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बारिश न होने से बढ़ी किसानों की चिंता
amarujala
Updated Mon, 09 Jul 2018 12:36 AM IST
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former, lalitpur news
- फोटो : amar ujala, lalitpur news
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सूखे की मार झेल रहे जिले के किसानों की मुसीबतें कम नहीं हो पा रही हैं। खरीफ सीजन में अच्छे मानसून की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन इस बार मानसून ने फिर से गच्चा दे दिया है। जिन किसानों ने प्री मानसून की बारिश में उड़द, मूंग व मक्का की खेतों में बुवाई कर दी है, उन्हें अब बारिश न होने से फसलों को बचाना मुश्किल हो रहा है। किसानों द्वारा खेतों में डाले गए बीज अंकुरित तो हुए, लेकिन मिट्टी में नमी न होने की वजह से वह बाहर नहीं निकल पाए।
बुंदेलखंड के किसान से मानो इंद्रदेवता रूठ गए हैं। बीते कई वर्षों से यहां के किसान देवीय आपदाओं से जूझ रहे हैं। कभी अतिवृष्टि, ओलावृष्टि तो पिछले साल से किसान सूखे की मार झेल रहे हैं। मौजूदा सीजन में मौसम विज्ञान के अनुसार सामान्य बारिश की संभावना थी। यही नहीं, समय से मानसून सक्रिय होने का भी अनुमान लगाया गया था। मानसून के बारे में पूर्वानुमान से किसान काफी उत्साहित थे। लेकिन, मौसम विज्ञान केंद्र के दावे झूठे साबित हुए हैं। जिले में अब तक मानसून सक्रिय नहीं हो सका है। केवल प्री मानसून की बारिश हुई है जो न के बराबर रही है। जिससे खरीफ फसल पर सूखे के बादल मंडराने लगे हैं। जिन किसानों ने प्री मानसून की बारिश में उड़द, मूंग, तिल, मक्का की बुवाई कर दी है, उन्हें फसल बरबाद होने की चिंता सताने लगी है। कुछ किसानों ने बारिश होने की आस में सूखे खेतों में बीज डाल रखे हैं तो कइयों के खेतों में बीज का अंकुरण हुआ, लेकिन वे पौधे का रूप नहीं ले पाए हैं।
मिट्टी में नमी के कम होने से बीज का अंकुरण वहीं सिमटकर रह गया है। बहुत कम ही किसानों के खेतों में पौधे नजर आ रहे हैं। जिले में चालीस फीसदी किसान अभी भी बारिश की आस में बुवाई के इंतजार में बैठे है। कुछ किसान खेतों को जोतने में लगे हैं तो कई तैयार खेतों में बीज डालने को लेकर दुविधा में फंसे हुए हैं। वह निर्णय नहीं ले पा रहे हैं कि पहले बारिश हो जाने दे, उसके बाद बुवाई करें या सूखे खेतों में बीज डाल दे। इसके बाद भी किसान इंद्रदेवता के मेहरबान होने का सपना संजोये बैठे है।
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सोयाबीन की खेती से बचें किसान
जिन किसानों ने खेतों में बुवाई कर दी है, वे पौधों में लगने वाले रोगों पर नजर रखे। जैसे ही पौधों में रोग दिखाई देने लगे, वैसे ही उनमें कीटनाशक दवा डालना शुरू कर दें। इस मौसम में रोग लगने की संभावना ज्यादा रहती है। जो बुवाई करने से रह गए हैं, वे अभी बारिश होने तक रुक जाए। मूंगफली व सोयाबीन की खेती करने से बचें। इन फसलों में किसान को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, साथ ही खर्चा भी अधिक होता है। इसलिए उड़द व तिल की बुवाई पर ही ध्यान दें। उड़द फसल सत्तर दिन में ही तैयार हो जाती है। बारिश होने की संभावना अभी बरकरार है, इसलिए किसान को ज्यादा हड़बड़ाहट करने की जरूरत नहीं है।
एकेएस चौहान
सहायक निदेशक
