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अब अलग-अलग रहेंगे बछड़ा व गायें
Fri, 08 Mar 2019 02:00 AM IST
Pragyan dubey
lalitpur
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Published by: Pragyan dubey
Updated Fri, 08 Mar 2019 02:00 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : amar ujala
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ललितपुर। बृहस्पतिवार को जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने अमरपुर स्थित विशिष्ट मंडी स्थल में रोके गए छुट्टा जानवरों की व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने छोटे और बड़े जानवरों को अलग-अलग रखने को कहा, ताकि आपस में लड़ाई न हो और उनकी मौत न हो।
अमरपुर मंडी में 2,400 छुट्टा जानवरों को रोका गया है, जबकि वास्तव में इनकी संख्या तीन हजार के आसपास है। बुधवार को दो पशुओं की मौत होने पर उनके शव को जेसीबी की मदद से गड्ढा खोदकर दफनाया गया। यहां कई और जानवरों की स्थिति नाजुक बनी है। सात मार्च के अमर उजाला ने पेज नंबर दो पर छुट्टा जानवरों की कब्रगाह बन रही अमरपुर मंडी शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया।
इससे प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। बृहस्पतिवार को दोपहर में सबसे पहले तहसीलदार सदर राज बहादुर व मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसके शाक्य अमरपुर मंडी पहुंचे। इसके बाद जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह भी हकीकत जानने के लिए पहुंच गए। उन्होंने छुट्टा जानवरों के खाने और पीने की व्यवस्था जानी। तहसीलदार ने बताया कि कई बार सांड़ व गायें आपस में लड़ जाती हैं, जिससे बछड़ा-बछिया को भूसा खाने व पानी पीने में समस्या खड़ी हो जाती है। इस पर उन्होंने छोटे व बड़े जानवरों को अलग-अलग रखने की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। इसके अनुपालन में तहसीलदार सदर व स्थानीय ग्राम प्रधान ने बेरीकेडिंग लगवाने का काम प्रारंभ करा दिया है। जिलाधिकारी ने बताया कि गायों के लिए भूसा पर्याप्त है। पैसे की कोई कमी नहीं है। बता दें कि इस समय जिले में 14 स्थाई गोवंश आश्रय स्थल व 140 अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल निर्मित किए गए हैं। पूरे जिले में कुल 26776 छुट्टा गोवंश को संरक्षित किया गया है।
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अमरपुर मंडी में छुट्टा जानवरों के आपस में लड़ने के दौरान बछड़ा- बछिया दब जाते हैं। उन्हें बचाने के लिए अलग से व्यवस्था की जा रही है। कल से यह व्यवस्था लागू भी हो जाएगी।
- राज बहादुर, तहसीलदार सदर
लगवाई जा रही बेरीकेट
तहसीलदार व स्थानीय ग्राम प्रधान ने छोटे जानवरों को अलग स्थान पर रखने के लिए बेरीकेट लगवाना प्रारंभ कर दिया है। यहां एक शेड को कवर किया जा रहा है। इससे छोटे जानवरों को खाने व पीने की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।
- डॉ. एसके शाक्य, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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अमरपुर मंडी में 2,400 छुट्टा जानवरों को रोका गया है, जबकि वास्तव में इनकी संख्या तीन हजार के आसपास है। बुधवार को दो पशुओं की मौत होने पर उनके शव को जेसीबी की मदद से गड्ढा खोदकर दफनाया गया। यहां कई और जानवरों की स्थिति नाजुक बनी है। सात मार्च के अमर उजाला ने पेज नंबर दो पर छुट्टा जानवरों की कब्रगाह बन रही अमरपुर मंडी शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया गया।
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इससे प्रशासनिक अमला हरकत में आ गया। बृहस्पतिवार को दोपहर में सबसे पहले तहसीलदार सदर राज बहादुर व मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसके शाक्य अमरपुर मंडी पहुंचे। इसके बाद जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह भी हकीकत जानने के लिए पहुंच गए। उन्होंने छुट्टा जानवरों के खाने और पीने की व्यवस्था जानी। तहसीलदार ने बताया कि कई बार सांड़ व गायें आपस में लड़ जाती हैं, जिससे बछड़ा-बछिया को भूसा खाने व पानी पीने में समस्या खड़ी हो जाती है। इस पर उन्होंने छोटे व बड़े जानवरों को अलग-अलग रखने की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। इसके अनुपालन में तहसीलदार सदर व स्थानीय ग्राम प्रधान ने बेरीकेडिंग लगवाने का काम प्रारंभ करा दिया है। जिलाधिकारी ने बताया कि गायों के लिए भूसा पर्याप्त है। पैसे की कोई कमी नहीं है। बता दें कि इस समय जिले में 14 स्थाई गोवंश आश्रय स्थल व 140 अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल निर्मित किए गए हैं। पूरे जिले में कुल 26776 छुट्टा गोवंश को संरक्षित किया गया है।
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अमरपुर मंडी में छुट्टा जानवरों के आपस में लड़ने के दौरान बछड़ा- बछिया दब जाते हैं। उन्हें बचाने के लिए अलग से व्यवस्था की जा रही है। कल से यह व्यवस्था लागू भी हो जाएगी।
- राज बहादुर, तहसीलदार सदर
लगवाई जा रही बेरीकेट
तहसीलदार व स्थानीय ग्राम प्रधान ने छोटे जानवरों को अलग स्थान पर रखने के लिए बेरीकेट लगवाना प्रारंभ कर दिया है। यहां एक शेड को कवर किया जा रहा है। इससे छोटे जानवरों को खाने व पीने की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा।
- डॉ. एसके शाक्य, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी