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धर्मध्वजा व चातुर्मास कलश जिनालयों में हुए स्थापित
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धर्मध्वजा लेकर चलते हुए श्रावकगण
- फोटो : LALITPUR
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मड़ावरा। वर्णीनगर में चातुर्मासरत आचार्य श्रेष्ठ 108 विद्यासागर महाराज की परम प्रभावक शिष्या आर्यिका रत्न अंतरमति ने कहा कि चातुर्मास का समय धर्म साधना का होता है, इसमें साधुओं के साथ-साथ श्रावकों को भी धर्म साधना करने का मौका मिलता है। इस मौके पर धर्मध्वजा व चातुर्मास कलश जिनालयों में स्थापित किए गए।
कार्यक्रम में अनुग्रहमति, अक्षयमति, निर्मदमति, ध्यानमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में प्रात:काल श्री 1008 महावीर जिनालय से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में श्रावकगण मंगल कलश एवं धर्मध्वजा लेकर चल रहे थे। जिसमें नगर के ग्यारह जिनबिंबों में पुण्यार्जक परिवारों द्वारा चातुर्मास कलश स्थापना के दिन लिए गए मंगल कलशों को मंदिरों में स्थापित किया गया। मंदिरों के प्रबंधक, अध्यक्ष एवं मंत्री ने धर्मध्वजा को मंदिर के शिखर पर लगाया। कार्यक्रम देवेंद्र जैन शास्त्री एवं संतोष जैन शास्त्री गृहपति श्री महावीर दिगंबर जैन संस्कृत विद्यालय साढूमल के निर्देशन में आयोजित किए गए।
शोभायात्रा में जैन युवा जागृति सेवा संघ,नेमिनाथ सेवा संघ, णमोकार सेवा संघ के दिव्यघोष का विशेष सराहनीय योगदान रहा। भव्य शोभायात्रा नगर के जिनालयों में दर्शन करते हुए श्री महावीर विद्या विहार परिसर में पहुंची जहां पर आर्यिका रत्न अंतरमति माता जी ने धर्मसभा में कहा कि चातुर्मास के समय साधुगण चार माह धार्मिक क्रियाओं के साथ साधना करते हैं। चातुर्मास का समय धर्म साधना का होता है। जिसमें साधुओं के साथ-साथ श्रावकों को भी धर्म साधना करने का मौका मिलता है। आज नगर के जिनालयों के शिखरों पर धर्मध्वजा को लगाया गया है। यह धर्म ध्वजा युगों- युगों तक फहराती रहे और विश्व में कोरोना महामारी समाप्त हो। इस दौरान जैन समाज मडावरा के अलावा क्षेत्रीय जैन धर्मानुलंबी मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में अनुग्रहमति, अक्षयमति, निर्मदमति, ध्यानमति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में प्रात:काल श्री 1008 महावीर जिनालय से शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में श्रावकगण मंगल कलश एवं धर्मध्वजा लेकर चल रहे थे। जिसमें नगर के ग्यारह जिनबिंबों में पुण्यार्जक परिवारों द्वारा चातुर्मास कलश स्थापना के दिन लिए गए मंगल कलशों को मंदिरों में स्थापित किया गया। मंदिरों के प्रबंधक, अध्यक्ष एवं मंत्री ने धर्मध्वजा को मंदिर के शिखर पर लगाया। कार्यक्रम देवेंद्र जैन शास्त्री एवं संतोष जैन शास्त्री गृहपति श्री महावीर दिगंबर जैन संस्कृत विद्यालय साढूमल के निर्देशन में आयोजित किए गए।
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शोभायात्रा में जैन युवा जागृति सेवा संघ,नेमिनाथ सेवा संघ, णमोकार सेवा संघ के दिव्यघोष का विशेष सराहनीय योगदान रहा। भव्य शोभायात्रा नगर के जिनालयों में दर्शन करते हुए श्री महावीर विद्या विहार परिसर में पहुंची जहां पर आर्यिका रत्न अंतरमति माता जी ने धर्मसभा में कहा कि चातुर्मास के समय साधुगण चार माह धार्मिक क्रियाओं के साथ साधना करते हैं। चातुर्मास का समय धर्म साधना का होता है। जिसमें साधुओं के साथ-साथ श्रावकों को भी धर्म साधना करने का मौका मिलता है। आज नगर के जिनालयों के शिखरों पर धर्मध्वजा को लगाया गया है। यह धर्म ध्वजा युगों- युगों तक फहराती रहे और विश्व में कोरोना महामारी समाप्त हो। इस दौरान जैन समाज मडावरा के अलावा क्षेत्रीय जैन धर्मानुलंबी मौजूद रहे।

जिनबिंबों के दर्शन के लिए जाता आर्यिका संघ- फोटो : LALITPUR
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