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रानीबाग, नया खेवट खाता खोलने में भी हुआ खेल
Updated Thu, 05 Oct 2017 02:03 AM IST
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रानीबाग, नया खाता खोलने में भी हुआ खेल
रानीबाग का प्रकरण में हर रोज नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अब रानीबाग की जमीन के स्थानांतरण के लिए नया खेवट खाता संख्या खोलने का प्रकरण भी सामने आया है, जिसमें नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं। हालांकि जिलाधिकारी द्वारा गठित की गई चार सदस्यीय जांच कमेटी मामले में हर पहलु पर जांच करने में जुटी हुई है, जिसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद खुलासा हो सकेगा।
करीब सात दशक से उक्त रानीबाग की आठ एकड़ जमीन जिमन-10 यानि नजूल की भूमि के रूप में दर्ज चली आ रही है, जबकि उक्त जमीन जेरेबंद नगर पालिका के सुपुर्द थी। लेकिन इसके बावजूद वर्ष 1961 में टीकमगढ़ के राजा द्वारा उक्त जमीन का विक्रय कर दिया गया, जो कि नजूल भूमि घोषित होने के बाद नहीं किया जा सकता है और जो अवैधानिक है। वर्ष 1968 में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर 31 भूकब्जाधारियों के खिलाफ कब्जा मुक्त कराने के लिए नियत प्राधिकारी/परगनाधिकारी न्यायालय में परिवाद भी दाखिल किया गया था। इसमें अग्रवाल कंपनी व अन्य 30 लोगों को पार्टी बनाया गया था। यह वाद जिला स्तरीय अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से नगर पालिका द्वारा उक्त सभी भूकब्जाधारियों के विरुद्ध सिविल अपील का आर्डर 25 नवंबर वर्ष 2008 को पारित कर जिला न्यायालय को अपील का उचित निस्तारण मैरिट के आधार पर करने के आदेश जारी किए गए थे। इस पर जिला न्यायाधीश ने यह मामला नियत प्राधिकारी को स्थानांतरित कर दिया, जिसके बाद 10 अप्रैल 2015 को नगर पालिका के स्वामित्व को खत्म करते हुए रानी बाग की उक्त आठ एकड़ जमीन को नजूल न मानते हुए उसे राजा की संपत्ति घोषित कर दी गई और वर्ष 2015 में जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा उक्त मामले में दिए गए निर्णय में उक्त जमीन को नजूल भूमि नहीं मानते हुए खतौनी अंदर हद नगर पालिका खेवट खाता 53 से खारिज करने और रिकॉर्ड दुरुस्त करने के आदेश दिए। जिसके बाद उक्त जमीन को स्थानांतरित करने के लिए अलग से खेवट खाता 54 खोलकर अरबों की आठ एकड़ उक्त भूमि को निजी बनाने का खेल किया गया। जबकि राजस्व अधिकारियों के अनुसार नया खेवट खाता खोलने के लिए यूपी टेनेंसी एक्ट के तहत परिवर्तन की व्यवस्था तो है, लेकिन यहां नया खेवट खाता खोलने में नियमों की अनदेखी की गई है और इस तरह तत्कालीन जिलाधिकारी न्यायालय के निर्णय को आधार बनाकर 34 एलआर एक्ट के तहत रानीबाग को मोहनलाल आदि के पक्ष में अवैध कब्जेदार/जिमन-20 (निजी भूमि) घोषित कर दिया गया। अधिवक्ता अजय तोमर ने बताया कि खेवट खाता बदलने का कानूनी अधिकारी किसी को नहीं है। इस प्रकरण में अवैधानिक रुप से जो खेवट परिवर्तन किया गया है। इस प्रकरण में नगर पालिका के खेवट संख्या निरस्त किए गए, जो किसी अन्य विद्यमान खेवट खाता में ही जाना चाहिए थे, लेकिन यहां ऐसा न किया जाकर नया खेवट ही सृजित कर दिया गया और नजूल की भूमि को निजी भूमि के रुप में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्तमान में उक्त रानीबाग प्रकरण में जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह द्वारा गठित की गई चार सदस्यीय जांच कमेटी मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू पर जांच में जुटी है, जिसमें यह बिंदु भी महत्वपूर्ण होगा।
