोस्टमार्टम हाउस मेें अन्य सुविधाओं का भी अभाव है। यहां पेयजल की समस्या भी है। यहां आसपास हैंडपंप नहीं होने से पोस्टमार्टम के लिए पहुंचने वाले मृतकों के परिजनों को पानी के लिए या तो मरघट में ही पानी पीने के लिए जाना होता है, या फिर उन्हें आधा किलोमीटर दूर मुख्य सड़क पर जाकर किसी दुकान आदि से पानी पीने को मजबूर होना पड़ता है।
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बीते दिनों पोस्टमार्टम हाउस का निरीक्षण किया गया था और इन खराब फ्रीजरों को सुधरवाए जाने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया गया है। साथ ही कंपनी को भी मरम्मत के लिए पत्र लिखा गया है।
-डा.जेएस बख्ती, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी।
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जिला मुख्यालय पर बने पोस्टमार्टम हाउस में जिले के सभी सोलह थानों में होने वाली घटना दुर्घटनाओं में लोगों की मौत होने पर शव आते हैं। बीते साल करीब 470शवों का पोस्टमार्टम कराया गया। कई बार एक दिन में ही छह से आठ शवों के भी पोस्टमार्टम कराए जाते हैं। आधुनिक पोस्टमार्टम हाउस में शवों के खराब होने से बचाने के लिए सात फ्रीजर रखे गए हैं। शुरुआत में तो फ्रीजर ठीक रहे, लेकिन इसके बाद एक-एक करके फ्रीजर खराब होने लगे। अब यहां रखे सभी सातों फ्रीजर खराब पड़े हुए हैं। जिसके चलते यहां एक दिन से अधिक समय तक शव रखने पर बदबू आने लगती है। कई बार मृतकों के परिजन और पोस्टमार्टम करने वाला स्टाफ एवं चिकित्सक भी बदबू से परेशान हो जाते हैं। वहीं लावारिस शवों के मामलों में उसकी शिनाख्त के लिए लगभग 72 घंटे तक शवों को सुरक्षित रखना होता है, लेकिन फ्रीजर खराब होने से कई बार शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो जाता है। हुलिया के आधार पर जब परिजन शिनाख्त के लिए पहुंचते हैं तो बदबू की वजह से शव को पहचानने में काफी दिक्कत होती है।
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पेयजल का भी नहीं है इंतजाम
पोस्टमार्टम हाउस मेें अन्य सुविधाओं का भी अभाव है। यहां पेयजल की समस्या भी है। यहां आसपास हैंडपंप नहीं होने से पोस्टमार्टम के लिए पहुंचने वाले मृतकों के परिजनों को पानी के लिए या तो मरघट में ही पानी पीने के लिए जाना होता है, या फिर उन्हें आधा किलोमीटर दूर मुख्य सड़क पर जाकर किसी दुकान आदि से पानी पीने को मजबूर होना पड़ता है।
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बीते दिनों पोस्टमार्टम हाउस का निरीक्षण किया गया था और इन खराब फ्रीजरों को सुधरवाए जाने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया गया है। साथ ही कंपनी को भी मरम्मत के लिए पत्र लिखा गया है।
-डा.जेएस बख्ती, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी।