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पानी की सफाई करने में असमर्थ फिल्टर प्लांट
Lalitpur
Updated Sun, 15 Oct 2017 12:41 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। जल संस्थान शहरवासियों को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करने में नाकाम साबित हो रहा है। सबसे बड़ी समस्या लोअर जोन में बनी हुई है। यहां पिछले कई दिनों से मटमैले पीले पानी की जलापूर्ति हो रही है। यही नहीं, कई मुहल्लों में अनियमित जलापूर्ति होने की शिकायत है। जिससे इलाकाई लोगों में विभाग के प्रति असंतोष पनप रहा है।
शहर को अपर एवं लोअर जोन में विभाजित कर जलापूर्ति की जा रही है। अपर जोन में नेहरू नगर, गांधीनगर, नईबस्ती, सिविल लाइन, आजादपुरा मुहल्ला को रखा गया है तो लोअर जोन में मुहल्ला चौबयाना, नदीपुरा, मऊठाना, रावर, खिरकापुरा, रैदासपुरा, रामनगर, वंशीपुरा, सरायपुरा, सरदारपुरा, बजरिया रखे गए हैं। इस तरह दोनों जोन में कुल मिलाकर करीब दस हजार संयोजन दिए गए हैं।
जल संस्थान शहरवासियों को जलापूर्ति के लिए प्रतिदिन गोविंद सागर बांध से 31 एमएलडी कच्चा पानी लेती है। जिसे डोडाघाट स्थित ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित किया जाता है। इसके बाद भी लोअर जोन में शुद्ध जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। ट्रीटमेंट प्लांट से चंद कदम की दूरी पर मुहल्ला डोडाघाट, तालाबपुरा में बदबूदार मटमैले पीले पानी की आपूर्ति हो रही है। कमोवेश यही स्थिति मुहल्ला चौबयाना, रैदासपुरा की भी है। शनिवार को विभिन्न मुहल्लों में मटमैले पीले पानी की जलापूर्ति हुई। इलाकाई लोगों ने इसकी शिकायत जल संस्थान के अफसरों से की। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शहर में जगह-जगह पाइप लाइन में लीकेज हैं, जिन्हें सुधारा नहीं जा रहा है। इससे बदबूदार पानी की आपूर्ति हो रही है। वहीं, अफसरों का तर्क है कि मटमैला पीला पानी बांध से आ रहा है। जहां लीकेज की बात संज्ञान में आ रही है, वहां श्रमिकों के जरिए ठीक कराया जा रहा है।
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दस मिनट में ही हुई जलापूर्ति
मुहल्ले में आज करीब दस मिनट तक ही नल आए। इस दौरान जो मटमैला पीला पानी आया वह पीने लायक नहीं था। इस कारण हैंडपंप से पीने के पानी का इंतजाम करना पड़ा। सुबह जब पानी की आवश्यकता होती है तब तो नल ज्यादा समय तक आते नहीं। इसके विपरीत रात में पानी आता है, उस समय पानी भरना काफी अखरता है।
रामप्यारी
मुहल्ला रैदासपुरा
तीन दिन से जलापूर्ति बाधित
मुहल्ले में करीब तीन दिन से जलापूर्ति बाधित है। इसकी शिकायत भी कर चुके हैं, इसके बाद भी जलापूर्ति सुचारू नहीं हो पाई है। इससे हैंडपंप ही एक मात्र पानी के लिए सहारा रह गया है। विभागीय अफसरों की कार्यप्रणाली काफी ढुलमुल है, इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। शहर के विभिन्न हिस्सों में पाइप लाइन लीकेज बने हुए हैं। सुबह के जलापूर्ति के समय सड़कें भीगी नजर आती हैं।
अरविंद सिंघई
जगदीश मार्केट के पीछे
शिकायतों के प्रति गंभीर नहीं अफसर
मुहल्ला चौबयाना में पीली कोटी के बगल की गली में दो महीने से जलापूर्ति बाधित है। इसकी शिकायत भी कर चुके हैं लेकिन उसका समाधान नहीं किया जा सका है। यदि समीप में हैंडपंप नहीं लगा होता तो बूंद, बूंद पानी के लिए तरस जाते। यदि विभागीय अफसर इस तरह से नागरिकों की समस्याओं को नजरअंदाज करेंगे तो जलापूर्ति कभी दुरुस्त ही नहीं हो पाएगी।
केपी कंचन, मुहल्ला चौबयाना
कहीं कमी छोड़ी जा रही पानी के उपचार में
कच्चे पानी का उपचार ठीक तरीके से नहीं किया जा रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट में भरे पानी को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे उसमें ब्लीचिंग पाउडर एवं फिटकरी की मात्रा कम डाली जा रही हो। इस वजह से पानी की बदबू दूर नहीं हो पा रही है। वहीं, पाइप लाइन लीकेज पर भी ध्यान नहीं है। मुहल्ला तालाबपुरा, विदुआ कालोनी सहित कई जगहों पर लीकेज बने हुए हैं।
डा. राजीव निरंजन
पर्यावरणविद
.....