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रानीबाग का प्रकरण में हर रोज नए तथ्य सामने आ रहे हैं। अब रानीबाग की जमीन के स्थानांतरण के लिए नया खेवट खाता संख्या खोलने का प्रकरण भी सामने आया है, जिसमें नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए हैं। हालांकि जिलाधिकारी द्वारा गठित की गई चार सदस्यीय जांच कमेटी मामले में हर पहलु पर जांच करने में जुटी हुई है, जिसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद खुलासा हो सकेगा।
करीब सात दशक से उक्त रानीबाग की आठ एकड़ जमीन जिमन-10 यानि नजूल की भूमि के रूप में दर्ज चली आ रही है, जबकि उक्त जमीन जेरेबंद नगर पालिका के सुपुर्द थी। लेकिन इसके बावजूद वर्ष 1961 में टीकमगढ़ के राजा द्वारा उक्त जमीन का विक्रय कर दिया गया, जो कि नजूल भूमि घोषित होने के बाद नहीं किया जा सकता है और जो अवैधानिक है। वर्ष 1968 में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने पर 31 भूकब्जाधारियों के खिलाफ कब्जा मुक्त कराने के लिए नियत प्राधिकारी/परगनाधिकारी न्यायालय में परिवाद भी दाखिल किया गया था। इसमें अग्रवाल कंपनी व अन्य 30 लोगों को पार्टी बनाया गया था। यह वाद जिला स्तरीय अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से नगर पालिका द्वारा उक्त सभी भूकब्जाधारियों के विरुद्ध सिविल अपील का आर्डर 25 नवंबर वर्ष 2008 को पारित कर जिला न्यायालय को अपील का उचित निस्तारण मैरिट के आधार पर करने के आदेश जारी किए गए थे। इस पर जिला न्यायाधीश ने यह मामला नियत प्राधिकारी को स्थानांतरित कर दिया, जिसके बाद 10 अप्रैल 2015 को नगर पालिका के स्वामित्व को खत्म करते हुए रानी बाग की उक्त आठ एकड़ जमीन को नजूल न मानते हुए उसे राजा की संपत्ति घोषित कर दी गई और वर्ष 2015 में जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा उक्त मामले में दिए गए निर्णय में उक्त जमीन को नजूल भूमि नहीं मानते हुए खतौनी अंदर हद नगर पालिका खेवट खाता 53 से खारिज करने और रिकॉर्ड दुरुस्त करने के आदेश दिए। जिसके बाद उक्त जमीन को स्थानांतरित करने के लिए अलग से खेवट खाता 54 खोलकर अरबों की आठ एकड़ उक्त भूमि को निजी बनाने का खेल किया गया। जबकि राजस्व अधिकारियों के अनुसार नया खेवट खाता खोलने के लिए यूपी टेनेंसी एक्ट के तहत परिवर्तन की व्यवस्था तो है, लेकिन यहां नया खेवट खाता खोलने में नियमों की अनदेखी की गई है और इस तरह तत्कालीन जिलाधिकारी न्यायालय के निर्णय को आधार बनाकर 34 एलआर एक्ट के तहत रानीबाग को मोहनलाल आदि के पक्ष में अवैध कब्जेदार/जिमन-20 (निजी भूमि) घोषित कर दिया गया। अधिवक्ता अजय तोमर ने बताया कि खेवट खाता बदलने का कानूनी अधिकारी किसी को नहीं है। इस प्रकरण में अवैधानिक रुप से जो खेवट परिवर्तन किया गया है। इस प्रकरण में नगर पालिका के खेवट संख्या निरस्त किए गए, जो किसी अन्य विद्यमान खेवट खाता में ही जाना चाहिए थे, लेकिन यहां ऐसा न किया जाकर नया खेवट ही सृजित कर दिया गया और नजूल की भूमि को निजी भूमि के रुप में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्तमान में उक्त रानीबाग प्रकरण में जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह द्वारा गठित की गई चार सदस्यीय जांच कमेटी मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू पर जांच में जुटी है, जिसमें यह बिंदु भी महत्वपूर्ण होगा।
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