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जनपद में पर्यटन का मुख्य केंद्र रहा ‘चन्दन वन’ खोता जा रहा अपनी पहचान
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सुंदरता के लिए प्रसिंद्ध चंदनव
- फोटो : LALITPUR
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पुलवारा/ललितपुर। अपनी सुंदरता और नाम के बलबूते दूर-दूर तक प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका चंदन वन पर्यटन विभाग की उदासीनता के कारण गुमनामी का शिकार हो गया है। ललितपुर जिले को प्राकृतिक सुंदरता के क्षेत्र में पहचान दिलाने में चंदन वन का विशेष महत्व रहा है, लेकिन आज के समय में उक्त चंदन वन अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है।
जिले के कस्बा बार स्थित चंदन वन पांच हेक्टेयर की जमीन में फैला है। यह एकमात्र ऐसा वन है, जिसमें चंदन के पेड़ हैं। 25 वर्ष पूर्व इस वन में दूरदर्शन के प्रसिद्ध धारावाहिक ‘मुझे चांद चाहिए’ की शूटिंग हो चुकी है। एक समय ऐसा था जब यहां बड़ी तादाद में दूर दराज से सैलानी आते थे। वन में हजारों चंदन के पेड़ों के अलावा कई अन्य प्रजातियों के पेड़ मौजूद थे। वर्तमान में विभाग की उदासीनता ने चंदन के बेशकीमती पेड़ों को अराजकतत्वों ने ठिकाने लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। साथ ही चंदन के अलावा शीशम, अर्जुन की छाल जो दवाओं के निर्माण में विशेष काम आते हैं, उनका भी दोहन किया गया।
वन्य जीवों की प्रजातियां भी हैं इस वन में
चंदन वन में बड़ी संख्या में हिरन, बारहसिंघा, मोर, चीतल, बंदर, नीलगाय आदि कई प्रजातियों के जानवर मौजूद थे। आज उनकी संख्या कागजों में भले ही कुछ और हो, लेकिन हकीकत में उनकी संख्या दहाई का अंक भी पार नहीं कर पा रही है। गौर करने वाली एक बात ये भी है कि जिले में पर्यटन स्थलों की पैरवी करने वाले एवं ‘टूरिज्म माय पैशन’ के बलबूते अपनी पहचान बनाने वाले कुछ व्यक्तियों जिन्होंने जिले के कई स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कराने में बढ़ चढ़ कर पैरवी की, लेकिन जिले का इकलौते सुंदरता का दूसरा नाम ‘चंदन वन’ को उजड़ते देख भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। इस ओर किसी भी व्यक्ति का ध्यान नहीं गया। शासन द्वारा चंदन वन के रख-रखाव के लिये लाखों रुपये भेजे गए। लेकिन जिम्मेदार कर्मचारियों ने पैसों को कागजों में दर्शाकर और वन में खानापूर्ति कर पैसों को डकार लिया। दूसरी ओर हिरन बारह सिंघा, मोर आदि जानवर भी खत्म होने की स्थिति में पहुंच गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर चंदन वन को फिर से सही तरीके से रखरखाव कर पुन: पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए तो यहां पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। इससे यहां के स्थानीय निवासियों को रोजगार भी मिल जाएगा।
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‘नहीं है पर्यटन के जानकारों का ध्यान’
जनपद के विभिन्न पर्यटन स्थल दशावतार मंदिर, देवगढ़ मंदिर, रणछोरधाम मंदिर आदि को पर्यटन स्थल बनाए जाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, लेकिन चंदन वन की उपेक्षा की जा रही है। ऐसे में जिले में पर्यटन के समझ रखने वालों की सोच, लोगों की समझ से परे है।
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जिले के कस्बा बार स्थित चंदन वन पांच हेक्टेयर की जमीन में फैला है। यह एकमात्र ऐसा वन है, जिसमें चंदन के पेड़ हैं। 25 वर्ष पूर्व इस वन में दूरदर्शन के प्रसिद्ध धारावाहिक ‘मुझे चांद चाहिए’ की शूटिंग हो चुकी है। एक समय ऐसा था जब यहां बड़ी तादाद में दूर दराज से सैलानी आते थे। वन में हजारों चंदन के पेड़ों के अलावा कई अन्य प्रजातियों के पेड़ मौजूद थे। वर्तमान में विभाग की उदासीनता ने चंदन के बेशकीमती पेड़ों को अराजकतत्वों ने ठिकाने लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। साथ ही चंदन के अलावा शीशम, अर्जुन की छाल जो दवाओं के निर्माण में विशेष काम आते हैं, उनका भी दोहन किया गया।
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वन्य जीवों की प्रजातियां भी हैं इस वन में
चंदन वन में बड़ी संख्या में हिरन, बारहसिंघा, मोर, चीतल, बंदर, नीलगाय आदि कई प्रजातियों के जानवर मौजूद थे। आज उनकी संख्या कागजों में भले ही कुछ और हो, लेकिन हकीकत में उनकी संख्या दहाई का अंक भी पार नहीं कर पा रही है। गौर करने वाली एक बात ये भी है कि जिले में पर्यटन स्थलों की पैरवी करने वाले एवं ‘टूरिज्म माय पैशन’ के बलबूते अपनी पहचान बनाने वाले कुछ व्यक्तियों जिन्होंने जिले के कई स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कराने में बढ़ चढ़ कर पैरवी की, लेकिन जिले का इकलौते सुंदरता का दूसरा नाम ‘चंदन वन’ को उजड़ते देख भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। इस ओर किसी भी व्यक्ति का ध्यान नहीं गया। शासन द्वारा चंदन वन के रख-रखाव के लिये लाखों रुपये भेजे गए। लेकिन जिम्मेदार कर्मचारियों ने पैसों को कागजों में दर्शाकर और वन में खानापूर्ति कर पैसों को डकार लिया। दूसरी ओर हिरन बारह सिंघा, मोर आदि जानवर भी खत्म होने की स्थिति में पहुंच गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर चंदन वन को फिर से सही तरीके से रखरखाव कर पुन: पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए तो यहां पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो जाएगी। इससे यहां के स्थानीय निवासियों को रोजगार भी मिल जाएगा।
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‘नहीं है पर्यटन के जानकारों का ध्यान’
जनपद के विभिन्न पर्यटन स्थल दशावतार मंदिर, देवगढ़ मंदिर, रणछोरधाम मंदिर आदि को पर्यटन स्थल बनाए जाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, लेकिन चंदन वन की उपेक्षा की जा रही है। ऐसे में जिले में पर्यटन के समझ रखने वालों की सोच, लोगों की समझ से परे है।