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सरकारी खरीद केंद्र हो सकते हैं बंद
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गेहूं ढुलाई की नहीं बनी सहमति
ललितपुर। गेहूं की सरकारी खरीद परवान नहीं चढ़ पाई कि माल की ढुलाई की जिम्मेदारी को लेकर सहकारी समितियों और पीसीएफ में सहमति नहीं बन सकी है। पीसीएफ भी ढुलाई से बच रहा है। ऐसे में अभी तय नहीं हो पाया है कि कौन गेहूं की ढुलाई करेगा।
जिले में गेहूं की खरीद के लिए 88 केंद्र खुले हैं। इसमें से 58 सहकारी समितियों के खरीद केंद्र हैं। गेहूं की खरीद में पीसीएफ और सहकारी समितियों का अनुबंध है कि 27 रुपये प्रति क्विंटल सहकारी समिति को दिया जाता है। खरीद के बाद गेहूं की डिलेवरी का दायित्व पीसीएफ का होता है, क्योंकि पीसीएफ के ठेकेदार ट्रकों के माध्यम से ढुलाई करते हैं। सहकारी समिति का न तो इतना बड़ा नेटवर्क होता है और न ही समितियों ने यह काम किया है, इसलिए वह इसके बारे में जानते भी नहीं हैं। अब तक लागू व्यवस्था के अनुसार पीसीएफ ही सहकारी समितियों के गोदाम से गेहूं इकट्ठा करता रहा है। लेकिन, अबकी बार पीसीएफ गेहूं की ढुलाई से बच रहा है। गेहूं की खरीद में सहकारी समितियों को 6.12 रुपये पल्लेदारी और 27 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन मिलता है। इसी से कर्मचारियों का वेतन मिलता है। सहकारी समितियों में अब तक पांच सौ क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है, अब समितियों को इसकी डिलीवरी करनी है, ताकि जगह खाली हो सके और अन्य किसानों से गेहूं खरीदा जा सके, लेकिन अब तक पीसीएफ ने अब तक सहमति नहीं दी है। इस कारण मामला अटका पड़ा है।
उधर, पीएसएफ के जिला प्रबंधक दिव्यांशु वर्मा का कहना है कि गेहूं उठान के लिए ठेकेदार टेंडर नहीं कर रहे हैं। प्रदेश भर में सहकारी समितियां ही गेहूं की उठान करती हैं। ललितपुर में अलग से नई व्यवस्था कैसे बनाई जा सकती है। सहकारी समितियों के सभी भुगतान भी कर दिए गए हैं। उन्हें इसमें सहयोग करना चाहिए। पूरे मामले से जिलाधिकारी को अवगत करा दिया है। डीएम मानवेंद्र सिंह ने कहा कि समस्या का समाधान जल्द निकाल लिया जाएगा।
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ललितपुर। गेहूं की सरकारी खरीद परवान नहीं चढ़ पाई कि माल की ढुलाई की जिम्मेदारी को लेकर सहकारी समितियों और पीसीएफ में सहमति नहीं बन सकी है। पीसीएफ भी ढुलाई से बच रहा है। ऐसे में अभी तय नहीं हो पाया है कि कौन गेहूं की ढुलाई करेगा।
जिले में गेहूं की खरीद के लिए 88 केंद्र खुले हैं। इसमें से 58 सहकारी समितियों के खरीद केंद्र हैं। गेहूं की खरीद में पीसीएफ और सहकारी समितियों का अनुबंध है कि 27 रुपये प्रति क्विंटल सहकारी समिति को दिया जाता है। खरीद के बाद गेहूं की डिलेवरी का दायित्व पीसीएफ का होता है, क्योंकि पीसीएफ के ठेकेदार ट्रकों के माध्यम से ढुलाई करते हैं। सहकारी समिति का न तो इतना बड़ा नेटवर्क होता है और न ही समितियों ने यह काम किया है, इसलिए वह इसके बारे में जानते भी नहीं हैं। अब तक लागू व्यवस्था के अनुसार पीसीएफ ही सहकारी समितियों के गोदाम से गेहूं इकट्ठा करता रहा है। लेकिन, अबकी बार पीसीएफ गेहूं की ढुलाई से बच रहा है। गेहूं की खरीद में सहकारी समितियों को 6.12 रुपये पल्लेदारी और 27 रुपये प्रति क्विंटल कमीशन मिलता है। इसी से कर्मचारियों का वेतन मिलता है। सहकारी समितियों में अब तक पांच सौ क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है, अब समितियों को इसकी डिलीवरी करनी है, ताकि जगह खाली हो सके और अन्य किसानों से गेहूं खरीदा जा सके, लेकिन अब तक पीसीएफ ने अब तक सहमति नहीं दी है। इस कारण मामला अटका पड़ा है।
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उधर, पीएसएफ के जिला प्रबंधक दिव्यांशु वर्मा का कहना है कि गेहूं उठान के लिए ठेकेदार टेंडर नहीं कर रहे हैं। प्रदेश भर में सहकारी समितियां ही गेहूं की उठान करती हैं। ललितपुर में अलग से नई व्यवस्था कैसे बनाई जा सकती है। सहकारी समितियों के सभी भुगतान भी कर दिए गए हैं। उन्हें इसमें सहयोग करना चाहिए। पूरे मामले से जिलाधिकारी को अवगत करा दिया है। डीएम मानवेंद्र सिंह ने कहा कि समस्या का समाधान जल्द निकाल लिया जाएगा।
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