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कोरोना के भय से भागे अस्पताल में भर्ती मरीज, देखते ही दखते खाली हो गए पलंग
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जिला अस्पताल के वार्डों को कराया खाली
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। जिले में कोरोना से संक्रमित व्यक्ति की मौत की सूचना आग की तरह फैल गई। जैसे ही यह खबर जिला अस्पताल में पहुंची, वैसे ही भर्ती मरीज एक-एक करके उपचार पूरा कराए बिना ही भाग गए। स्वास्थ्य कर्मियों में सूचना छिपाने को लेकर आक्रोश फैल गया। उन्होंने कार्य बहिष्कार कर दिया, जिससे आपातकालीन सेवाएं ठप हो गईं।
जिला अस्पताल ही 14 लाख की आबादी की इकलौती आस है। यहां सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहर के प्रतिदिन डेढ़ हजार से अधिक मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। लेकिन, बीते दिनों से लॉकडाउन में ओपीडी सेवा बंद चल रही है। इससे केवल इमरजेंसी सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। इमरजेंसी में ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। लेकिन, शनिवार की सुबह जिला अस्पताल के एक संविदा कर्मचारी की कोरोना से मौत होने की सूचना मिलते ही अस्पताल की पूरी सेवाएं ठप हो गई हैं। जैसे ही कोरोना से व्यक्ति की मौत की सूचना मिली, तो अस्पताल कर्मचारियों के साथ ही मरीज घबरा गए और आनन - फानन में कोरोना के भय से बिना उपचार के ही चुपचाप पलंग खाली करके चले गए।
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सैंपल भेजा, लेकिन नहीं किया एकांतवास में भर्ती
कोरोना के संदिग्ध व्यक्ति को अलग या एकांतवास में भर्ती करने का प्रावधान है। लेकिन, जिला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते मरीज को कोरोना जांच का सैंपल भेजने के बाद भी एकांतवास या अलग कक्ष में भर्ती नहीं कर प्राइवेट वार्ड में भर्ती नहीं किया गया। इससे मरीज व स्टाफ भी अस्पताल के संविदा कर्मचारी का मर्ज नहीं समझ सके और न मरीज बीमारी को भांप पाया। मरीज अस्पताल में घूमता रहा, अस्पताल में भर्ती मरीज के तीमारदार और स्टाफ भी बेखौफ होकर घूमता रहा। लेकिन, जैसे ही भर्ती मरीज की कोरोना रिर्पोट आने और मृत्यु की सूचना मिली तो सभी हरकत में आ गए और एक-एक कर गायब हो गए।
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आइसोलेशन में नहीं हो सकेंगे कोरोना मरीज भर्ती
शासन के निर्देश पर जिले में कोरोना मरीजों को उपचार के लिए आइसोलेशन वार्ड स्थापित किए गए हैं, जिसमें चिकित्सक समेत अन्य स्टाफ की दो अलग-अलग टीमें बनाकर नियुक्त किया गया है। इसमें एक टीम को कोरोना मरीज मिलने के बाद से 14 दिन तक उपचार कराना होगा और उसके बाद जांच कराई जाएगी। इसमें निगेटिव पाए जाने पर क्वारंटीन कर घर भेज दिया जाएगा। इसके बाद दूसरी टीम को लगाया जाएगा। लेकिन, जिला स्तर पर बने आइसोलेशन में एक संक्रमित मिलने पर पूरी सेवाएं ठप हो गई हैं। आइसोलेेशन वार्ड में ताला पड़ गया है। इसके साथ ही पूरे स्टाफ के सैंपल लेकर क्वारंटीन किया गया है।
कर्मचारियों ने जताया विरोध, कार्य का किया बहिष्कार
जिला अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्स व अन्य कर्मचारियों ने मृत व्यक्ति की कोरोना से पुष्टि होने के बाद विरोध जताया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन व अन्य विभागीय अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि कोराना के सैंपल भेजने वाले मरीज को एकांतवास में भर्ती नहीं किया गया था। इससे हम सभी लोग बेखौफ होकर कोरोना पॉजीटिव मरीज से मिलते रहे और इलाज करते रहे। हम लोगों को पहले सूचना देनी थी, जिससे अपना बचाव कर सकते थे। अब हम सभी को क्वारंटीन कर जांच के लिए सैंपल भेजे जाएं।
