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मोटी कमाई, फिर भी गरीब
ब्यूरो
Updated Sun, 17 Jan 2016 12:48 AM IST
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ललितपुर। पूर्ति विभाग ने आयकर दाताओं के परिवारों को खाद्य सुरक्षा की गारंटी दे दी है। यही नहीं, इसमें बहुत से ऐसे हैं जो जनता के चुने प्रतिनिधि व नामित प्रतिनिधि हैं, फिर भी योजना में शामिल हो गए हैं, जबकि गरीब परिवारों को योजना से बाहर कर दिया गया है। विभागीय अफसर इस मामले में मौन बने हुए हैं।
भूख से होने वाली मौतों को रोकने के मकसद से जिले को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा गारंटी योजना में शामिल किया गया है। इसे ध्यान में रखकर पूर्ति विभाग ने मानक के अनुसार जिले भर में पात्र गृहस्थियों का सर्वे कराया था। हाल ही में कोटेदारों के माध्यम से राशन कार्ड के प्रारूप वितरित किए गए।
इस दौरान सर्वे में बरती गई लापरवाही उजागर हो गई। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि योजना में पात्रता के अलावा आयकरदाता शिक्षक, पेंशनर, आलीशान भवनों में रहने वाले अनेक धनाढ्य परिवार, नगर क्षेत्र के कई निर्वाचित प्रतिनिधि और माननीयों के प्रतिनिधि भी जगह पा गए हैं। कई धनाढ्य तो अंत्योदय कार्ड धारक की श्रेणी का लाभ ले रहे हैं।
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अपात्रों की घुसपैठ ने कई पात्र परिवारों की परेशानी बढ़ गई है। वह योजना में शामिल होने के लिए संघर्ष करते दिखाई दे रहे हैं। मजे की बात यह है कि जो पात्र परिवार योजना में शामिल होने से वंचित रह गए हैं, उन्हें विभागीय अफसर पात्रता की शर्तें गिनाते हुए सत्यापन के नियम कायदे बता रहे हैं, जबकि अनगिनत अपात्र परिवार योजना में शामिल कर लिए गए हैं। इस पर अफसरों को जवाब देते नहीं बन रहा है।
वहीं, इस मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी आंदोलनरत है। पिछले दिनों कांग्रेसियों ने डीएसओ कार्यालय में प्रदर्शन कर नारेबाजी की थी। उन्होंने पूर्ति निरीक्षक अशोक कुमार को स्थिति से अवगत कराया था पर विभागीय अफसरों की सेहत पर कोई फर्क दिखाई नहीं दिया।
कांग्रेस का आंदोलन औचित्यहीन
कांग्रेस कमेटी ने अपात्रों की छटनी कराने के उद्देश्य से दोबारा सत्यापन कराने की मांग की थी। जिला पूर्ति अधिकारी डीएस राम का कहना है कि विभाग अपात्रों को हटाने के लिए तैयार है। जो भी अपात्र संज्ञान में आएंगे, उनकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। छूटे परिवारों से आवेदन लिए जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के आंदोलन को औचित्यहीन करार दिया।
लापरवाहों पर नहीं हो रही कार्रवाई
कांग्रेस नगराध्यक्ष हरीबाबू शर्मा का कहना है कि योजना में पात्रों के अलावा अपात्र गृहस्थियों की भरमार हो गई है। यदि सर्वेयर ने जानबूझकर लापरवाही नहीं बरती है तो कैसे इतनी बड़ी संख्या में अपात्र आ गए। सर्वेयर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूखे से लोग परेशान हैं, उन्हें जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा है। इसके बाद भी विभाग दोबारा सत्यापन नहीं करा रहा है।
आवेदन की नहीं हुई बिक्री?
