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ड्यूटी के दौरान हृदयाघाट से पुलिस कर्मी की मौत
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ललितपुर में सिपाही को उपचार के लिए ले जाते पुलिस विभाग के कर्मचारी।
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। थाना कोतवाली में तैनात एक पुलिस कर्मचारी को ड्यूटी के दौरान दिल का दौरा पड़ने पर जिला अस्पताल ले ले जाया गया, जहां हालत गंभीर होने पर झांसी रेफर कर दिया, जहां उसकी मौत हो गई। इस दौरान जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं की पोल खुल गई
जिला कन्नौज के विष्णुपुर निवासी हरीओम यादव थाना कोतवाली में हेड कांस्टेबल मुहर्रिर के पद पर तैनात था। शनिवार की दोपहर में लगभग डेढ़ बजे कोतवाली में ड्यूटी के दौरान उसे सीने में तेज दर्द हुआ। उसने साथी पुलिस कर्मचारियों को बताया और बेसुध हो गया। यह देख साथी पुलिस कर्मचारियों ने उसे तत्काल उठाया और एक बाइक पर लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन अस्पताल परिसर में स्ट्रेचर नहीं होने पर पुलिस कर्मचारियों ने उसे कंधों पर उठाया और जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ले गए। जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने झांसी रेफर कर दिया।
इसके बाद एंबुलेंस से झांसी ले गए, जहां मौत हो गई। जब हृदयाघात से पीड़ित पुलिस कर्मी को जिला अस्पताल के इमरजेंसी से बाहर खड़ी एंबुलेंस तक ले जाना पड़ा तो वहां स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था। इसके बाद साथी अन्य पुलिस कर्मचारियों ने मरीज को पलंग सहित उठाया और एंबुलेंस तक ले गए। ऐसा नहीं है कि यही एक मरीज था, जिसे परेशानी उठानी पड़ी, यहां आने वाले मरीजों को अक्सर स्ट्रेचर नहीं मिलता है, जिस पर मरीजों को कराहते हुए इमरजेंसी में जाना पड़ा। यही नहीं इसकी जानकारी लगने के आधा घंटा बाद जब सीएमओ डा.प्रताप सिंह भी इमरजेंसी पहुंचे तो उनके सामने भी एक मरीज आ गया, जिसे स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो सका। सीएमओ के हड़काने के बाद अन्य स्टाफ ने ऊपरी मंजिल पर रखे स्ट्रेचर को मंगाया गया और परिसर में रखवाया गया। सीएमओ ने सीएमएस को निर्देश दिए कि इमरजेंसी कक्ष के बाहर और परिसर में चार से पांच स्ट्रेचर हर समय उपलब्ध कराए जाएं। स्टाफ के अनुसार कई स्ट्रेचरों को सुधरवाने के लिए भेजा गया है। सीएमओ डा. प्रताप सिंह ने बताया कि इमरजेंसी कक्ष के बाहर स्ट्रेचर ऊपरी मंजिल पर थे, जो मरीजों को ले गए होंगे और फिर वहीं छोड़ दिया होगा। सीएमएस को निर्देश दे दिए हैं कि यहां हर समय चार से पांच स्ट्रेचर उपलब्ध रहें।
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जिला कन्नौज के विष्णुपुर निवासी हरीओम यादव थाना कोतवाली में हेड कांस्टेबल मुहर्रिर के पद पर तैनात था। शनिवार की दोपहर में लगभग डेढ़ बजे कोतवाली में ड्यूटी के दौरान उसे सीने में तेज दर्द हुआ। उसने साथी पुलिस कर्मचारियों को बताया और बेसुध हो गया। यह देख साथी पुलिस कर्मचारियों ने उसे तत्काल उठाया और एक बाइक पर लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन अस्पताल परिसर में स्ट्रेचर नहीं होने पर पुलिस कर्मचारियों ने उसे कंधों पर उठाया और जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ले गए। जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने झांसी रेफर कर दिया।
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इसके बाद एंबुलेंस से झांसी ले गए, जहां मौत हो गई। जब हृदयाघात से पीड़ित पुलिस कर्मी को जिला अस्पताल के इमरजेंसी से बाहर खड़ी एंबुलेंस तक ले जाना पड़ा तो वहां स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं था। इसके बाद साथी अन्य पुलिस कर्मचारियों ने मरीज को पलंग सहित उठाया और एंबुलेंस तक ले गए। ऐसा नहीं है कि यही एक मरीज था, जिसे परेशानी उठानी पड़ी, यहां आने वाले मरीजों को अक्सर स्ट्रेचर नहीं मिलता है, जिस पर मरीजों को कराहते हुए इमरजेंसी में जाना पड़ा। यही नहीं इसकी जानकारी लगने के आधा घंटा बाद जब सीएमओ डा.प्रताप सिंह भी इमरजेंसी पहुंचे तो उनके सामने भी एक मरीज आ गया, जिसे स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो सका। सीएमओ के हड़काने के बाद अन्य स्टाफ ने ऊपरी मंजिल पर रखे स्ट्रेचर को मंगाया गया और परिसर में रखवाया गया। सीएमओ ने सीएमएस को निर्देश दिए कि इमरजेंसी कक्ष के बाहर और परिसर में चार से पांच स्ट्रेचर हर समय उपलब्ध कराए जाएं। स्टाफ के अनुसार कई स्ट्रेचरों को सुधरवाने के लिए भेजा गया है। सीएमओ डा. प्रताप सिंह ने बताया कि इमरजेंसी कक्ष के बाहर स्ट्रेचर ऊपरी मंजिल पर थे, जो मरीजों को ले गए होंगे और फिर वहीं छोड़ दिया होगा। सीएमएस को निर्देश दे दिए हैं कि यहां हर समय चार से पांच स्ट्रेचर उपलब्ध रहें।
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