कृषि विज्ञान केंद्र खिरियामिश्र
अड़तालीस घंटे में बारिश का अनुमान
कृषि विज्ञान केंद्र के सहायक निदेशक एकेएस चौहान का कहना है कि अड़तालीस घंटे में बारिश होने का अनुमान लगाया जा रहा है। बारिश के दौरान खेतों में जल भराव की स्थिति बन जाती है, ऐसे में फसल खराब होने की संभावना रहती है। किसान इससे निपटने के लिए अभी से तैयारी कर लें।
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बुंदेलखंड के किसान से मानो इंद्रदेवता रूठ गए हैं। बीते कई वर्षों से यहां के किसान देवीय आपदाओं से जूझ रहे हैं। कभी अतिवृष्टि, ओलावृष्टि तो पिछले साल से किसान सूखे की मार झेल रहे हैं। मौजूदा सीजन में मौसम विज्ञान के अनुसार सामान्य बारिश की संभावना थी। यही नहीं, समय से मानसून सक्रिय होने का भी अनुमान लगाया गया था। मानसून के बारे में पूर्वानुमान से किसान काफी उत्साहित थे। लेकिन, मौसम विज्ञान केंद्र के दावे झूठे साबित हुए हैं। जिले में अब तक मानसून सक्रिय नहीं हो सका है। केवल प्री मानसून की बारिश हुई है जो न के बराबर रही है। जिससे खरीफ फसल पर सूखे के बादल मंडराने लगे हैं। जिन किसानों ने प्री मानसून की बारिश में उड़द, मूंग, तिल, मक्का की बुवाई कर दी है, उन्हें फसल बरबाद होने की चिंता सताने लगी है। कुछ किसानों ने बारिश होने की आस में सूखे खेतों में बीज डाल रखे हैं तो कइयों के खेतों में बीज का अंकुरण हुआ, लेकिन वे पौधे का रूप नहीं ले पाए हैं।
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मिट्टी में नमी के कम होने से बीज का अंकुरण वहीं सिमटकर रह गया है। बहुत कम ही किसानों के खेतों में पौधे नजर आ रहे हैं। जिले में चालीस फीसदी किसान अभी भी बारिश की आस में बुवाई के इंतजार में बैठे है। कुछ किसान खेतों को जोतने में लगे हैं तो कई तैयार खेतों में बीज डालने को लेकर दुविधा में फंसे हुए हैं। वह निर्णय नहीं ले पा रहे हैं कि पहले बारिश हो जाने दे, उसके बाद बुवाई करें या सूखे खेतों में बीज डाल दे। इसके बाद भी किसान इंद्रदेवता के मेहरबान होने का सपना संजोये बैठे है।
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सोयाबीन की खेती से बचें किसान
जिन किसानों ने खेतों में बुवाई कर दी है, वे पौधों में लगने वाले रोगों पर नजर रखे। जैसे ही पौधों में रोग दिखाई देने लगे, वैसे ही उनमें कीटनाशक दवा डालना शुरू कर दें। इस मौसम में रोग लगने की संभावना ज्यादा रहती है। जो बुवाई करने से रह गए हैं, वे अभी बारिश होने तक रुक जाए। मूंगफली व सोयाबीन की खेती करने से बचें। इन फसलों में किसान को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, साथ ही खर्चा भी अधिक होता है। इसलिए उड़द व तिल की बुवाई पर ही ध्यान दें। उड़द फसल सत्तर दिन में ही तैयार हो जाती है। बारिश होने की संभावना अभी बरकरार है, इसलिए किसान को ज्यादा हड़बड़ाहट करने की जरूरत नहीं है।
एकेएस चौहान
सहायक निदेशक
कृषि विज्ञान केंद्र खिरियामिश्र
अड़तालीस घंटे में बारिश का अनुमान
कृषि विज्ञान केंद्र के सहायक निदेशक एकेएस चौहान का कहना है कि अड़तालीस घंटे में बारिश होने का अनुमान लगाया जा रहा है। बारिश के दौरान खेतों में जल भराव की स्थिति बन जाती है, ऐसे में फसल खराब होने की संभावना रहती है। किसान इससे निपटने के लिए अभी से तैयारी कर लें।