डीएसओ कार्यालय परिसर में नि:शुल्क आवेदन पत्रों की बिक्री होने की शिकायत हुई थी। इस पर एसडीएम प्रियंका सिंह ने इसकी जांच की, लेकिन जांच रिपोर्ट में आवेदन पत्र बेचे जाने की पुष्टि नहीं हुई। डीएसओ का कहना है कि कौन फार्म बेच रहा था, इसके साक्ष्य नहीं मिले हैं।
पति-पत्नी सरकारी शिक्षक, फिर भी श्रेणी में शामिल
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा गारंटी अधिनियम में 79.56 प्रतिशत ग्रामीण और 64.43 प्रतिशत शहरी क्षेत्र के लोगों को शामिल किया गया है। लेकिन, जो कार्ड बनाए गए हैं, उनमें पति-पत्नी सरकारी शिक्षक हैं। कई ऐसे लोग शामिल हैं, जिनकी करोड़ों रुपये की बिल्डिंग बनी हुई है।
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भूख से होने वाली मौतों को रोकने के मकसद से जिले को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा गारंटी योजना में शामिल किया गया है। इसे ध्यान में रखकर पूर्ति विभाग ने मानक के अनुसार जिले भर में पात्र गृहस्थियों का सर्वे कराया था। हाल ही में कोटेदारों के माध्यम से राशन कार्ड के प्रारूप वितरित किए गए।
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इस दौरान सर्वे में बरती गई लापरवाही उजागर हो गई। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि योजना में पात्रता के अलावा आयकरदाता शिक्षक, पेंशनर, आलीशान भवनों में रहने वाले अनेक धनाढ्य परिवार, नगर क्षेत्र के कई निर्वाचित प्रतिनिधि और माननीयों के प्रतिनिधि भी जगह पा गए हैं। कई धनाढ्य तो अंत्योदय कार्ड धारक की श्रेणी का लाभ ले रहे हैं।
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अपात्रों की घुसपैठ ने कई पात्र परिवारों की परेशानी बढ़ गई है। वह योजना में शामिल होने के लिए संघर्ष करते दिखाई दे रहे हैं। मजे की बात यह है कि जो पात्र परिवार योजना में शामिल होने से वंचित रह गए हैं, उन्हें विभागीय अफसर पात्रता की शर्तें गिनाते हुए सत्यापन के नियम कायदे बता रहे हैं, जबकि अनगिनत अपात्र परिवार योजना में शामिल कर लिए गए हैं। इस पर अफसरों को जवाब देते नहीं बन रहा है।
वहीं, इस मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी आंदोलनरत है। पिछले दिनों कांग्रेसियों ने डीएसओ कार्यालय में प्रदर्शन कर नारेबाजी की थी। उन्होंने पूर्ति निरीक्षक अशोक कुमार को स्थिति से अवगत कराया था पर विभागीय अफसरों की सेहत पर कोई फर्क दिखाई नहीं दिया।
कांग्रेस का आंदोलन औचित्यहीन
कांग्रेस कमेटी ने अपात्रों की छटनी कराने के उद्देश्य से दोबारा सत्यापन कराने की मांग की थी। जिला पूर्ति अधिकारी डीएस राम का कहना है कि विभाग अपात्रों को हटाने के लिए तैयार है। जो भी अपात्र संज्ञान में आएंगे, उनकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। छूटे परिवारों से आवेदन लिए जा रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के आंदोलन को औचित्यहीन करार दिया।
लापरवाहों पर नहीं हो रही कार्रवाई
कांग्रेस नगराध्यक्ष हरीबाबू शर्मा का कहना है कि योजना में पात्रों के अलावा अपात्र गृहस्थियों की भरमार हो गई है। यदि सर्वेयर ने जानबूझकर लापरवाही नहीं बरती है तो कैसे इतनी बड़ी संख्या में अपात्र आ गए। सर्वेयर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूखे से लोग परेशान हैं, उन्हें जीवन यापन करना मुश्किल हो रहा है। इसके बाद भी विभाग दोबारा सत्यापन नहीं करा रहा है।
आवेदन की नहीं हुई बिक्री?
डीएसओ कार्यालय परिसर में नि:शुल्क आवेदन पत्रों की बिक्री होने की शिकायत हुई थी। इस पर एसडीएम प्रियंका सिंह ने इसकी जांच की, लेकिन जांच रिपोर्ट में आवेदन पत्र बेचे जाने की पुष्टि नहीं हुई। डीएसओ का कहना है कि कौन फार्म बेच रहा था, इसके साक्ष्य नहीं मिले हैं।
पति-पत्नी सरकारी शिक्षक, फिर भी श्रेणी में शामिल
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा गारंटी अधिनियम में 79.56 प्रतिशत ग्रामीण और 64.43 प्रतिशत शहरी क्षेत्र के लोगों को शामिल किया गया है। लेकिन, जो कार्ड बनाए गए हैं, उनमें पति-पत्नी सरकारी शिक्षक हैं। कई ऐसे लोग शामिल हैं, जिनकी करोड़ों रुपये की बिल्डिंग बनी हुई है।