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....जो सही तकलीफें वो सारी की सारी याद हैं
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ललितपुर। अमर उजाला कार्यालय में संवाद कार्यक्रम के तहत रविवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री की जयंती पर हुई काव्य संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें प्रबुद्ध वर्ग के लोगों में शिक्षक, समाजसेवी और शायर आदि ने भाग लेकर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ देश की आजादी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के योगदान पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला। कवि गणेश प्रसाद ने पक्तियां प्रस्तुत की, झूठों का शहर झूठ का दस्तूर हो गया, आइना टूटने पर मजबूर हो गया। चाहत ललितपुर ने पंक्तियां पेश की, मिलते हैं दोस्त अब भी कांटे बिछाने वाले, इस दौरे मुफलिसी में सब अजमाने वाले। कवि रमेश पाठक ने समाज में सदभावना एकता पर पक्तियां पेश की, मेरे भ्राताओं मुझे इतना बताइये, खून के रंग में फर्क हो तो समझाए। समाजसेवी सलमान कुरैशी ने पंक्तियां पेश की, मुझे तो एक छोटी सी बात का गौरव है मै हिंदुस्तान का हूं और हिंदुस्तान मेरा है। मासूम कौसर कव्वाल ने पक्तियां पेश की, हम अपने बुजुर्गो का जमाना नहीं भूले, दुश्मन को भी सीने से लगाना नहीं भूले।
अब्दुल रहमान ने पक्तियां पेश की, जुल्म होता था तो जंजीर हिला देते थे, अब तो होठ हिलाने से भी डर लगता है। भाजपा नेता डॉ प्रदीप चौबे ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल विहारी की पक्तियां पेश की, आओ फिर से दिया जलाए। वर्णी कॉलेज के सेवानिवृत प्रधानाचार्य एके श्रीवास्तव ने पक्तियां पेश की, इशारों से उनको बुलाना मना है,और रूठ जाए तो मनाना मना है। रामदयाल आजाद ने गीत वादे वफा खुलुस भुलाने लगे हैं लोग, रिश्ते मोहव्वतों के भुलाने लगे हैं लोग।
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जहीर ललितपुरी ने पंक्तियां पेश की, याद हैं कुर्बानियां बापू तुम्हारी याद है, जो सही तकलीफें वो सारी की सारी याद हैं। कार्यक्रम का संचालन कर रहे असर ललितपुरी ने पं क्तियां पेश की, कहां है फूलों का गुलस्ता, हमारा पहला हिंदुस्तान,वो प्यारा हिंदुस्तान। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे हाजी इकवाल बेग ने देश भक्ति से जुड़ी पंक्तियां पेश की। इस मौके पर बुंदेलखंड सेना के प्रमुख हरीश कपूर टीटू, सदाकत खां, अजय जैन, अरमान कुरैशी, जावेद अहमद, मोहम्मद इलियास, बृजमोहन संज्ञा, मनोज चौबे, स्वामी अनुराग अमर, हंसराज सिंह मोहम्मद नईम, पवन मोदी, रमेश पाठक, रवींद्र, शेख नत्थू आदि मौजूद थे।
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कार्यक्रम का शुभारंभ देश की आजादी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के योगदान पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला। कवि गणेश प्रसाद ने पक्तियां प्रस्तुत की, झूठों का शहर झूठ का दस्तूर हो गया, आइना टूटने पर मजबूर हो गया। चाहत ललितपुर ने पंक्तियां पेश की, मिलते हैं दोस्त अब भी कांटे बिछाने वाले, इस दौरे मुफलिसी में सब अजमाने वाले। कवि रमेश पाठक ने समाज में सदभावना एकता पर पक्तियां पेश की, मेरे भ्राताओं मुझे इतना बताइये, खून के रंग में फर्क हो तो समझाए। समाजसेवी सलमान कुरैशी ने पंक्तियां पेश की, मुझे तो एक छोटी सी बात का गौरव है मै हिंदुस्तान का हूं और हिंदुस्तान मेरा है। मासूम कौसर कव्वाल ने पक्तियां पेश की, हम अपने बुजुर्गो का जमाना नहीं भूले, दुश्मन को भी सीने से लगाना नहीं भूले।
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अब्दुल रहमान ने पक्तियां पेश की, जुल्म होता था तो जंजीर हिला देते थे, अब तो होठ हिलाने से भी डर लगता है। भाजपा नेता डॉ प्रदीप चौबे ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल विहारी की पक्तियां पेश की, आओ फिर से दिया जलाए। वर्णी कॉलेज के सेवानिवृत प्रधानाचार्य एके श्रीवास्तव ने पक्तियां पेश की, इशारों से उनको बुलाना मना है,और रूठ जाए तो मनाना मना है। रामदयाल आजाद ने गीत वादे वफा खुलुस भुलाने लगे हैं लोग, रिश्ते मोहव्वतों के भुलाने लगे हैं लोग।
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जहीर ललितपुरी ने पंक्तियां पेश की, याद हैं कुर्बानियां बापू तुम्हारी याद है, जो सही तकलीफें वो सारी की सारी याद हैं। कार्यक्रम का संचालन कर रहे असर ललितपुरी ने पं क्तियां पेश की, कहां है फूलों का गुलस्ता, हमारा पहला हिंदुस्तान,वो प्यारा हिंदुस्तान। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे हाजी इकवाल बेग ने देश भक्ति से जुड़ी पंक्तियां पेश की। इस मौके पर बुंदेलखंड सेना के प्रमुख हरीश कपूर टीटू, सदाकत खां, अजय जैन, अरमान कुरैशी, जावेद अहमद, मोहम्मद इलियास, बृजमोहन संज्ञा, मनोज चौबे, स्वामी अनुराग अमर, हंसराज सिंह मोहम्मद नईम, पवन मोदी, रमेश पाठक, रवींद्र, शेख नत्थू आदि मौजूद थे।