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वन अफसरों को कब्जा हटाने में छूट रहा पसीना
ललितपुर ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2015 12:06 AM IST
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ललितपुर। वन क्षेत्र की विवादित भूमि पर हरित पट्टी तैयार करने में विभागीय अफसरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। तमाम प्रयासों के बाद भी विभिन्न वन क्षेत्रों में भूमि कब्जा मुक्त नहीं हो सकी है, जिससे पौधरोपण अभियान पिछड़ता दिखाई दे रहा है।
प्रदेश से उत्तराखंड अलग होने के बाद बुंदेलखंड को हरा- भरा बनाने की कोशिशें हो रही हैं। इस साल शासन ने अति पिछड़े जनपद की एक हजार एकड़ भूमि में हरियाली बिखरने का लक्ष्य रखा है। विभागीय अफसरों ने इस लक्ष्य में विवादित भूमि को शामिल कर लिया है, जिससे पौधरोपण गति नहीं पकड़ पा रहा है। खासकर ग्राम फौजपुरा में विवादित भूमि पर पौधरोपण की शुरुआत नहीं हो सकी है। यहां ग्रामीण भूमि छोड़ने को तैयार नहीं हैं, जबकि वन अफसर उनकी मान मनोव्वल में लगे हैं। इस रस्साकशी में भूमि कब्जा मुक्त नहीं हो पा रही है। वहीं, दूधई क्षेत्र में भी पौधरोपण पिछड़ रहा है। इससे हटकर ग्राम दांवर, बानौनी व दांगली क्षेत्र में चल रहे पौधरोपण की प्रगति संतोषजनक बनी हुई है। प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी वीके जैन इस प्रगति से संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
कई जगह चल रहा अग्रिम मृदा कार्य
एक ओर पौधरोपण का कार्य चल रहा है, वहीं दूसरी ओर कई स्थानों पर अभी भी अग्रिम मृदा के कार्य चल रहा है। नियमत: अग्रिम मृदा कार्य मई- जून माह में पूर्ण हो जाना चाहिए. पर यह नहीं हो सका। इसे विभागीय गलती माना जा रहा है।
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रोपित होंगे इक्कीस लाख पौधे
जिले में इक्कीस लाख पौधों का रोपण किया जाना है। इसके मुकाबले पौध रोपण की गति धीमी है। यही हाल रहा तो लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि, विभागीय अफसर कागजी घोड़े दौड़ाने में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे हैं।
छह फुट के लग रहे पौधे
वन विभाग के पास आठ फुट के पौधे कम पड़ गए हैं, जिससे विभागीय अफसरों ने अब छह फुट के पौधे लगाने प्रारंभ कर दिए हैं। हालांकि, अफसर इस तरह की कमियों को नकार रहे हैं।
इनका कहना है
मानसून मौसम में पौधरोपण तेजी से चल रहा है तथा कई स्थानों पर कार्य पूर्ण हो गया है।
- वी के जैन प्रभागीय निदेशक
सामाजिक वानिकी प्रभाग ललितपुर
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प्रदेश से उत्तराखंड अलग होने के बाद बुंदेलखंड को हरा- भरा बनाने की कोशिशें हो रही हैं। इस साल शासन ने अति पिछड़े जनपद की एक हजार एकड़ भूमि में हरियाली बिखरने का लक्ष्य रखा है। विभागीय अफसरों ने इस लक्ष्य में विवादित भूमि को शामिल कर लिया है, जिससे पौधरोपण गति नहीं पकड़ पा रहा है। खासकर ग्राम फौजपुरा में विवादित भूमि पर पौधरोपण की शुरुआत नहीं हो सकी है। यहां ग्रामीण भूमि छोड़ने को तैयार नहीं हैं, जबकि वन अफसर उनकी मान मनोव्वल में लगे हैं। इस रस्साकशी में भूमि कब्जा मुक्त नहीं हो पा रही है। वहीं, दूधई क्षेत्र में भी पौधरोपण पिछड़ रहा है। इससे हटकर ग्राम दांवर, बानौनी व दांगली क्षेत्र में चल रहे पौधरोपण की प्रगति संतोषजनक बनी हुई है। प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी वीके जैन इस प्रगति से संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
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कई जगह चल रहा अग्रिम मृदा कार्य
एक ओर पौधरोपण का कार्य चल रहा है, वहीं दूसरी ओर कई स्थानों पर अभी भी अग्रिम मृदा के कार्य चल रहा है। नियमत: अग्रिम मृदा कार्य मई- जून माह में पूर्ण हो जाना चाहिए. पर यह नहीं हो सका। इसे विभागीय गलती माना जा रहा है।
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रोपित होंगे इक्कीस लाख पौधे
जिले में इक्कीस लाख पौधों का रोपण किया जाना है। इसके मुकाबले पौध रोपण की गति धीमी है। यही हाल रहा तो लक्ष्य तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि, विभागीय अफसर कागजी घोड़े दौड़ाने में कोई कसर बाकी नहीं रख रहे हैं।
छह फुट के लग रहे पौधे
वन विभाग के पास आठ फुट के पौधे कम पड़ गए हैं, जिससे विभागीय अफसरों ने अब छह फुट के पौधे लगाने प्रारंभ कर दिए हैं। हालांकि, अफसर इस तरह की कमियों को नकार रहे हैं।
इनका कहना है
मानसून मौसम में पौधरोपण तेजी से चल रहा है तथा कई स्थानों पर कार्य पूर्ण हो गया है।
- वी के जैन प्रभागीय निदेशक
सामाजिक वानिकी प्रभाग ललितपुर