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कमली वाले का जिस पर करम हो गया, वो तो सत्यम शिवम् सुंदरम हो गया
Updated Thu, 05 Apr 2018 01:44 AM IST
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सांप्रदायिक भाईचारे के कलामों पर झूमे श्रोता
ललितपुर। सदनशाह की दरगाह पर आयोजित उर्स में दरगाह परिसर में कव्वालियों के आखिरी दिन मुंबई के कव्वाल आमिर-आरिफ व गुलाम हबीब पेंटर ने सांप्रदायिक भाईचारे के कलाम सुनाकर सम़ां बांधा।
सदनशाह बाबा की दरगाह पर 31 मार्च से उर्स के आयोजन के साथ ही यहां पहले दिन से ही कव्वालियों का आयोजन किया गया। इसे सुनने के लिए स्थानीय के अलावा दूर-दराज से लोगों का आना जाना लगा रहा। मंगलवार को आयोजित कव्वाली के कार्यक्रम में कव्वालों ने बाबा सदन शाह का अपने कलाम पेश कर यशोगान किया। मुुंबई से आए कव्वाल आमिर-आरिफ दोनों ही के बीच शानदार मुकाबला रहा। बाबा सदनशाह की ही दुआओं का असर है कि हर कोई उर्स के आयोजन में खिंचा चला आता है। मुशायरे से शुरु हुए कार्यक्रमों के पश्चात कव्वालियों के मुकाबले में हजारों श्रोता उपस्थित रहे। यहां केवल क्षेत्र के ही नहीं बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों से भी बड़ी तादाद में श्रद्धालु बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने के साथ-साथ कव्वालियों का लुत्फ उठाते रहे। चौथे दिन आमिर-आरिफ मुंबई व गुलाम हबीब पेंटर ने रात से सुबह तक खुदा और नवी की शान व हुसैनी रंग से वाजा को सुबह सलाम भेजा। रात से सुबह तक मेहमान-ए-कव्वालों ने समां बांधे रहे। पहले आमिर-आरिफ ने मंच संभाला। सबसे पहले खुदा की शान में अली-अली मोला अली...नात-ए-पाक पढ़ी, जिसको लोगों ने खूब सराहा। इसी दौरान नवी के मर्तबा को बताते हुए नाते पाक- कमली वाले का जिस पर करम हो गया, वो तो सत्यम शिवम सुंदरम हो गया। इसके बाद उन्होंने मनकवत सुनाई, जिस पर मौजूद श्रोता झूम उठे। गुलाम हबीब पेंटर ने मंच संभाला। सबसे पहले उन्होंने दादा हबीब पेंटर की शान में शेर पढ़ा। इसके बाद नात-ए-हद- सब नवियों में अफजल मेरा नवीं पढ़ा, तो सब झूमने पर मजबूर हो गए। इसके बाद उन्होंने जब- ये है मेरे नवी की शान और मेरी नस-नस बोले नबी-नबी सुनाया तो महफिल में लोग झूम उठे। श्रोता वाह-वाही करते रहे। इसी बीच उन्होंने दमा-दम मस्त कलंदर सुनाया तो सभी सुनते ही दीवाने खड़े होकर ताली बजाते हुए ख्वाजा के नारे लगाने लगे या गरीब नवाज या गरीब नवाज। इस पर कव्वाल ने ख्वाजा के दीवानों का शुक्रिया अदा किया। दरगाह परिसर में कव्वालियों का सिलसिला अलसुबह तक चलता रहा।
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ललितपुर। सदनशाह की दरगाह पर आयोजित उर्स में दरगाह परिसर में कव्वालियों के आखिरी दिन मुंबई के कव्वाल आमिर-आरिफ व गुलाम हबीब पेंटर ने सांप्रदायिक भाईचारे के कलाम सुनाकर सम़ां बांधा।
सदनशाह बाबा की दरगाह पर 31 मार्च से उर्स के आयोजन के साथ ही यहां पहले दिन से ही कव्वालियों का आयोजन किया गया। इसे सुनने के लिए स्थानीय के अलावा दूर-दराज से लोगों का आना जाना लगा रहा। मंगलवार को आयोजित कव्वाली के कार्यक्रम में कव्वालों ने बाबा सदन शाह का अपने कलाम पेश कर यशोगान किया। मुुंबई से आए कव्वाल आमिर-आरिफ दोनों ही के बीच शानदार मुकाबला रहा। बाबा सदनशाह की ही दुआओं का असर है कि हर कोई उर्स के आयोजन में खिंचा चला आता है। मुशायरे से शुरु हुए कार्यक्रमों के पश्चात कव्वालियों के मुकाबले में हजारों श्रोता उपस्थित रहे। यहां केवल क्षेत्र के ही नहीं बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों से भी बड़ी तादाद में श्रद्धालु बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने के साथ-साथ कव्वालियों का लुत्फ उठाते रहे। चौथे दिन आमिर-आरिफ मुंबई व गुलाम हबीब पेंटर ने रात से सुबह तक खुदा और नवी की शान व हुसैनी रंग से वाजा को सुबह सलाम भेजा। रात से सुबह तक मेहमान-ए-कव्वालों ने समां बांधे रहे। पहले आमिर-आरिफ ने मंच संभाला। सबसे पहले खुदा की शान में अली-अली मोला अली...नात-ए-पाक पढ़ी, जिसको लोगों ने खूब सराहा। इसी दौरान नवी के मर्तबा को बताते हुए नाते पाक- कमली वाले का जिस पर करम हो गया, वो तो सत्यम शिवम सुंदरम हो गया। इसके बाद उन्होंने मनकवत सुनाई, जिस पर मौजूद श्रोता झूम उठे। गुलाम हबीब पेंटर ने मंच संभाला। सबसे पहले उन्होंने दादा हबीब पेंटर की शान में शेर पढ़ा। इसके बाद नात-ए-हद- सब नवियों में अफजल मेरा नवीं पढ़ा, तो सब झूमने पर मजबूर हो गए। इसके बाद उन्होंने जब- ये है मेरे नवी की शान और मेरी नस-नस बोले नबी-नबी सुनाया तो महफिल में लोग झूम उठे। श्रोता वाह-वाही करते रहे। इसी बीच उन्होंने दमा-दम मस्त कलंदर सुनाया तो सभी सुनते ही दीवाने खड़े होकर ताली बजाते हुए ख्वाजा के नारे लगाने लगे या गरीब नवाज या गरीब नवाज। इस पर कव्वाल ने ख्वाजा के दीवानों का शुक्रिया अदा किया। दरगाह परिसर में कव्वालियों का सिलसिला अलसुबह तक चलता रहा।
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