फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lalitpur News ›   Doctors and engineers are becoming victims of major cyber crimes.

Lalitpur News: बड़े साइबर अपराध के शिकार हो रहे डॉक्टर व इंजीनियर

Tue, 03 Sep 2024 03:21 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 03 Sep 2024 03:21 AM IST
विज्ञापन
Doctors and engineers are becoming victims of major cyber crimes.
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

ललितपुर। डिजिटलाइजेशन के जमाने में साइबर अपराधी रोजाना नए तरीके अपनाकर लोगों को साइबर ठगी का शिकार बना रहे हैं। साइबर अपराधी लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर रहे हैं। हाल में साइबर अपराधियों ने एक महिला डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट किया। डेढ़ माह पूर्व भी सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता को इसी प्रकार से डिजिटल अरेस्ट कर अपने खाते में रुपये ट्रांसफर कराए थे।
हाल के दिनों में डिजिटल अरेस्ट कर धमकाने, प्रताड़ित कर पैसे वसूलने की शिकायतें पुलिस के पास आ रही हैं। यहां की डॉ दीपाली जैन को 26 जुलाई को उनके मोबाइल फोन पर अलग अलग नंबरों से फोन आया, जिसमें कहा गया कि उनका नंबर टेलीकाम अथॉरिटी ऑफ इंडिया से बंद किया जा रहा है। क्योंकि उनके दूसरे फोन नंबर द्वारा अपराध हुआ है। जेल जाने का भय दिखाया गया। उसके खाते से फोन पे व नेट बैंकिंग से 50-50 हजार कर कुल 200011 रुपये विभिन्न खातों में डलवा लिए थे। साइबर थाना ने महिला डॉक्टर की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था।
विज्ञापन

इसी प्रकार जुलाई में सिंचाई कार्य मंडल में तैनात अधीक्षण अभियंता उमेश चंद्र को साइबर अपराधियों ने उनके पुत्र के दुष्कर्म के मामले में फंसने की बात कहते हुए डिजिटल अरेस्ट कर लिया। साइबर अपराधियों ने अधीक्षण अभियंता से 50 हजार रुपये खाते में डलवा लिए थे। पुलिस प्रशासन की ओर से लोगों को लगातार जागरूक किया जाता है कि कोई फोन आए तो तत्काल स्थानीय पुलिस से संपर्क करें और साइबर हेल्प लाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके बावजूद लोग साइबर अपराधियों के झांसे में आ जाते हैं और अपनी जमापूंजी गवां देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

----------
कैसे बनाते हैं लोगों को शिकार
साइबर ठग किसी व्यक्ति का चयन कर उसे फोन करते हैं। आधार कार्ड या अन्य कागजात के जरिये अपराध होने की बात कहते हैं। साथ में किसी करीबी के दुष्कर्म या अन्य अपराध में पकड़े जाने और वह उनकी हिरासत में होने की बात कहकर डराते हैं। फिर हिरासत से छोड़ने के एवज में व्यक्ति से पैसे की मांग की जाती है। कई मामलों में व्यक्ति काे डिजिटली गिरफ्तार करने की सूचना दी जाती है और उसे स्काईपे या वीडियो कांफ्रेंसिंग के अन्य माध्यम से पैसे मिलने तक जुड़े रहने की सख्त हिदायत दी जाती है। इस दौरान ठग अधिकारियों की तरह कपड़े पहने होते हैं और वहां से जुड़ते हैं, जहां परिसर पुलिस स्टेशन और सरकारी दफ्तर की तरह दिखता है। जिससे लोगों को शक न हो।
--------
सरकारी एजेंसियों के नाम पर कर रहे ठगी
साइबर ठग अब सरकारी एजेंसियों के नाम पर लोगों को डरा धमकाकर रुपये ऐंठ रहे हैं। पुलिस अधिकारी, सीबीआई, नारकोटिक्स विभाग, रिजर्व बैंक, प्रवर्तन निदेशालय और अन्य एजेंसियों के नाम पर ब्लैकमेल और डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी देकर लोगों को ठगा जा रहा है। एसपी मोहम्मद मुश्ताक ने बताया कि सभी पुलिस अधिकारियों के सरकारी सीयूजी नंबर होते हैं और कोई भी अधिकारी इस प्रकार से फोन नहीं करता है।

--------
साइबर ठगी से बचने के लिए अपने आप को सतर्क रखें। इस प्रकार के कोई भी फोन आए तो उन्हें न उठाएं और तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचना दें। साइबर हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें। साइबर अपराध में गिरफ्तार किए गए आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर और एनएसए की कार्रवाई की जाएगी। मोहम्मद मुश्ताक, पुलिस अधीक्षक
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed