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मड़ावरा
Updated Tue, 12 Dec 2017 02:29 AM IST
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बच्चों को घटिया चावल परोसने की शिकायत
मड़ावरा(ललितपुर)। मड़ावरा विकास खंड के धौरीसागर स्थित सकरा मजरा के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बच्चों को घटिया भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है। ऐसा आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है। गौरतलब हो कि विद्यालय में बच्चों की कुल संख्या 62 है और विद्यालय का पूरा कार्यभार सिर्फ एक ही शिक्षक के सहारे चल रहा है। साथ ही सरकार की बाल कल्याणकारी योजना मिड-डे-मिल जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। विद्यालय के बच्चों को मिड-डे-मिल में चावल भी घटिया किस्म का परोसा जा रहा है। बच्चों ने बताया कि पिछले पंद्रह दिन से ठीक से मिड-डे-मील नहीं बन रहा है। विद्यालय प्रबंध समिति द्वारा जिस दिन मीनू चार्ट के मुताबिक चावल सब्जी बनाई जाती है। उस दिन बच्चे सब्जी चावल नहीं खाते बच्चों का आरोप है कि चावल में मिट्टी के तेल की बदबू आती है। इस कारण उसे खाना संभव नहीं होता है। वहीं रसोईयों ने बताया कि जैसी खाद्यान्न सामग्री उपलब्ध करवाई जाती है उसी प्रकार का भोजन बनाया जाता है। इंचार्ज अध्यापक मुन्नालाल कुशवाहा ने बताया कि कुछ दिन पहले ही मेरे पास चार्ज आया है। उससे मिड-डे-मिल सामग्री मेरे देखरेख में नहीं आ रही है। वहीं धौरीसागर शंकुल प्रभारी मुजीम खान ने बताया कि इस प्रकार का चावल प्रशासन की ओर से ही हमें दिया जा रहा है। इसकी शिकायत हमने बच्चों के पक्ष रखते हुए की है। आशा है शासन की ओर से अबकी बार खाने योग्य राशन सामग्री आएगी।
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मड़ावरा(ललितपुर)। मड़ावरा विकास खंड के धौरीसागर स्थित सकरा मजरा के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बच्चों को घटिया भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है। ऐसा आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है। गौरतलब हो कि विद्यालय में बच्चों की कुल संख्या 62 है और विद्यालय का पूरा कार्यभार सिर्फ एक ही शिक्षक के सहारे चल रहा है। साथ ही सरकार की बाल कल्याणकारी योजना मिड-डे-मिल जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं। विद्यालय के बच्चों को मिड-डे-मिल में चावल भी घटिया किस्म का परोसा जा रहा है। बच्चों ने बताया कि पिछले पंद्रह दिन से ठीक से मिड-डे-मील नहीं बन रहा है। विद्यालय प्रबंध समिति द्वारा जिस दिन मीनू चार्ट के मुताबिक चावल सब्जी बनाई जाती है। उस दिन बच्चे सब्जी चावल नहीं खाते बच्चों का आरोप है कि चावल में मिट्टी के तेल की बदबू आती है। इस कारण उसे खाना संभव नहीं होता है। वहीं रसोईयों ने बताया कि जैसी खाद्यान्न सामग्री उपलब्ध करवाई जाती है उसी प्रकार का भोजन बनाया जाता है। इंचार्ज अध्यापक मुन्नालाल कुशवाहा ने बताया कि कुछ दिन पहले ही मेरे पास चार्ज आया है। उससे मिड-डे-मिल सामग्री मेरे देखरेख में नहीं आ रही है। वहीं धौरीसागर शंकुल प्रभारी मुजीम खान ने बताया कि इस प्रकार का चावल प्रशासन की ओर से ही हमें दिया जा रहा है। इसकी शिकायत हमने बच्चों के पक्ष रखते हुए की है। आशा है शासन की ओर से अबकी बार खाने योग्य राशन सामग्री आएगी।