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भुलाए नहीं भूलता वो आपातकाल का समय, 25 जून 1975 में इंदिरा गांधी ने लगाई थी इमरजेंसी

Fri, 26 Jun 2020 12:39 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jun 2020 12:39 AM IST
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emergency period still remembered
ललितपुर। आज से 45 साल पहले 25 जून 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई थी, जिसका पुरजोर विरोध ललितपुर जिले में भी किया गया था। आपातकाल का विरोध करने पर पचास से ज्यादा लोगों को अलग- अलग समयांतराल के लिए जेल जाना पड़ा था। जेल गए लोगों ने कहा कि भुलाए नहीं भूलता वह दौर, जब जेल जाना पड़ा था। उस समय जेल में इस प्रकार मानसिक प्रताड़ना दी जाती थी कि मानो अब कभी जेल से बाहर ही नहीं निकल पाएंगे।
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सिविल लाइन निवासी संतोष कुमार तिवारी अधिवक्ता ने कहा कि आपातकाल के समय देश में संवैधानिक व्यवस्था नहीं थी। संविधान के किसी भी नियम का पालन नहीं किया जाता था। 45 वर्ष पहले इस तरह की स्थिति रही थी कि 25 जून 1975 में लगभग 52 लोग जेल में अलग- अलग समय अंतराल तक रहे। तत्कालीन आरएसएस के जिला प्रचारक उदयभान सिंह को भी गिरफ्तार किया गया था। जिनकी जेल से रिहा होने के कुछ महीने बाद मौत हो गई थी। उन्होंने बताया कि उस समय मैं विधि का द्वितीय वर्ष का छात्र था और झांसी में पढ़ाई कर रहा था। झांसी के संघ कार्यालय में उस समय रहता था और स्वयं सेवक भी था।
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छुपकर नुक्कड़ सभाएं करते थे
आपातकाल के विरोध में संघ द्वारा जन जागरण किया गया। अलग- अलग घरों में जाकर छोटी- छोटी नुक्कड़ सभाएं करते थे। नुकक्ड़ सभाएं छिपकर स्कूलों में की जाती थीं और घरों में जा- जाकर पर्चे बांटकर आपातकाल का विरोध किया जाता था। लोगों को आपातकाल का विरोध करने के लिए जागरुक किया जाता था। पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व अशोक सिंघल देखते थे, जो बाद में विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।
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जेल गए अनेक लोग
आपातकाल के विरोध में जनपद में प्रथम आंदोलन का नेतृत्व छेदीलाल मालवीय ने किया था। उसी दिन उनकी पत्नी ने पुत्री को जन्म दिया था। इसके बावजूद भी वह आपातकाल का विरोध करने के लिए आंदोलन में कूद पड़े थे। उनको डीआईआर और मीसा में बंद किया गया। तहसील महरौनी के ग्राम सैदपुर निवासी हरिश्चंद्र जैन और उनके साथ चार लोग जेल भेजे गए। इसके बाद पुलिस सक्रिय हुई और संघ के सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी में पहले चार व्यक्तियों में संतोष कुमार तिवारी, आनंद मालवीय, निहालचंद सिंधी व वासुदेव सिंधी को झांसी की जेल में भेज दिया गया।
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जेल जाने के बाद परिवार पर पड़ा आर्थिक संकट
आपातकाल का विरोध करने पर जनपद के अनेक ऐसे लोग भी जेल गए थे, जिनका परिवार उन्हीं के द्वारा संचालित किया जाता था। जेल जाने वाले लोगों में कुछ परिवार ऐसे भी थे, जिनकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी, जेल जाने के बाद उनके परिवार की जीविका चलाने का भी संकट आ गया।
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- अनेक लोगों को भेजा गया जेल
आपातकाल का विरोध करने पर जनपद से पचास से लोगों को जेल भेजा गया था। जेपी आंदोलन से जुड़े चार- पांच लोग जेल गए थे। इसमें सनत कुमार जैन, अशोक टड़ैया, शिखरचंद्र जैन %मुफलिस% और इनके भाई उत्तमचंद्र जैन को गिरफ्तार किया गया।
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नहीं थी रिहाई की उम्मीद
आपातकाल के दौरान लोगों ने जब आपातकाल का विरोध किया तो पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और जनपद में जो- जो विरोध करने के लिए आगे आ रहे थे, वे सीधे जेल जा रहे थेद्घ जेल में सभी को बहुत टॉर्चर किया गया। माफीनामा लिखवाने के लिए तरह- तरह के प्रलोभन दिए जाते थे। लेकिन, फिर भी नहीं माने और आपातकाल का लगातार विरोध करते रहे। इस कारण उम्मीद नहीं थी कि अब जेल से बाहर आ सकते हैं।
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फोटो 34
कैप्सन- ओमप्रकाश श्रीवास्तव
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शहर में आपातकाल में पचास से ज्यादा लोगों को जेल जाना पड़ा था। एक दिन हमें भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। हम छह माह से भी ज्यादा जेल में रहे थे।
- ओमप्रकाश श्रीवास्तव
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फोटो 35
कैप्सन- संतोष कुमार तिवारी
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हमने आपातकाल का पुरजोर विरोध किया। जिसके चलते करीब आठ माह तक की सजा मिली और हमें झांसी की जेल में रहना पड़ा। उस समय कोई भी घर से नहीं निकल पाता था।
- संतोष कुमार तिवारी
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फोटो 36
कैप्सन- प्रताप विक्रम सिंह
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आपातकाल के समय सर्वप्रथम 26 जून 1975 में हमारे पिताजी रणवीर सिंह यादव को जेल भेजा गया था। वे लगभग 18 महीने बंद रहे थे और जब वह जेल से रिहा हुए तो विधायक बनकर लौटे थे। वह दिन आज भी भुलाए नहीं भूलता है।
- प्रताप विक्रम सिंह यादव
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फोटो 37
कैप्सन- आनंद मालवीय
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आपातकाल के दौरान हमें गिरफ्तार कर लिया गया था और चार माह से ज्यादा समय तक हमें जेल में रहना पड़ा था। जेल में हम लोगों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।
- आनंद मालवीय, वरिष्ठ अधिवक्ता
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फोटो 38
कैप्सन- अशोक देवलिया
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आपातकाल का विरोध करने के लिए हमने अपने साथी रामकृष्ण नामदेव और जगदीश कुशवाहा के साथ जिले में अनेक जगह वॉलपेंटिग की। दीवरों पर लिखा कि %%आपातकाल हटाओ- देश बचाओ, इंदिरा गांधी मुर्दाबाद%% इसके बाद पुलिस ने हमें गिरफ्तार कर लिया।

- अशोक देवलिया
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फोटो 39
कैप्सन- जगदीश सिंह कुशवाहा
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आपातकाल का विरोध करने पर हमें करीब पांच माह तक जेल में रहना पड़ा था। हम लोगों ने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी कि शायद कभी जेल से निकल ही नहीं पाएंगे। जेल में हम लोगों को बहुत परेशान किया जाता था।
- जगदीश सिंह कुशवाहा
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