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नियमों को मुंह चिढ़ा रहीं अनुबंधित वाहन
Wed, 06 Feb 2019 01:41 AM IST
देवेंद्र कुमार
lalitpur
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Published by: देवेंद्र कुमार
Updated Wed, 06 Feb 2019 01:41 AM IST
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- फोटो : amarujala
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जिले के स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध पर लगी सवारी गाड़ियां परिवहन के नियमों को मुंह चिड़ा रहीं है। भले ही अफसरों ने किराए के वाहन लगा रखे हैं। लेकिन इन्हें लगाते समय परिवहन नियमों का ख्याल नहीं रखा गया है। इसके बाद भी वाहनों से अफसरों को विभागीय कामकाज निपटाने में कोई गुरेज नहीं है।
सरकारी विभागों में वाहनों की आवश्यकता पड़ने पर टैक्सी एजेंसी संचालक से किराए पर ली जाती है। नियमता, किराए पर लगाए जाने वाले वाहनों के पास टैक्सी परमिट होना चाहिए, साथ ही इन वाहनों की नंबर प्लेट पीली कलर की होती है। इन वाहनों का अलग से टैक्स लिया जाता है। वहीं, कई निजी वाहन मालिक मुनाफा कमाने के खातिर परिवहन नियमों की अनदेखी कर देते हैं और वे विभागीय मिलीभगत से अपने वाहन किराए पर लगवाने में सफल हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही हाल स्वास्थ्य विभाग का है। यहां लगे कई वाहन परिवहन के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे परिवहन विभाग को राजस्व की चपत लग रही है। कई ऐसे भी किराए के चार पहिया वाहन हैं जिन पर हूटर लगा हुआ है तो वहीं, कइयों पर उत्तर प्रदेश सरकार लिखा है जबकि वे परिवहन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। दूर से देखने में यह पता नहीं चलता है कि यह निजी वाहन है या फिर किराए पर लगा वाहन है। स्वास्थ्य विभाग में लगे वाहनों की नंबर प्लेट ऐसी ही दिखाई दे रही है। कई अन्य विभाग में लगे किराए के वाहनों का ऐसा ही हाल है। अफसरों को ऐसे वाहनों में बैठकर विभागीय कार्य निपटाने में तनिक भी गुरेज नहीं है। जिससे ऐसे अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। सूत्र बताते है कि कई गाड़ियां विभिन्न विभागों में कर्मचारी, उनके परिजन व रिश्तेदार विभाग से अनुबंध कर किराए का फायदा उठा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग में लगी अधिकांश गाड़ियां टैक्सी परमिट है। लेकिन वाहनों की नंबर प्लेट गलत लगाई गई है। जिसे शीघ्र नियमानुसार प्लेट लगाने के निर्देश दिए जाएंगे।
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-डीसी दोहरे, नोडल अधिकारी
संबंधित विभागीय अधिकारियों को वाहन लगाते समय उनके परमिटों की जांच करना चाहिए। जिसमें टैक्सी परमिट वाहनों को ही विभागों में लगाना चाहिए।
सत्येंद्र कुमार, सहायक परिवहन अधिकारी, ललितपुर
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सरकारी विभागों में वाहनों की आवश्यकता पड़ने पर टैक्सी एजेंसी संचालक से किराए पर ली जाती है। नियमता, किराए पर लगाए जाने वाले वाहनों के पास टैक्सी परमिट होना चाहिए, साथ ही इन वाहनों की नंबर प्लेट पीली कलर की होती है। इन वाहनों का अलग से टैक्स लिया जाता है। वहीं, कई निजी वाहन मालिक मुनाफा कमाने के खातिर परिवहन नियमों की अनदेखी कर देते हैं और वे विभागीय मिलीभगत से अपने वाहन किराए पर लगवाने में सफल हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही हाल स्वास्थ्य विभाग का है। यहां लगे कई वाहन परिवहन के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे परिवहन विभाग को राजस्व की चपत लग रही है। कई ऐसे भी किराए के चार पहिया वाहन हैं जिन पर हूटर लगा हुआ है तो वहीं, कइयों पर उत्तर प्रदेश सरकार लिखा है जबकि वे परिवहन नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। दूर से देखने में यह पता नहीं चलता है कि यह निजी वाहन है या फिर किराए पर लगा वाहन है। स्वास्थ्य विभाग में लगे वाहनों की नंबर प्लेट ऐसी ही दिखाई दे रही है। कई अन्य विभाग में लगे किराए के वाहनों का ऐसा ही हाल है। अफसरों को ऐसे वाहनों में बैठकर विभागीय कार्य निपटाने में तनिक भी गुरेज नहीं है। जिससे ऐसे अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। सूत्र बताते है कि कई गाड़ियां विभिन्न विभागों में कर्मचारी, उनके परिजन व रिश्तेदार विभाग से अनुबंध कर किराए का फायदा उठा रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग में लगी अधिकांश गाड़ियां टैक्सी परमिट है। लेकिन वाहनों की नंबर प्लेट गलत लगाई गई है। जिसे शीघ्र नियमानुसार प्लेट लगाने के निर्देश दिए जाएंगे।
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-डीसी दोहरे, नोडल अधिकारी
संबंधित विभागीय अधिकारियों को वाहन लगाते समय उनके परमिटों की जांच करना चाहिए। जिसमें टैक्सी परमिट वाहनों को ही विभागों में लगाना चाहिए।
सत्येंद्र कुमार, सहायक परिवहन अधिकारी, ललितपुर