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अस्पताल को सैनेटाइज कराया जाएगा, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर आ सकें। रिपोर्ट छिपाने के मामले में बताया कि हमें भी जानकारी नहीं थी। इससे किसी को सूचना नहीं दे सके।
- डॉ. एस के वासवानी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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जिला अस्पताल ही 14 लाख की आबादी की इकलौती आस है। यहां सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहर के प्रतिदिन डेढ़ हजार से अधिक मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। लेकिन, बीते दिनों से लॉकडाउन में ओपीडी सेवा बंद चल रही है। इससे केवल इमरजेंसी सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। इमरजेंसी में ही मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। लेकिन, शनिवार की सुबह जिला अस्पताल के एक संविदा कर्मचारी की कोरोना से मौत होने की सूचना मिलते ही अस्पताल की पूरी सेवाएं ठप हो गई हैं। जैसे ही कोरोना से व्यक्ति की मौत की सूचना मिली, तो अस्पताल कर्मचारियों के साथ ही मरीज घबरा गए और आनन - फानन में कोरोना के भय से बिना उपचार के ही चुपचाप पलंग खाली करके चले गए।
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सैंपल भेजा, लेकिन नहीं किया एकांतवास में भर्ती
कोरोना के संदिग्ध व्यक्ति को अलग या एकांतवास में भर्ती करने का प्रावधान है। लेकिन, जिला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते मरीज को कोरोना जांच का सैंपल भेजने के बाद भी एकांतवास या अलग कक्ष में भर्ती नहीं कर प्राइवेट वार्ड में भर्ती नहीं किया गया। इससे मरीज व स्टाफ भी अस्पताल के संविदा कर्मचारी का मर्ज नहीं समझ सके और न मरीज बीमारी को भांप पाया। मरीज अस्पताल में घूमता रहा, अस्पताल में भर्ती मरीज के तीमारदार और स्टाफ भी बेखौफ होकर घूमता रहा। लेकिन, जैसे ही भर्ती मरीज की कोरोना रिर्पोट आने और मृत्यु की सूचना मिली तो सभी हरकत में आ गए और एक-एक कर गायब हो गए।
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आइसोलेशन में नहीं हो सकेंगे कोरोना मरीज भर्ती
शासन के निर्देश पर जिले में कोरोना मरीजों को उपचार के लिए आइसोलेशन वार्ड स्थापित किए गए हैं, जिसमें चिकित्सक समेत अन्य स्टाफ की दो अलग-अलग टीमें बनाकर नियुक्त किया गया है। इसमें एक टीम को कोरोना मरीज मिलने के बाद से 14 दिन तक उपचार कराना होगा और उसके बाद जांच कराई जाएगी। इसमें निगेटिव पाए जाने पर क्वारंटीन कर घर भेज दिया जाएगा। इसके बाद दूसरी टीम को लगाया जाएगा। लेकिन, जिला स्तर पर बने आइसोलेशन में एक संक्रमित मिलने पर पूरी सेवाएं ठप हो गई हैं। आइसोलेेशन वार्ड में ताला पड़ गया है। इसके साथ ही पूरे स्टाफ के सैंपल लेकर क्वारंटीन किया गया है।
कर्मचारियों ने जताया विरोध, कार्य का किया बहिष्कार
जिला अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्स व अन्य कर्मचारियों ने मृत व्यक्ति की कोरोना से पुष्टि होने के बाद विरोध जताया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन व अन्य विभागीय अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि कोराना के सैंपल भेजने वाले मरीज को एकांतवास में भर्ती नहीं किया गया था। इससे हम सभी लोग बेखौफ होकर कोरोना पॉजीटिव मरीज से मिलते रहे और इलाज करते रहे। हम लोगों को पहले सूचना देनी थी, जिससे अपना बचाव कर सकते थे। अब हम सभी को क्वारंटीन कर जांच के लिए सैंपल भेजे जाएं।
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अस्पताल को सैनेटाइज कराया जाएगा, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर आ सकें। रिपोर्ट छिपाने के मामले में बताया कि हमें भी जानकारी नहीं थी। इससे किसी को सूचना नहीं दे सके।
- डॉ. एस के वासवानी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक

जिला चिकित्सालय- फोटो : LALITPUR