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शासनादेश से इतर कार्य कर रहे एबीआरसी
Updated Mon, 01 Oct 2018 02:41 AM IST
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शासनादेश से इतर कार्य कर रहे एबीआरसी
ललितपुर। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के निशाने पर सह समन्वयक आ गए हैं। उन्होंने बीएसए को ज्ञापन देकर कुछ सह समन्वयकों पर शासनादेश के इतर कार्य करने का आरोप लगाया है। जिलाध्यक्ष राजेश लिटौरिया का कहना है कि नियमता सह समन्वयकों को सबसे पहले बीआरसी पहुंचकर अपनी लिखित उपस्थिति देने के उपरांत पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार विद्यालयों में शैक्षिक सपोर्ट देना चाहिए। यही नहीं, साप्ताहिक कार्यक्रम लिखित रूप में खंड शिक्षा अधिकारी व बीएसए के पास पहले उपलब्ध हो, जिससे कि वह सह समन्वयकों की उपस्थिति विद्यालयों में सत्यापित कर सके। इसके बाद भी कुछ सह समन्वयक शासनादेश के इतर कार्य कर रहे हैं। इस तरह के आरोप पूर्व में भी लगाए जाते रहे हैं। लेकिन उन पर अब तक विभागीय शिकंजा नहीं कसा जा सका है। बता दें कि प्रत्येक ब्लाक में विषयवार सह समन्वयकों की नियुक्ति की जाती है। इसके पीछे मकसद शिक्षण कार्य को प्रभावी बनाना है। अक्सर देखा जाता है कि कुछ सह समन्वयक विद्यालय में नहीं पहुुंचकर बीआरसी में ही बैठे रहते हैं। शायद यही वजह है कि अब सह समन्वयक शिक्षक संगठनों के निशाने में आ गए हैं।
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ललितपुर। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के निशाने पर सह समन्वयक आ गए हैं। उन्होंने बीएसए को ज्ञापन देकर कुछ सह समन्वयकों पर शासनादेश के इतर कार्य करने का आरोप लगाया है। जिलाध्यक्ष राजेश लिटौरिया का कहना है कि नियमता सह समन्वयकों को सबसे पहले बीआरसी पहुंचकर अपनी लिखित उपस्थिति देने के उपरांत पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार विद्यालयों में शैक्षिक सपोर्ट देना चाहिए। यही नहीं, साप्ताहिक कार्यक्रम लिखित रूप में खंड शिक्षा अधिकारी व बीएसए के पास पहले उपलब्ध हो, जिससे कि वह सह समन्वयकों की उपस्थिति विद्यालयों में सत्यापित कर सके। इसके बाद भी कुछ सह समन्वयक शासनादेश के इतर कार्य कर रहे हैं। इस तरह के आरोप पूर्व में भी लगाए जाते रहे हैं। लेकिन उन पर अब तक विभागीय शिकंजा नहीं कसा जा सका है। बता दें कि प्रत्येक ब्लाक में विषयवार सह समन्वयकों की नियुक्ति की जाती है। इसके पीछे मकसद शिक्षण कार्य को प्रभावी बनाना है। अक्सर देखा जाता है कि कुछ सह समन्वयक विद्यालय में नहीं पहुुंचकर बीआरसी में ही बैठे रहते हैं। शायद यही वजह है कि अब सह समन्वयक शिक्षक संगठनों के निशाने में आ गए हैं।