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मौसम के अचानक बदलते ही तेज हवाओं के साथ हुई बूंदाबादी
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बारिश से भीगा रास्ता
- फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। बृहस्पतिवार की शाम को मौसम अचानक बदलाव आ गया और तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी हुई। अधिक समय तक बरसात न होने व हवाएं नहीं चलने के कारण फसलों को राहत रही।
सुबह से ही तेज धूप निकली हुई थी। दोपहर बाद आसमान में हल्के बादल छा गए। शाम होते- होते बादल गरजने लगे। करीब पांच बजे भगवान भास्कर बादलों से ढक गए और कुछ ही देर में तेज हवाएं चलने लगीं। इसके बाद हल्की बूंदा-बादी हो गई। बूंदाबादी अधिक देर तक नहीं हुई। केवल पक्की सड़कें ही गीली हो सकीं। अधिक समय तक बरसात न होने और तेज हवा न चलने से रबी की फसल को कोई नुकसान नहीं हुआ।
वर्तमान में अधिकांश फसलें कटाई की स्थिति में है। चना व मटर की कुछ फसल की थ्रेसिंग हो चुकी है। कहीं-कहीं थ्रेसर की तैयारियां चल रहीं हैं। देर से बोई गई गेहूं की फसल में कुछ क्षेत्रों में पानी की मांग की जा रही है। जिन क्षेत्रों में पानी है, वहां पर सिंचाई चल रही हैं।
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शाम को आसमान में बादल छाए होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि कहीं बरसात न हो जाए। बूंदाबांदी से सड़कें भींग गईं। लेकिन मौसम अब भी साफ नहीं हो सका है।
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अधिकांश दलहनी फसलों की थ्रेसिंग हो चुकी है। हवाएं व हल्की बूंदाबांदी से फसलों को कोई नुकसान नहीं है।
- संतोष कुमार सविता
उप कृषि निदेशक
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सुबह से ही तेज धूप निकली हुई थी। दोपहर बाद आसमान में हल्के बादल छा गए। शाम होते- होते बादल गरजने लगे। करीब पांच बजे भगवान भास्कर बादलों से ढक गए और कुछ ही देर में तेज हवाएं चलने लगीं। इसके बाद हल्की बूंदा-बादी हो गई। बूंदाबादी अधिक देर तक नहीं हुई। केवल पक्की सड़कें ही गीली हो सकीं। अधिक समय तक बरसात न होने और तेज हवा न चलने से रबी की फसल को कोई नुकसान नहीं हुआ।
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वर्तमान में अधिकांश फसलें कटाई की स्थिति में है। चना व मटर की कुछ फसल की थ्रेसिंग हो चुकी है। कहीं-कहीं थ्रेसर की तैयारियां चल रहीं हैं। देर से बोई गई गेहूं की फसल में कुछ क्षेत्रों में पानी की मांग की जा रही है। जिन क्षेत्रों में पानी है, वहां पर सिंचाई चल रही हैं।
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शाम को आसमान में बादल छाए होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि कहीं बरसात न हो जाए। बूंदाबांदी से सड़कें भींग गईं। लेकिन मौसम अब भी साफ नहीं हो सका है।
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अधिकांश दलहनी फसलों की थ्रेसिंग हो चुकी है। हवाएं व हल्की बूंदाबांदी से फसलों को कोई नुकसान नहीं है।
- संतोष कुमार सविता
उप कृषि निदेशक