{"_id":"59b834184f1c1bf57f8b666f","slug":"171505244184-lalitpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रानी बाग जमीन मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
रानी बाग जमीन मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति
Updated Wed, 13 Sep 2017 12:53 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रानी बाग जमीन मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति
ललितपुर। शहर की बेशकीमती रानीबाग की नजूल की आठ एकड़ जमीन को भूमिधरी के रुप में स्थानांतरित करने के मामले में भारत सरकार के अंडर सैक्रेटरी ने चीफ सेक्रेटरी ऑफ उत्तर प्रदेश सरकार से सीबीआई जांच करने की संस्तुति की है।
बता दें कि उक्त रानीबाग की आठ एकड़ भूमि को करीब सात दशक पूर्व गृहमंत्रालय भारत सरकार द्वारा सरकारी भूमि घोषित करने के बाद भी वर्ष 1961 में टीकमगढ़ के राजा द्वारा उक्त भूमि का विक्रय कर दिया गया, जो अवैधानिक है। इस पर राष्ट्रपति की स्वीकृति से 31 भूकब्जाधारियों के विरुद्घ कब्जा मुक्त कराने के लिए नियत प्राधिकारी/परगनाधिकारी न्यायालय ललितपुर में परिवाद दाखिल किया गया। इसमें अग्रवाल कंपनी व अन्य तीस लोगों को संबंधित न्यायालय द्वारा नोटिस भेजकर पक्ष रखने के लिए 11 जुलाई 1989 की तिथि नियत की गई थी। इसके साथ ही नगर पालिका द्वारा उक्त सभी संबंधित भूकब्जाधारियों के विरुद्घ सिविल अपील सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की गई थी। इसमें नगर पालिका की अपील का ऑर्डर 25 नबंवर वर्ष 2008 को पारित कर जिला जज ललितपुर की कोर्ट को अपील का उचित निस्तारण मैरिट के आधार पर करने के आदेश जारी किए गए थे। इस पर जिला न्यायाधीश ने यह मामला नियत प्राधिकारी को स्थानांतरित कर दिया। इसके बाद दस अप्रैल 2015 को नगर पालिका के स्वामित्व को खत्म करते हुए रानी बाग की उक्त आठ एकड़ भूमि को नजूल न मानते हुए उसे राजा की संपत्ति घोषित कर दी गई। इसको एसडीएम सदर तहसीलदार ने 34 एलआरएक्ट के तहत रानीबाग को मोहनलाल आदि के पक्ष में अवैध कब्जेदार/जिमन-20 घोषित कर दिया गया। वर्तमान में अब उक्त जमीन पर निर्माण कार्य करीब दो माह से लगातार किया जा रहा है। उक्त मामले में एक व्यक्ति द्वारा सचिवालय में पत्र देकर जमीन के प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग उठाई थी, जिस पर भारत सरकार के अंडर सेक्रेटरी एसपीआर त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी को दस अगस्त 2017 को एक पत्र लिखकर उक्त मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी है। उक्त कार्रवाई की सूचना भी शिकायतकर्ताओं को लिखित रुप से उपलब्ध करा दी गई है। रानीबाग की जमीन संबंधी प्रकरण में सीबीआई जांच किए जाने की संस्तुति से भूमाफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। बताया गया है उक्त बेशकीमती जमीन पर कई बड़े कारोबारियों ने भी करोड़ों रुपए का दाव खेला है। प्रदेश में निजाम बदलते ही इस प्रकरण की जांच में और तेजी आ गई है। इससे आने वाले समय में जल्द ही कई सफेदपोश नेताओं और अधिकारियों पर कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
---------
