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बढ़ती उम्र में बच्चे हो रहे डिप्रेशन का शिकार
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- फोटो : graphic.jpg
ललितपुर। नगर पालिका बालिका इंटर कॉलेज में राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत किशोर स्वास्थ्य मंच बनाकर किशोरियों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बढ़ती उम्र में बच्चे डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं।
मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डीके गर्ग ने बताया कि बढ़ती उम्र में बच्चे अक्सर अपने माता-पिता से अपनी बातें शेयर नहीं करते हैं। इस कारण वह डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। इस उम्र में जरूरी है कि बच्चे अपनी बात अपने मां बाप या बड़े भाई या फिर बहन को बताएं, इससे उनके मन की उलझन भी कम होगी और डिप्रेशन से भी बचाव होगा। इस मौके पर हुई क्विज प्रतियोगिता में सोनम प्रथम, सुहानी द्वितीय व पूजा तृतीय स्थान पर रहीं।
नोडल अधिकारी डॉ. हुसैन खान ने बताया कि आजकल बच्चे हरी सब्जी, दूध और पोषण देने वाला खाना नहीं पसंद करते हैं और उसकी जगह बच्चों को फास्ट फूड, पिज्जा, बर्गर ज्यादा पसंद आता है। बच्चे बाहर का खाना खाकर बीमार भी हो रहे हैं साथ ही उनमें पोषक तत्व की कमी भी हो रही है। डॉ. सुखदेव ने बताया कि किशोर स्वास्थ्य मंच का आयोजन जिले के सभी 6 ब्लॉक में किया जाना है। कार्यक्रम में किशोरियों को सैनिटरी पैड, आयरन, फोलिक टैबलेट का वितरण किया गया। कार्यक्रम में एएफ़एचएस काउंसलर रश्मि श्रीवास्तव, राजेंद्र मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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शारीरिक बदलाव से आशंकित न हों, साथिया क्लीनिक में बताएं अपनी समस्याएं
डीईआईसी मैनेजर डॉ. सुखदेव ने बताया कि इस उम्र में बच्चों के शरीर में कई तरीके के शारीरिक बदलाव होते हैं। इन बदलाव को लेकर उनमें कई तरह की शंकाएं भी रहती हैं। ऐसे जरूरी है कि वह इस पर खुल बात करें। किशोर और किशोरियों के लिए जिला अस्पताल में साथिया क्लीनिक संचालित की जाती है। जिला महिला अस्पताल में ओपीडी कमरा नंबर 4 और कमरा नंबर 51 में यह केंद्र संचालित हैं। केंद्र पर आयरन, फोलिक टैबलेट, अल्बेंडाजोल, गर्भनिरोधक दवाई, सैनिटरी पैड आदि मुफ्त में दी जाती हैं। केंद्र में अक्सर ऐसी लड़कियां भी आती हैं, जिनका पढ़ाई में मन नहीं लगता है। इसके अलावा चिड़चिड़ापन व बेचैनी भी रहती है। यह सब मानसिक रोगों के लक्षण हैं। बच्चे अपनी समस्या क्लीनिक में बैठने वाले डॉक्टरों को बता सकते हैं।
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मुख्य अतिथि मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. डीके गर्ग ने बताया कि बढ़ती उम्र में बच्चे अक्सर अपने माता-पिता से अपनी बातें शेयर नहीं करते हैं। इस कारण वह डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। इस उम्र में जरूरी है कि बच्चे अपनी बात अपने मां बाप या बड़े भाई या फिर बहन को बताएं, इससे उनके मन की उलझन भी कम होगी और डिप्रेशन से भी बचाव होगा। इस मौके पर हुई क्विज प्रतियोगिता में सोनम प्रथम, सुहानी द्वितीय व पूजा तृतीय स्थान पर रहीं।
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नोडल अधिकारी डॉ. हुसैन खान ने बताया कि आजकल बच्चे हरी सब्जी, दूध और पोषण देने वाला खाना नहीं पसंद करते हैं और उसकी जगह बच्चों को फास्ट फूड, पिज्जा, बर्गर ज्यादा पसंद आता है। बच्चे बाहर का खाना खाकर बीमार भी हो रहे हैं साथ ही उनमें पोषक तत्व की कमी भी हो रही है। डॉ. सुखदेव ने बताया कि किशोर स्वास्थ्य मंच का आयोजन जिले के सभी 6 ब्लॉक में किया जाना है। कार्यक्रम में किशोरियों को सैनिटरी पैड, आयरन, फोलिक टैबलेट का वितरण किया गया। कार्यक्रम में एएफ़एचएस काउंसलर रश्मि श्रीवास्तव, राजेंद्र मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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शारीरिक बदलाव से आशंकित न हों, साथिया क्लीनिक में बताएं अपनी समस्याएं
डीईआईसी मैनेजर डॉ. सुखदेव ने बताया कि इस उम्र में बच्चों के शरीर में कई तरीके के शारीरिक बदलाव होते हैं। इन बदलाव को लेकर उनमें कई तरह की शंकाएं भी रहती हैं। ऐसे जरूरी है कि वह इस पर खुल बात करें। किशोर और किशोरियों के लिए जिला अस्पताल में साथिया क्लीनिक संचालित की जाती है। जिला महिला अस्पताल में ओपीडी कमरा नंबर 4 और कमरा नंबर 51 में यह केंद्र संचालित हैं। केंद्र पर आयरन, फोलिक टैबलेट, अल्बेंडाजोल, गर्भनिरोधक दवाई, सैनिटरी पैड आदि मुफ्त में दी जाती हैं। केंद्र में अक्सर ऐसी लड़कियां भी आती हैं, जिनका पढ़ाई में मन नहीं लगता है। इसके अलावा चिड़चिड़ापन व बेचैनी भी रहती है। यह सब मानसिक रोगों के लक्षण हैं। बच्चे अपनी समस्या क्लीनिक में बैठने वाले डॉक्टरों को बता सकते हैं।