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Lalitpur News: अधूरी छूटी पढ़ाई नहीं छोड़ा वॉलीबॉल खेलना, राघवेंद्र ने थाईलैंड में भारत को दिलाया सोना

Wed, 26 Aug 2026 01:11 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2026 01:11 AM IST
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Did not give up volleyball despite leaving studies incomplete; Raghavendra won gold for India in Thailand.
मड़ावरा। यदि हौसला बुलंद हो और कुछ कर दिखाने का जुनून दिल में हो तो सीमित संसाधन और तमाम मुश्किलें भी प्रतिभा की राह नहीं रोक सकतीं। कस्बे के किसान परिवार से निकले राघवेंद्र राजपूत ने अपनी मेहनत, लगन और वालीबॉल के प्रति जुनून के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के गौरव को बढ़ाया है। थाईलैंड की धरती पर भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपने परिवार के साथ-साथ क्षेत्र और पूरे जनपद को गौरवान्वित किया है।
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राघवेंद्र ने बताया कि उसके पिता बाबूलाल राजपूत किसान हैं, जबकि उनके बड़े भाई भाग सिंह बेकरी का संचालन करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद उसने पढ़ाई के साथ वालीबॉल के प्रति अपना जुनून बनाए रखा। उनकी प्रारंभिक शिक्षा परिषदीय विद्यालय में हुई। इसके बाद शिवजी ज्ञान मंदिर में कक्षा छह से आठ तक अध्ययन किया। कक्षा नौ और दस की पढ़ाई विद्यासागर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से तथा कक्षा 11वीं और 12वीं की शिक्षा सरस्वती इंटर कॉलेज से पूरी की। आर्थिक कठिनाइयों के चलते आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सके, लेकिन उन्होंने खेल का साथ नहीं छोड़ा।
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राघवेंद्र ने इंटरमीडिएट के दौरान विद्यालय में वॉलीबॉल खेलना शुरू किया। इसके बाद पुरानी तहसील परिसर में कस्बे के साथी खिलाड़ियों के साथ नियमित अभ्यास जारी रखा। लगातार मेहनत और अभ्यास से उनकी प्रतिभा में निखार आता गया और उन्होंने विभिन्न स्थानीय टूर्नामेंटों में प्रतिभाग करना शुरू किया।
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बल्देवगढ़ में आयोजित राज्य स्तरीय टूर्नामेंट उनके खेल जीवन में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ। इसी दौरान उन्हें कोच मुन्ना का मार्गदर्शन मिला। उनके सहयोग से छत्तीसगढ़, पांडिचेरी, हरियाणा सहित कई राज्यों में आयोजित राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया और अपने खेल को और बेहतर बनाया। राघवेंद्र ने बताया कि लगातार बेहतर अभ्यास के बाद थाईलैंड में भारतीय टीम की ओर से खेलने का अवसर मिला। प्रथम थाई-इंडो अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया। भारतीय टीम ने प्रतियोगिता में विजयी रहते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया। इस उपलब्धि से उसके परिवार और कस्बे में खुशी का माहौल है। परिजन, मित्र और शुभचिंतक उन्हें लगातार बधाइयां दे रहे हैं।
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