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वूक्षों को मत काटो, धरती बंजर हो जाएगी
Updated Fri, 08 Jun 2018 02:08 AM IST
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वृक्षों को मत काटो, धरती बंजर हो जाएगी
विश्व पर्यावरण दिवस पर कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। विश्व पर्यावरण दिवस पर कौमी एकता की प्रतीक साहित्यिक संस्था हिंदी, उर्दू, अदबी बैनर तले कवि सम्मेलन और मुशायरा का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रकृति को बचाने का संदेश दिया। रामकृष्ण कुशवाहा ने अपनी रचनाएं पढ़ते हुए कहा कि वृक्षों को मत काटो, धरती बंजर हो जाएगी, दुनिया वालों को ये बात कब समझ में आएगी। रामस्वरूप नामदेव अनुरागी ने कहा कि पौधा लाए हैं हम रोपण के लिए, उसमें पानी तो देने दो, कोई तोड़े न उसे दोस्तो, उसमें फल तो आने दो। दशरथ प्रसाद पटेल परदेशी ने कहा कि जब से तोड़ा आपने प्रकृति का आवरण, तब से बिगड़ गया विश्व का पर्यावरण। कुसुम लता सोनी ने कहा कि पाप और पुुण्य की किताब है जिंदगी, जैसे कांटों के संग गुलाब है जिंदगी। अशोक क्रांतिकारी ने रचना पढ़ते हुए कहा कि चलो बाजार से पिंजरा नहीं एक पौधा खरीदें, परिंदे को कैद नहीं, आशियाने के लिए। जहीर ललितपुरी ने कहा कि सृष्टि का शृंगार है पर्यावरण, प्रेम का विस्तार है पर्यावरण। केके पाठक ने कहा कि सब सुखी हों, निरोगी कोई रोता रहे न जमीन पे, सबको मिलता रहे दाना पानी, कोई भूखा रहे न जमीन पे। मध्य प्रदेश के छतरपुर के घुवारा से आई शिवाली सोनी ने कहा कि पायल की छन-छन से छनके वन के खत कंगन, ओस की बूंदें हैं हम लड़की मन है इक दर्पण। कवि काका ललितपुरी ने कहा कि ये जिंदगी ही है कितनी प्यारी है दोस्तों जिंदगी, उधार भी जिंदगी तो जिंदगी कुछ भी नहीं। इस मौके पर शिखरचंद मुफलिस, एमएल भटनागर, सरवर हिंदोस्दानी, सुमनलता शर्मा, चांदनी, रामप्रकाश शर्मा, बृषभान भारद्वाज, जागेश्वर सोनी, मनोज पंथ, कंचन, तरुण, प्रिया, सिद्ध, नैंसी, हरगोविंद अरिहवार, राजाराम खटीक, मनीष कुशवाहा, अभिषेक गौरव सोनी, नंदलाल पहलवान उपस्थित रहे।
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विश्व पर्यावरण दिवस पर कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। विश्व पर्यावरण दिवस पर कौमी एकता की प्रतीक साहित्यिक संस्था हिंदी, उर्दू, अदबी बैनर तले कवि सम्मेलन और मुशायरा का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रकृति को बचाने का संदेश दिया। रामकृष्ण कुशवाहा ने अपनी रचनाएं पढ़ते हुए कहा कि वृक्षों को मत काटो, धरती बंजर हो जाएगी, दुनिया वालों को ये बात कब समझ में आएगी। रामस्वरूप नामदेव अनुरागी ने कहा कि पौधा लाए हैं हम रोपण के लिए, उसमें पानी तो देने दो, कोई तोड़े न उसे दोस्तो, उसमें फल तो आने दो। दशरथ प्रसाद पटेल परदेशी ने कहा कि जब से तोड़ा आपने प्रकृति का आवरण, तब से बिगड़ गया विश्व का पर्यावरण। कुसुम लता सोनी ने कहा कि पाप और पुुण्य की किताब है जिंदगी, जैसे कांटों के संग गुलाब है जिंदगी। अशोक क्रांतिकारी ने रचना पढ़ते हुए कहा कि चलो बाजार से पिंजरा नहीं एक पौधा खरीदें, परिंदे को कैद नहीं, आशियाने के लिए। जहीर ललितपुरी ने कहा कि सृष्टि का शृंगार है पर्यावरण, प्रेम का विस्तार है पर्यावरण। केके पाठक ने कहा कि सब सुखी हों, निरोगी कोई रोता रहे न जमीन पे, सबको मिलता रहे दाना पानी, कोई भूखा रहे न जमीन पे। मध्य प्रदेश के छतरपुर के घुवारा से आई शिवाली सोनी ने कहा कि पायल की छन-छन से छनके वन के खत कंगन, ओस की बूंदें हैं हम लड़की मन है इक दर्पण। कवि काका ललितपुरी ने कहा कि ये जिंदगी ही है कितनी प्यारी है दोस्तों जिंदगी, उधार भी जिंदगी तो जिंदगी कुछ भी नहीं। इस मौके पर शिखरचंद मुफलिस, एमएल भटनागर, सरवर हिंदोस्दानी, सुमनलता शर्मा, चांदनी, रामप्रकाश शर्मा, बृषभान भारद्वाज, जागेश्वर सोनी, मनोज पंथ, कंचन, तरुण, प्रिया, सिद्ध, नैंसी, हरगोविंद अरिहवार, राजाराम खटीक, मनीष कुशवाहा, अभिषेक गौरव सोनी, नंदलाल पहलवान उपस्थित रहे।