रानी बाग प्रकरण में एक शिकायत की गई थी। इस मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश से स्वामित्व में बदलाव किया गया था। इस कारण इस संबंध में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। शासन को पत्र बनाकर भेज दिया गया है। सीबीआई जांच के संबंध में जानकारी नहीं है।
विज्ञापन
महेश प्रसाद दीक्षित, एसडीएम
विज्ञापन
ललितपुर। शहर की बेशकीमती रानीबाग की नजूल की आठ एकड़ जमीन को भूमिधरी के रुप में स्थानांतरित करने के मामले में भारत सरकार के अंडर सैक्रेटरी ने चीफ सेक्रेटरी ऑफ उत्तर प्रदेश सरकार से सीबीआई जांच करने की संस्तुति की है।
बता दें कि उक्त रानीबाग की आठ एकड़ भूमि को करीब सात दशक पूर्व गृहमंत्रालय भारत सरकार द्वारा सरकारी भूमि घोषित करने के बाद भी वर्ष 1961 में टीकमगढ़ के राजा द्वारा उक्त भूमि का विक्रय कर दिया गया, जो अवैधानिक है। इस पर राष्ट्रपति की स्वीकृति से 31 भूकब्जाधारियों के विरुद्घ कब्जा मुक्त कराने के लिए नियत प्राधिकारी/परगनाधिकारी न्यायालय ललितपुर में परिवाद दाखिल किया गया। इसमें अग्रवाल कंपनी व अन्य तीस लोगों को संबंधित न्यायालय द्वारा नोटिस भेजकर पक्ष रखने के लिए 11 जुलाई 1989 की तिथि नियत की गई थी। इसके साथ ही नगर पालिका द्वारा उक्त सभी संबंधित भूकब्जाधारियों के विरुद्घ सिविल अपील सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की गई थी। इसमें नगर पालिका की अपील का ऑर्डर 25 नबंवर वर्ष 2008 को पारित कर जिला जज ललितपुर की कोर्ट को अपील का उचित निस्तारण मैरिट के आधार पर करने के आदेश जारी किए गए थे। इस पर जिला न्यायाधीश ने यह मामला नियत प्राधिकारी को स्थानांतरित कर दिया। इसके बाद दस अप्रैल 2015 को नगर पालिका के स्वामित्व को खत्म करते हुए रानी बाग की उक्त आठ एकड़ भूमि को नजूल न मानते हुए उसे राजा की संपत्ति घोषित कर दी गई। इसको एसडीएम सदर तहसीलदार ने 34 एलआरएक्ट के तहत रानीबाग को मोहनलाल आदि के पक्ष में अवैध कब्जेदार/जिमन-20 घोषित कर दिया गया। वर्तमान में अब उक्त जमीन पर निर्माण कार्य करीब दो माह से लगातार किया जा रहा है। उक्त मामले में एक व्यक्ति द्वारा सचिवालय में पत्र देकर जमीन के प्रकरण में सीबीआई जांच की मांग उठाई थी, जिस पर भारत सरकार के अंडर सेक्रेटरी एसपीआर त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश सरकार के चीफ सेक्रेटरी को दस अगस्त 2017 को एक पत्र लिखकर उक्त मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी है। उक्त कार्रवाई की सूचना भी शिकायतकर्ताओं को लिखित रुप से उपलब्ध करा दी गई है। रानीबाग की जमीन संबंधी प्रकरण में सीबीआई जांच किए जाने की संस्तुति से भूमाफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। बताया गया है उक्त बेशकीमती जमीन पर कई बड़े कारोबारियों ने भी करोड़ों रुपए का दाव खेला है। प्रदेश में निजाम बदलते ही इस प्रकरण की जांच में और तेजी आ गई है। इससे आने वाले समय में जल्द ही कई सफेदपोश नेताओं और अधिकारियों पर कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
विज्ञापन
---------
रानी बाग प्रकरण में एक शिकायत की गई थी। इस मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश से स्वामित्व में बदलाव किया गया था। इस कारण इस संबंध में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। शासन को पत्र बनाकर भेज दिया गया है। सीबीआई जांच के संबंध में जानकारी नहीं है।
विज्ञापन
महेश प्रसाद दीक्षित, एसडीएम