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Lalitpur News: शालीनता के साथ धैर्य भी जरूरी

Fri, 31 May 2024 04:23 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 31 May 2024 04:23 AM IST
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Along with decency, patience is also necessary
संवाद न्यूज एजेंसी
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डोंगराखुर्द (ललितपुर)। प्रयाग पीठाधीश्वर जगत गुरु शंकराचार्य ओंकारानंद सरस्वती महाराज ने बृहस्पतिवार को श्रीराम विवाह की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सीता जी जब पुष्प वाटिका में फूल तोड़ने जाती हैं, उसी समय फुलवारी में भगवान श्रीराम के दर्शन होते हैं। सीता जी की नजर जैसे श्रीराम पर पड़ती है, वह मोहित हो जाती हैं। इधर, भगवान श्रीराम को सीता के पैरों में पहने गए नूपुरों की आवाज मोहित करती है। सीता जी माता गौरी की पूजा करते समय अपने वर के रूप में श्रीराम को मांगती हैं। वह बृहस्पतिवार को नाराहट कस्बा में श्रीराम कथा का वर्णन कर रहे थे।

कथा व्यास ने कहा कि सीता स्वयंवर के दौरान महाराज जनक घोषणा करते हैं कि जो राजा भगवान शिव के धनुष की प्रत्यंचा चढ़ा देगा, उससे वह सीता का विवाह करेंगे। स्वयंवर में मौजूद कई राजाओं ने धनुष में प्रत्यंचा चढ़ाने की कोशिश की, लेकिन कोई भी राजा धनुष को हिला न सका। यह देख जनक विलाप करते हुए भूमि वीरों से खाली होने की बात कहते हैं। सभा में बैठे लक्ष्मण को यह बात पसंद नहीं आती। वह क्रोध में आ जाते हैं। विश्वामित्र भगवान राम को इशारा करते हैं कि धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाकर वीरता का परिचय दें।
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पल भर में राम धनुष को दो खंडों में कर देते हैं। सीता श्रीराम के गले में जयमाला डालती हैं। शिव धनुष की गर्जना सुनकर महेंद्र गिरि पर्वत पर तपस्या कर रहे भगवान परशुराम क्रोध में जनकपुरी पहुंच जाते हैं। वह सभी राजाओं को सचेत करते हुए कहते हैं कि जिसने भी शिव धनुष तोड़ा हो वह सामने आ जाए। भगवान राम विनयपूर्वक कहते हैं कि नाथ शंभु धन भंजन हारा होइहै कोउ एक दास तुम्हारा। जिसके बाद लक्ष्मण परशुराम संवाद शुरू होता है। विवाद बढ़ता देखकर भगवान राम परशुराम को अपने सुदर्शन स्वरूप का दर्शन कराते हैं। दर्शन के बाद भाव विह्वल परशुराम वापस महेंद्र गिरि पर्वत लौट जाते हैं। कथा व्यास ने कहा कि शालीनता के साथ धैर्य रखना भी जरूरी है। इस अवसर पर कृष्ण सखा उद्धव महाराज, पूर्व प्रधान हरेंद्र शाह, आशीष दुबे ओरछा धाम, कुलदीप खरे, प्रदीप त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।
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