पंद्रह दिनों तक ऐसे ही होगी जलापूर्ति
गोविंद सागर बांध से मटमैला पीला पानी आ रहा है। जिसे साफ करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर एवं एलम की मात्रा बढ़ाई गई है। इसके बाद भी पानी का रंग नहीं जा रहा है। नागरिकों को अभी पंद्रह दिनों तक इस तरह जलापूर्ति मिलती रहेगी। इस पानी से शरीर को कोई नुकसान नहीं है।
रामभुवन राम
अवर अभियंता
जल संस्थान ललितपुर।
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शहर को अपर एवं लोअर जोन में विभाजित कर जलापूर्ति की जा रही है। अपर जोन में नेहरू नगर, गांधीनगर, नईबस्ती, सिविल लाइन, आजादपुरा मुहल्ला को रखा गया है तो लोअर जोन में मुहल्ला चौबयाना, नदीपुरा, मऊठाना, रावर, खिरकापुरा, रैदासपुरा, रामनगर, वंशीपुरा, सरायपुरा, सरदारपुरा, बजरिया रखे गए हैं। इस तरह दोनों जोन में कुल मिलाकर करीब दस हजार संयोजन दिए गए हैं।
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जल संस्थान शहरवासियों को जलापूर्ति के लिए प्रतिदिन गोविंद सागर बांध से 31 एमएलडी कच्चा पानी लेती है। जिसे डोडाघाट स्थित ट्रीटमेंट प्लांट में शोधित किया जाता है। इसके बाद भी लोअर जोन में शुद्ध जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। ट्रीटमेंट प्लांट से चंद कदम की दूरी पर मुहल्ला डोडाघाट, तालाबपुरा में बदबूदार मटमैले पीले पानी की आपूर्ति हो रही है। कमोवेश यही स्थिति मुहल्ला चौबयाना, रैदासपुरा की भी है। शनिवार को विभिन्न मुहल्लों में मटमैले पीले पानी की जलापूर्ति हुई। इलाकाई लोगों ने इसकी शिकायत जल संस्थान के अफसरों से की। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शहर में जगह-जगह पाइप लाइन में लीकेज हैं, जिन्हें सुधारा नहीं जा रहा है। इससे बदबूदार पानी की आपूर्ति हो रही है। वहीं, अफसरों का तर्क है कि मटमैला पीला पानी बांध से आ रहा है। जहां लीकेज की बात संज्ञान में आ रही है, वहां श्रमिकों के जरिए ठीक कराया जा रहा है।
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दस मिनट में ही हुई जलापूर्ति
मुहल्ले में आज करीब दस मिनट तक ही नल आए। इस दौरान जो मटमैला पीला पानी आया वह पीने लायक नहीं था। इस कारण हैंडपंप से पीने के पानी का इंतजाम करना पड़ा। सुबह जब पानी की आवश्यकता होती है तब तो नल ज्यादा समय तक आते नहीं। इसके विपरीत रात में पानी आता है, उस समय पानी भरना काफी अखरता है।
रामप्यारी
मुहल्ला रैदासपुरा
तीन दिन से जलापूर्ति बाधित
मुहल्ले में करीब तीन दिन से जलापूर्ति बाधित है। इसकी शिकायत भी कर चुके हैं, इसके बाद भी जलापूर्ति सुचारू नहीं हो पाई है। इससे हैंडपंप ही एक मात्र पानी के लिए सहारा रह गया है। विभागीय अफसरों की कार्यप्रणाली काफी ढुलमुल है, इसका खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। शहर के विभिन्न हिस्सों में पाइप लाइन लीकेज बने हुए हैं। सुबह के जलापूर्ति के समय सड़कें भीगी नजर आती हैं।
अरविंद सिंघई
जगदीश मार्केट के पीछे
शिकायतों के प्रति गंभीर नहीं अफसर
मुहल्ला चौबयाना में पीली कोटी के बगल की गली में दो महीने से जलापूर्ति बाधित है। इसकी शिकायत भी कर चुके हैं लेकिन उसका समाधान नहीं किया जा सका है। यदि समीप में हैंडपंप नहीं लगा होता तो बूंद, बूंद पानी के लिए तरस जाते। यदि विभागीय अफसर इस तरह से नागरिकों की समस्याओं को नजरअंदाज करेंगे तो जलापूर्ति कभी दुरुस्त ही नहीं हो पाएगी।
केपी कंचन, मुहल्ला चौबयाना
कहीं कमी छोड़ी जा रही पानी के उपचार में
कच्चे पानी का उपचार ठीक तरीके से नहीं किया जा रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट में भरे पानी को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे उसमें ब्लीचिंग पाउडर एवं फिटकरी की मात्रा कम डाली जा रही हो। इस वजह से पानी की बदबू दूर नहीं हो पा रही है। वहीं, पाइप लाइन लीकेज पर भी ध्यान नहीं है। मुहल्ला तालाबपुरा, विदुआ कालोनी सहित कई जगहों पर लीकेज बने हुए हैं।
डा. राजीव निरंजन
पर्यावरणविद
.....
पंद्रह दिनों तक ऐसे ही होगी जलापूर्ति
गोविंद सागर बांध से मटमैला पीला पानी आ रहा है। जिसे साफ करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर एवं एलम की मात्रा बढ़ाई गई है। इसके बाद भी पानी का रंग नहीं जा रहा है। नागरिकों को अभी पंद्रह दिनों तक इस तरह जलापूर्ति मिलती रहेगी। इस पानी से शरीर को कोई नुकसान नहीं है।
रामभुवन राम
अवर अभियंता
जल संस्थान ललितपुर।