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डेंगू व स्वाइनफ्लू से निपटने को जिला तैयार नहीं
Updated Fri, 28 Jul 2017 01:14 AM IST
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डेंगू के डंक से निपटने को स्वास्थ्य महकमा तैयार नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। बारिश शुरू होते ही शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में गंदगी के कारण बीमारियां पांव पसारने लगी हैं। इनमें मलेरिया, डेंगू, चिकिन पॉक्स के अलावा दिमागी बुखार, उल्टी, दस्त शामिल हैं। मलेरिया, डेंगू व स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग अभी भी पूरी तरह से तैयार नहीं है। हालत यह कि डेंगू या स्वाइन फ्लू जैसी गंभीर बीमारियों की प्राथमिक जांच कर पुष्टि करने के इंतजाम भी जिला अस्पताल में नहीं हैं, इसके लिए भी एक मात्र सहारा झांसी मेडिकल कालेज है।
जिले में मानसून तो काफी पहले ही आ चुका है, लेकिन हल्की बारिश ही हो रही है। इसके साथ ही कई प्रकार की बीमारियां भी फैलने लगी हैं। इसे देखते हुए शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा इनकी रोकथाम के उपाय करना तो शुरू कर दिए गए हैं, लेकिन डेंगू या स्वाइन फ्लू बीमारी होने के बाद इसकी जांच और इलाज की पूर्ण व्यवस्था जनपद में नहीं है। डेंगू के लक्षण पाए जाने पर एक मात्र जिला चिकित्सालय में प्राथमिक जांच की सुविधा कार्ड द्वारा तो उपलब्ध है, लेकिन इसके सीरम या एलीसा की जांच की सुविधा यहां नहीं है। इसके लिए चिकित्सकों द्वारा ऐसे मरीजों को झांसी या फिर लखनऊ रेफर करना होता है। मलेरिया विभाग में इस महीने 9 हजार 929 मलेरिया की जांचें पूरे जनपद में की गईं। इसमें तीस मरीजों में प्लाज्मोडियम वाइवैक्स मलेरिया पोजीटिव मिला है। जबकि, पिछले महीने यह संख्या मात्र बीस ही थी। जिला अस्पताल में भी हर दिन करीब दस से बारह मलेरिया के लक्षण वाले मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें दो-तीन मरीजों में मलेरिया पॉजिटिव निकल रहा है। इस प्रकार हर दिन मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम के सर्वे में डेंगू वाहक मच्छरों के लार्वा भी मिल रहे हैं, जिससे लोगों में डेंगू होने की संभावना भी बढ़ गई है। वहीं, गत दिवस बानपुर थाना अंतर्गत एक गांव में चार वर्षीय बालिका की स्वाइन फ्लू से मौत की खबर से स्वास्थ्य विभाग सकते में आ गया था, हालांकि, उसकी पुष्टि नहीं हो सकी थी। लेकिन, क्या वास्तव में स्वास्थ्य विभाग स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए तैयार है। हकीकत यह है कि ललितपुर में स्वाइन फ्लू की प्राथमिक जांच के लिए तक स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। स्वाइन फ्लू की जांच के लिए जनपद से ऐसे लक्षण वाले मरीजों को अन्य जनपद के लिए रेफर करना मजबूरी हो जाता है।
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डेंगू वाहक मच्छरों के लार्वा मिलने पर 27 को नोटिस
ललितपुर। मलेरिया विभाग की लार्वा सर्वे टीम द्वारा नझाई बाजार, वाटरबॉक्स के पास जांच के दौरान डेंगू वाहक मच्छरों के लार्वा पाए जाने पर दो दिन में 25 गृह स्वामियों को नोटिस दिए हैं। डेढ़ सौ घरों में एडीज एजिप्टि लार्वा को साफ कराया गया है। अकेले बृहस्पतिवार को ही 64 घरों में 133 लार्वा स्रोतों को साफ कराया गया है। इसमें नझाई बाजार निवासी दो लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। जबकि इससे पूर्व भी टीम द्वारा शहर में चांदमारी व नेहरुनगर में सर्वे किया गया था। टीम द्वारा लोगों को पानी के मच्छर के लार्वा वाले स्रोतों का पानी हर रोज साफ करने और सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करने की सलाह दी गई, ताकि मलेरिया और डेंगू की बीमारियों से बचा जा सके। टीम में मलेरिया निरीक्षक हरिश्चंद्र नामदेव, कार्यालय सहायक लोकनाथ, इसरार खान व अशोक कुमार शामिल रहे।
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जिला अस्पताल में दस विस्तर की अतिरिक्त सुविधा
ललितपुर। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला अस्पताल में मलेरिया, डेंगूू या स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियां के मरीजों की भर्ती के लिए आइसोलेशन वार्ड में दस अतिरिक्त विस्तर की ही व्यवस्था की गई है। लेकिन, यदि इससे अधिक मरीज जिला अस्पताल में किसी दिन पहुंच जाएं, तो उन मरीजों को भर्ती करके जमीन पर लिटाना पड़ता है या फिर रेफर कर दिया जाता है।
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इनका कहना है-
मलेरिया विभाग व जिला अस्पताल में मलेरिया किट उपलब्ध है, लेकिन डेंगू की प्राथमिक जांच कार्ड किट व स्लाइड से किए जाने की व्यवस्था तो है, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए मरीज के सैंपल को झांसी जाकर की पुष्टि करानी होती है। स्वाइन फ्लू की जांच के लिए ललितपुर में कहीं भी जांच किट उपलब्ध नहीं है। ऐसे मरीजों को झांसी या लखनऊ की रेफर किया जाता है।
