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जीएसटी से किसी को राहत, तो किसी को परेशानी

Mon, 02 Jul 2018 02:32 AM IST
Updated Mon, 02 Jul 2018 02:32 AM IST
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जीएसटी से किसी को राहत, तो किसी को परेशानी
जीएसटी से किसी को राहत, तो किसी को परेशानी
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- एक साल पूरे होने पर बोले व्यापारी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जीएसटी को एक वर्ष पूरा होने पर किसी ने इसे व्यापारी हित में बड़ा सुधार बताया तो किसी ने इस टैक्स प्रणाली को परेशानी भी बताया।
जीएसटी को लेकर कई व्यापारी संतुष्ट भी दिखे, लेकिन जीएसटी की जटिल प्रक्रिया में सुधार की जरूरत भी बताई। वहीं कुछ व्यापारी इस टैक्स के दायरे से बाहर आने की मांग को लेकर अब भी शासन की ओर आस लगाए बैठे। जानकारों के मुताबिक लगातार हो रहे बदलाव को भी सरकार का एक अच्छा कदम बताया है, लेकिन इसमें अभी और भी सुधार की जरूरत बता रहे हैं। इस संबंध में व्यापारियों व जीएसटी के जानकारों ने टैक्स के बारे में अपनी राय रखी।

व्यापार का तरीका सिखाया
जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारी व्यापार करने का सही तरीका सीख सका है। इससे टैक्सेशन की प्रक्रिया भी मालूम हो सकी है। जीएसटी के दायरे में माल की बिक्री किस प्रकार करनी है यह भी समझ में आ सका है, लेकिन अब भी जीएसटी में काफी सुधार की जरुरत है। बहुत से उत्पादों में जीएसटी 14 प्रतिशत से एकाएक 28 प्रतिशत नहीं करना था। इसमें सुधार किया जाना चाहिए।
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- अंशुल भदौरा, व्यापारी।

व्यापारी परेशान, पर भविष्य अच्छा
जीएसटी में शासन द्वारा लगातार बदलाव किया जा रहा है, जिससे भारी सुधार भी हुआ है और इसके परिणाम भी अच्छे दिखने लगे हैं। जीएसटी जटिल प्रक्रिया है, जो सरल की जा रही है। अभी लोग परेशान जरूर हैं, लेकिन इसका भविष्य अच्छा है। हर नई व्यवस्था से परेशानी आती है, लेकिन इससे व्यापारियों को व्यापार में काफी सुविधाएं भी मिली हैं।
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-अशोक अनौरा, अध्यक्ष, गल्ला व्यापार संघ।
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अब भी बहुत खामियां, सुधार की जरूरत
जीएसटी में जो पूर्व में रिटर्न फाइल में गलतियां हो गई थीं, उसके रिवाइज का अभी तक कोई विकल्प नहीं आया है। यदि रिटर्न मेें एक लाख दस हजार लिखना था और लिपिकीय त्रुटि से वो 11 लाख हो गया, तो उसको सुधारने के लिए कोई विकल्प आया है। रिटर्न प्रक्रिया में जो जीएसटीआर-2 भरा जाना है, उसकेे भरने की सरकार अभी तक कोई व्यवस्था अब तक नहीं ला पाई है।

नितिन श्रीवास्तव, कर अधिवक्ता।

टैक्स प्रणाली एक होने से आसानी
जीएसटी में कलेक्शन बड़ा है और प्रदेश कलेक्शन में नंबर एक रहा है। इसके लागू होने से कपड़ा व्यापारी बड़े हैं, पहले रेडिमेड कपड़ा व्यापारी ही पंजीकृत होते थे। अंतर्राज्यीय बहती खत्म होने से एक ही रेट टैक्स हो गया है। ऑनलाइन होने से पोर्टल पर किसी भी समय ईवेबिल डाउन हो सकता है, जिससे व्यापारी को कार्यालय जाना कम हो गया है। ग्राहक को सुविधा भी मिली है। यदि ग्राहक संतुष्ट नहीं है तो वह वाट्सएप से शिकायत भी कर सकता है, जिसकी जांच भी कराई जाएगी।
प्रवीण श्रोतीय, असिस्टेंट कमिश्नर, वाणिज्यकर विभाग।
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