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संसुआ में खुदाई में मिली वर्षों पुरानी नंदी की प्रतिमा
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बार/ललितपुर। कस्बा बार से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अमरनाथ झूमर नाथ मंदिर के पास ग्राम संसुआ के बड़े तालाब के निकट खुदाई में भगवान शिव के गण नंदी की सैकड़ों वर्ष पुरानी मूर्ति मिली है। यह मूर्ति चंदेल कालीन वंश बताई जा रही है। उधर, खुदाई में मूर्ति मिलने की जानकारी पाते ही मौके पर लोगों की भीड़ गई। लोगों के अनुसार यहां पर पुराने मंदिरों के स्थान पर नए मंदिर का निर्माण करने के लिए खुदाई चल रही है। फिलहाल मूर्ति को एक पुराने मंदिर में रख कर पूजा की जा रही है। महंत का कहना है कि जहां से मूर्ति मिली है। उसी स्थान पर बन रहे मंदिर में नंदी महाराज को स्थापित किया जाएगा।
पिछले दिनों झूमरनाथ मंदिर के महंत चंद्रशेखर दास महाराज की अगुवाई में अक्षय तृतीया के दिन मां दुर्गा के मंदिर के निर्माण के लिए यहां भूमि पूजन किया गया था। ऐसा बताया गया कि इस स्थान पर पहले बहुत मंदिर हुआ करते थे। समय के साथ मंदिरों की देखभाल नहीं हुई और मंदिर खंडहर में तब्दील हो गए। उस स्थान को पुन: रमणीक बनाने के उद्देश्य से इन दिनों मंदिर निर्माण के लिए यहां पर खुदाई का कार्य चल रहा है। इस दौरान जब मजदूर एक मंदिर की नींव की खुदाई कर रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि जमीन के तीन-चार फुट नीचे शिव जी के गण नंदी की मूर्ति है। यह मूर्ति अति सुंदर और सैकड़ों वर्ष पुरानी है। इस सूचना को पाकर लोगों की भीड़ लग गई। इतिहासकारों का कहना है कि संसुआ के बड़े तालाब पर पहले बहुत से मंदिर थे और यह स्थान सुंदर एवं रमणीक हुआ करता था। यहां घने जंगल होने से लोग पलायन कर गए। इस कारण उस ओर किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। नंदी की मूर्ति मिलने के बाद लोगों को यहां भगवान शिव जी के मंदिर होने के ठोस सबूत मिले हैं।
बड़े तालाब पर भगवान नंदी की मूर्ति मिली है। यहां आसपास के ग्रामों के लोग मंदिर का निर्माण करा रहे हैं। अब बड़े तालाब को पुन: रमणीक स्थल के रूप में परिवर्तित करेंगे।
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भगवान सिंह बुंदेला, ग्राम संसुआ रजपुरा
मूर्ति बहुत ही सुंदर है। नंदी की मूर्ति मिलने के बाद लोगों को यहां भगवान शिव जी के मंदिर होने के प्रमाण हैं। यहां मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। सन्त ओमकार दास महाराज
संसुआ गांव की ओर क्षेत्र वासियों के आग्रह पर खुदाई की गई। जिसमें श्री नंदी भगवान की दिव्य मूर्ति प्राप्त की गई। इस मूर्ति के दर्शन का तांता लगा हुआ है। इसी स्थल से खुदाई के दौरान और भी दिव्य मूर्तियां पाने की संभावना है। चंद्रशेखर दास महाराज
पूर्वज लोग बताते थे कि बड़े तालाब पर बहुत सुंदर नक्काशी वाले मंदिर हुआ करते थे लेकिन उन मंदिरों में मूर्तियां नहीं थी, यह तालाब सदियों पुराना है। समय के साथ मंदिरों का रखरखाव नहीं हो पा रहा है। मुगल शासन काल में मूर्तियों को नष्ट होने से बचाने के उद्देश्य से उस समय जमीन खोदकर मूर्तियों को जमीन के नीचे दबा दिया होगा, जिसका प्रमाण आज खुदाई में मिल गया है।
कुंजन सिंह बुंदेला
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पिछले दिनों झूमरनाथ मंदिर के महंत चंद्रशेखर दास महाराज की अगुवाई में अक्षय तृतीया के दिन मां दुर्गा के मंदिर के निर्माण के लिए यहां भूमि पूजन किया गया था। ऐसा बताया गया कि इस स्थान पर पहले बहुत मंदिर हुआ करते थे। समय के साथ मंदिरों की देखभाल नहीं हुई और मंदिर खंडहर में तब्दील हो गए। उस स्थान को पुन: रमणीक बनाने के उद्देश्य से इन दिनों मंदिर निर्माण के लिए यहां पर खुदाई का कार्य चल रहा है। इस दौरान जब मजदूर एक मंदिर की नींव की खुदाई कर रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि जमीन के तीन-चार फुट नीचे शिव जी के गण नंदी की मूर्ति है। यह मूर्ति अति सुंदर और सैकड़ों वर्ष पुरानी है। इस सूचना को पाकर लोगों की भीड़ लग गई। इतिहासकारों का कहना है कि संसुआ के बड़े तालाब पर पहले बहुत से मंदिर थे और यह स्थान सुंदर एवं रमणीक हुआ करता था। यहां घने जंगल होने से लोग पलायन कर गए। इस कारण उस ओर किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। नंदी की मूर्ति मिलने के बाद लोगों को यहां भगवान शिव जी के मंदिर होने के ठोस सबूत मिले हैं।
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बड़े तालाब पर भगवान नंदी की मूर्ति मिली है। यहां आसपास के ग्रामों के लोग मंदिर का निर्माण करा रहे हैं। अब बड़े तालाब को पुन: रमणीक स्थल के रूप में परिवर्तित करेंगे।
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भगवान सिंह बुंदेला, ग्राम संसुआ रजपुरा
मूर्ति बहुत ही सुंदर है। नंदी की मूर्ति मिलने के बाद लोगों को यहां भगवान शिव जी के मंदिर होने के प्रमाण हैं। यहां मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। सन्त ओमकार दास महाराज
संसुआ गांव की ओर क्षेत्र वासियों के आग्रह पर खुदाई की गई। जिसमें श्री नंदी भगवान की दिव्य मूर्ति प्राप्त की गई। इस मूर्ति के दर्शन का तांता लगा हुआ है। इसी स्थल से खुदाई के दौरान और भी दिव्य मूर्तियां पाने की संभावना है। चंद्रशेखर दास महाराज
पूर्वज लोग बताते थे कि बड़े तालाब पर बहुत सुंदर नक्काशी वाले मंदिर हुआ करते थे लेकिन उन मंदिरों में मूर्तियां नहीं थी, यह तालाब सदियों पुराना है। समय के साथ मंदिरों का रखरखाव नहीं हो पा रहा है। मुगल शासन काल में मूर्तियों को नष्ट होने से बचाने के उद्देश्य से उस समय जमीन खोदकर मूर्तियों को जमीन के नीचे दबा दिया होगा, जिसका प्रमाण आज खुदाई में मिल गया है।
कुंजन सिंह बुंदेला