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सामुदायिक शौचालय में ताला, खुले में शौच जाने को मजबूर लोग
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सार्वजनिक शौचालय शहरी
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। स्वच्छ भारत मिशन के तहत नगर पालिका द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए सार्वजनिक शौचालय के दो साल से ताले नहीं खोले गए हैं। ऐसे में राहगीरों को भी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
नगरवासियों की माने तो सामुदायिक शौचालय मात्र दिखावा बन कर रह गया है। स्थानीय लोगों को यह मालूम नही है कि शौचालय आखिर बंद क्यों है। स्वच्छता अभियान पर जोर देते हुए नगर को खुले में शौच मुक्त करने के लिए सार्वजनिक सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था लेकिन इसका उपयोग नहीं हो रहा है।
जन सुविधा के लिए बना सामुदायिक शौचालय बंद रहता है। बाबूलाल, रामलाल, कल्लू, रामू, हेकड़, छोटेलाल, सचिन, हरिराम, मनोज आदि ने बताया कि सामुदायिक शौचालय के आसपास रहने वाले लगभग तीन दर्जन परिवारों के पास अपना शौचालय नहीं है। सामुदायिक शौचालय का निर्माण होने से लोगों में आस जगी थी कि अब खुले में शौच से मुक्ति मिल जाएगी, पर ऐसा नहीं हुआ। लोगों ने बताया कि लगभग दो वर्ष पूर्व बनाए गए शौचालय मुश्किल से आठ दस दिन के लिए खुला है। कभी किसी अधिकारी के आने पर शौचालय का ताला खोल दिया जाता है। साफ सफाई भी कर दी जाती है। बाद में फिर ताला बंद कर दिया जाता है। लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी योजना के मकसद से गरीब वंचित हैं। अगर सामुदायिक शौचालय नियमित खुले तो लोग उसी में शौच के लिए जाएंगे। शौचालय के आसपास सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। स्थानीय निवासियों ने सामुदायिक शौचालय का ताला खुलवाने की मांग जिला प्रशासन से की है।
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नगरवासियों की माने तो सामुदायिक शौचालय मात्र दिखावा बन कर रह गया है। स्थानीय लोगों को यह मालूम नही है कि शौचालय आखिर बंद क्यों है। स्वच्छता अभियान पर जोर देते हुए नगर को खुले में शौच मुक्त करने के लिए सार्वजनिक सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था लेकिन इसका उपयोग नहीं हो रहा है।
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जन सुविधा के लिए बना सामुदायिक शौचालय बंद रहता है। बाबूलाल, रामलाल, कल्लू, रामू, हेकड़, छोटेलाल, सचिन, हरिराम, मनोज आदि ने बताया कि सामुदायिक शौचालय के आसपास रहने वाले लगभग तीन दर्जन परिवारों के पास अपना शौचालय नहीं है। सामुदायिक शौचालय का निर्माण होने से लोगों में आस जगी थी कि अब खुले में शौच से मुक्ति मिल जाएगी, पर ऐसा नहीं हुआ। लोगों ने बताया कि लगभग दो वर्ष पूर्व बनाए गए शौचालय मुश्किल से आठ दस दिन के लिए खुला है। कभी किसी अधिकारी के आने पर शौचालय का ताला खोल दिया जाता है। साफ सफाई भी कर दी जाती है। बाद में फिर ताला बंद कर दिया जाता है। लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी योजना के मकसद से गरीब वंचित हैं। अगर सामुदायिक शौचालय नियमित खुले तो लोग उसी में शौच के लिए जाएंगे। शौचालय के आसपास सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। स्थानीय निवासियों ने सामुदायिक शौचालय का ताला खुलवाने की मांग जिला प्रशासन से की है।
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