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दहेज हत्या में पति को आजीवन कारावास
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 02 Aug 2016 01:00 AM IST
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jail, lalitpur news
- फोटो : demo
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ललितपुर। लक्ष्मीपुरा निवासी एक युवक ने अपने भाई के साथ मिलकर पत्नी की हत्या कर शव शहजाद नदी में फेंक दिया था। इस मामले में दहेज की खातिर पत्नी की हत्या में दोषी पति को अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट हरकेश कुमार की अदालत ने आजीवन कारावास और देवर को सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को बीस-बीस हजार रुपए अर्थदंड से भी दंडित किया। वहीं घटना के समय जनपद से बाहर होने की बात सिद्ध होने पर दो अन्य देवरों को बरी कर दिया।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के जिला भोपाल अंतर्गत मीरा मंदिर के पास ईश्वर नगर निवासी जगदीश पुत्र अलबेल सिंह ने थाना कोतवाली में 17 अक्टूबर को तहरीर देकर बताया था कि उसने अपनी पुत्री पूनम की शादी बीस मई 2013 को मुहल्ला लक्ष्मीपुरा ललितपुर निवासी ध्रुव सिंह पुत्र दामोदर सिंह के साथ की थी। चौदह अक्टूबर 2013 की रात्रि में ध्रुव सिंह ने अपने बड़े भाई अशोक, राजू एवं पुरुषोत्तम बाबा के साथ मिलकर उसकी पुत्री पूनम की हत्या करके शव अशोक की मोटरसाइकिल पर रखकर शहजाद नदी में फेंक दिया था। उक्त लोगों ने उसी रात उसे तीन बजे फोन पर सूचना दी कि उसकी पुत्री पूनम अचानक घर से लापता हो गई है। इसके बाद पंद्रह अक्टूबर 2013 को फिर से फोन पर सूचना दी कि पूनम का शव शहजाद नदी में पाया गया है।
सूचना पाकर वह अपने परिवार के साथ उसी दिन ललितपुर आया तो पता चला कि उक्त ससुरालियों ने उसकी पुत्री की हत्या की है। आगे उन्होंने यह भी बताया कि उक्त सभी ससुराली उसकी पुत्री को दहेज की खातिर परेशान करते थे, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते वह उनकी मांगें पूरी नहीं कर सके, जिसके चलते उक्त ससुरालियों ने उसकी पुत्री की हत्या की है।
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पिता ने कोतवाली पुलिस से कार्रवाई की मांग की, जिस पर पुलिस ने महिला के शव को शहजाद नदी के पुल के उथले पानी से बरामद करते हुए पोस्टमार्टम कराया और पति समेत चारों भाइयों पर दहेज उत्पीड़न, दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज करते हुए न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था। सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए उक्त मामले में दोषी पाते हुए पति ध्रुव सिंह को आजीवन कारावास और देवर राजू को सात वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। यही नहीं दोनों भाइयों पर बीस-बीस हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में चार-चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने अर्थदंड की अदा पचास प्रतिशत धनराशि पीड़ित पक्ष को प्रतिकर स्वरूप देने के आदेश भी दिए।
इस मामले में ध्रुव सिंह मुकदमा लिखे जाने के बाद से जेल में निरुद्घ चल रहा है। वहीं उक्त मामले में शामिल दो अन्य देवर अशोक कुमार व पुरुषोत्तम को घटना के समय परिवार से अलग झांसी में होने पर साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। मामले की पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लखन यादव ने संयुक्त रूप से की।
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गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के जिला भोपाल अंतर्गत मीरा मंदिर के पास ईश्वर नगर निवासी जगदीश पुत्र अलबेल सिंह ने थाना कोतवाली में 17 अक्टूबर को तहरीर देकर बताया था कि उसने अपनी पुत्री पूनम की शादी बीस मई 2013 को मुहल्ला लक्ष्मीपुरा ललितपुर निवासी ध्रुव सिंह पुत्र दामोदर सिंह के साथ की थी। चौदह अक्टूबर 2013 की रात्रि में ध्रुव सिंह ने अपने बड़े भाई अशोक, राजू एवं पुरुषोत्तम बाबा के साथ मिलकर उसकी पुत्री पूनम की हत्या करके शव अशोक की मोटरसाइकिल पर रखकर शहजाद नदी में फेंक दिया था। उक्त लोगों ने उसी रात उसे तीन बजे फोन पर सूचना दी कि उसकी पुत्री पूनम अचानक घर से लापता हो गई है। इसके बाद पंद्रह अक्टूबर 2013 को फिर से फोन पर सूचना दी कि पूनम का शव शहजाद नदी में पाया गया है।
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सूचना पाकर वह अपने परिवार के साथ उसी दिन ललितपुर आया तो पता चला कि उक्त ससुरालियों ने उसकी पुत्री की हत्या की है। आगे उन्होंने यह भी बताया कि उक्त सभी ससुराली उसकी पुत्री को दहेज की खातिर परेशान करते थे, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते वह उनकी मांगें पूरी नहीं कर सके, जिसके चलते उक्त ससुरालियों ने उसकी पुत्री की हत्या की है।
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पिता ने कोतवाली पुलिस से कार्रवाई की मांग की, जिस पर पुलिस ने महिला के शव को शहजाद नदी के पुल के उथले पानी से बरामद करते हुए पोस्टमार्टम कराया और पति समेत चारों भाइयों पर दहेज उत्पीड़न, दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज करते हुए न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन था। सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वारा अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए उक्त मामले में दोषी पाते हुए पति ध्रुव सिंह को आजीवन कारावास और देवर राजू को सात वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। यही नहीं दोनों भाइयों पर बीस-बीस हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में चार-चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने अर्थदंड की अदा पचास प्रतिशत धनराशि पीड़ित पक्ष को प्रतिकर स्वरूप देने के आदेश भी दिए।
इस मामले में ध्रुव सिंह मुकदमा लिखे जाने के बाद से जेल में निरुद्घ चल रहा है। वहीं उक्त मामले में शामिल दो अन्य देवर अशोक कुमार व पुरुषोत्तम को घटना के समय परिवार से अलग झांसी में होने पर साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। मामले की पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव व सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता लखन यादव ने संयुक्त रूप से की।