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शिक्षा विभाग को फीडिंग का नहीं मिला पैसा
ब्यूराे
Updated Mon, 26 Oct 2015 01:28 AM IST
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ललितपुर (ब्यूरो)। बेसिक शिक्षा विभाग के कर्मचारी समाजवादी पेंशन के लाभार्थी परिवार के बच्चों की फीडिंग करने के बाद परेशान हैं। समाज कल्याण विभाग ने फीडिंग का पैसा अभी तक उपलब्ध नहीं कराया है, जिससे उनमें असंतोष पनप रहा है।
समाजवादी पेंशन पा रहे परिवार के बच्चों की शिक्षा पर शासन की नजर है। स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पर नजर रखने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग ने 15 से 35 वर्ष की आयु वर्ग के सदस्यों की आनलाइन फीडिंग कराई और छह से 14 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों की आफलाइन फीडिंग कराई। महत्वपूर्ण यह है कि यह फीडिंग समाज कल्याण विभाग को करानी थी। लेकिन, ऐन वक्त पर इसका जिम्मा शिक्षा विभाग को दे दिया गया।
विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों ने समयबद्घ कार्यक्रम के मद्देनजर जनरेटर लगाकर कंप्यूटर आपरेटरों से फीडिंग कराई। वर्तमान में फीडिंग का काम अंतिम चरण में है। लेकिन, समाज कल्याण विभाग ने फीडिंग के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं दी, जिससे कर्मियों में असंतोष पनप रहा है।
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छूटे विद्यालयों पर भी है चुप्पी
समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट में खामी के कारण नवीन विद्यालय और तमाम मान्यता प्राप्त विद्यालय छूट गए हैं। इससे इन विद्यालयों के बच्चों की फीडिंग आज तक नहीं हो सकी है। इन हालात में सभी चिह्नित बच्चों की उपस्थिति पर नजर रखना संभव प्रतीत नहीं हो रहा है। इस पर भी विभागीय चुप्पी साधे हुए हैं।
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समाजवादी पेंशन पा रहे परिवार के बच्चों की शिक्षा पर शासन की नजर है। स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति पर नजर रखने के उद्देश्य से समाज कल्याण विभाग ने 15 से 35 वर्ष की आयु वर्ग के सदस्यों की आनलाइन फीडिंग कराई और छह से 14 वर्ष की आयु वर्ग के बच्चों की आफलाइन फीडिंग कराई। महत्वपूर्ण यह है कि यह फीडिंग समाज कल्याण विभाग को करानी थी। लेकिन, ऐन वक्त पर इसका जिम्मा शिक्षा विभाग को दे दिया गया।
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विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों ने समयबद्घ कार्यक्रम के मद्देनजर जनरेटर लगाकर कंप्यूटर आपरेटरों से फीडिंग कराई। वर्तमान में फीडिंग का काम अंतिम चरण में है। लेकिन, समाज कल्याण विभाग ने फीडिंग के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं दी, जिससे कर्मियों में असंतोष पनप रहा है।
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छूटे विद्यालयों पर भी है चुप्पी
समाज कल्याण विभाग की वेबसाइट में खामी के कारण नवीन विद्यालय और तमाम मान्यता प्राप्त विद्यालय छूट गए हैं। इससे इन विद्यालयों के बच्चों की फीडिंग आज तक नहीं हो सकी है। इन हालात में सभी चिह्नित बच्चों की उपस्थिति पर नजर रखना संभव प्रतीत नहीं हो रहा है। इस पर भी विभागीय चुप्पी साधे हुए हैं।