डा.के एस सिंह यादव, जिला मलेरिया अधिकारी।
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। बारिश शुरू होते ही शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में गंदगी के कारण बीमारियां पांव पसारने लगी हैं। इनमें मलेरिया, डेंगू, चिकिन पॉक्स के अलावा दिमागी बुखार, उल्टी, दस्त शामिल हैं। मलेरिया, डेंगू व स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग अभी भी पूरी तरह से तैयार नहीं है। हालत यह कि डेंगू या स्वाइन फ्लू जैसी गंभीर बीमारियों की प्राथमिक जांच कर पुष्टि करने के इंतजाम भी जिला अस्पताल में नहीं हैं, इसके लिए भी एक मात्र सहारा झांसी मेडिकल कालेज है।
जिले में मानसून तो काफी पहले ही आ चुका है, लेकिन हल्की बारिश ही हो रही है। इसके साथ ही कई प्रकार की बीमारियां भी फैलने लगी हैं। इसे देखते हुए शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा इनकी रोकथाम के उपाय करना तो शुरू कर दिए गए हैं, लेकिन डेंगू या स्वाइन फ्लू बीमारी होने के बाद इसकी जांच और इलाज की पूर्ण व्यवस्था जनपद में नहीं है। डेंगू के लक्षण पाए जाने पर एक मात्र जिला चिकित्सालय में प्राथमिक जांच की सुविधा कार्ड द्वारा तो उपलब्ध है, लेकिन इसके सीरम या एलीसा की जांच की सुविधा यहां नहीं है। इसके लिए चिकित्सकों द्वारा ऐसे मरीजों को झांसी या फिर लखनऊ रेफर करना होता है। मलेरिया विभाग में इस महीने 9 हजार 929 मलेरिया की जांचें पूरे जनपद में की गईं। इसमें तीस मरीजों में प्लाज्मोडियम वाइवैक्स मलेरिया पोजीटिव मिला है। जबकि, पिछले महीने यह संख्या मात्र बीस ही थी। जिला अस्पताल में भी हर दिन करीब दस से बारह मलेरिया के लक्षण वाले मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें दो-तीन मरीजों में मलेरिया पॉजिटिव निकल रहा है। इस प्रकार हर दिन मलेरिया के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीम के सर्वे में डेंगू वाहक मच्छरों के लार्वा भी मिल रहे हैं, जिससे लोगों में डेंगू होने की संभावना भी बढ़ गई है। वहीं, गत दिवस बानपुर थाना अंतर्गत एक गांव में चार वर्षीय बालिका की स्वाइन फ्लू से मौत की खबर से स्वास्थ्य विभाग सकते में आ गया था, हालांकि, उसकी पुष्टि नहीं हो सकी थी। लेकिन, क्या वास्तव में स्वास्थ्य विभाग स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए तैयार है। हकीकत यह है कि ललितपुर में स्वाइन फ्लू की प्राथमिक जांच के लिए तक स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। स्वाइन फ्लू की जांच के लिए जनपद से ऐसे लक्षण वाले मरीजों को अन्य जनपद के लिए रेफर करना मजबूरी हो जाता है।
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डेंगू वाहक मच्छरों के लार्वा मिलने पर 27 को नोटिस
ललितपुर। मलेरिया विभाग की लार्वा सर्वे टीम द्वारा नझाई बाजार, वाटरबॉक्स के पास जांच के दौरान डेंगू वाहक मच्छरों के लार्वा पाए जाने पर दो दिन में 25 गृह स्वामियों को नोटिस दिए हैं। डेढ़ सौ घरों में एडीज एजिप्टि लार्वा को साफ कराया गया है। अकेले बृहस्पतिवार को ही 64 घरों में 133 लार्वा स्रोतों को साफ कराया गया है। इसमें नझाई बाजार निवासी दो लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। जबकि इससे पूर्व भी टीम द्वारा शहर में चांदमारी व नेहरुनगर में सर्वे किया गया था। टीम द्वारा लोगों को पानी के मच्छर के लार्वा वाले स्रोतों का पानी हर रोज साफ करने और सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करने की सलाह दी गई, ताकि मलेरिया और डेंगू की बीमारियों से बचा जा सके। टीम में मलेरिया निरीक्षक हरिश्चंद्र नामदेव, कार्यालय सहायक लोकनाथ, इसरार खान व अशोक कुमार शामिल रहे।
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जिला अस्पताल में दस विस्तर की अतिरिक्त सुविधा
ललितपुर। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला अस्पताल में मलेरिया, डेंगूू या स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियां के मरीजों की भर्ती के लिए आइसोलेशन वार्ड में दस अतिरिक्त विस्तर की ही व्यवस्था की गई है। लेकिन, यदि इससे अधिक मरीज जिला अस्पताल में किसी दिन पहुंच जाएं, तो उन मरीजों को भर्ती करके जमीन पर लिटाना पड़ता है या फिर रेफर कर दिया जाता है।
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इनका कहना है-
मलेरिया विभाग व जिला अस्पताल में मलेरिया किट उपलब्ध है, लेकिन डेंगू की प्राथमिक जांच कार्ड किट व स्लाइड से किए जाने की व्यवस्था तो है, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए मरीज के सैंपल को झांसी जाकर की पुष्टि करानी होती है। स्वाइन फ्लू की जांच के लिए ललितपुर में कहीं भी जांच किट उपलब्ध नहीं है। ऐसे मरीजों को झांसी या लखनऊ की रेफर किया जाता है।
डा.के एस सिंह यादव, जिला मलेरिया अधिकारी।